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इन्फ्रा फंड के लिए 10 परियोजनाएं चिह्नित

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली December 20, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज कहा कि सरकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रिवर्स रीपो के रूप में ज्यादा पैसा रखने की बजाय ज्यादा कर्ज बांटने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि नकदी की किल्लत से सबसे अधिक जूझ रहीं गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) को नकदी मुहैया कराई गई है। दरअसल सरकार सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए कई कदम उठा रही है। औद्योगिक निकाय एसोचैम की ओर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीतारमण ने यह भी कहा कि एक बुनियादी ढांचा कोष के तहत कम से कम 10 परियोजनाओं की पहचान की गई है और उन्हें अग्रिम रकम मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा, 'मैंने अपने बजट भाषण में कहा था कि बुनियादी ढांचे के लिए 1 लाख करोड़ रुपये दिए जाएंगे। मैंने यह भी घोषणा की थी कि यह राशि अग्रिम दी जाएगी। आगामी वर्ष में कम से कम 10 नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंजूरी दी जाएगी ताकि उन्हें अग्रिम पैसा मिल जाए।' 
 
बजट में सीतारमण की घोषणा के बाद केंद्र सरकार ने सितंबर में एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया था, जिसे 2024-25 तक 100 करोड़ रुपये के निवेश के लिए बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को चिह्नित करने का काम सौंपा गया था। सीतारमण ने उद्योग के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय कंपनियों को 'खुद पर संदेह' के मूड से बाहर आना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बजट के बाद उठाए गए कदमों का जमीन पर असर दिखने लगा है। सीतारमण ने कहा कि भारत के वृहद आर्थिक संकेत मजबूत आधार पर टिके हैं। महंगाई को नियंत्रित रखा गया है, वृहद आर्थिक रुझान और एफडीआई की आवक मजबूत है और विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर है। 
 
उन्होंने कहा, 'यह सरकार नहीं चाहती कि कारोबार बंद हों। हम विधायी और प्रशासनिक बदलावों के जरिये उन्हें उबारना चाहते हैं...हम आपके साथ हैं। मैं चाहती हूं कि आप अपने दिमाग से खुद पर संदेह को पूरी तरह से भगा दें।' सीतारमण ने कहा, 'बजट के बाद कई कदम उठाए गए हैं, जो उद्योग के लिए थे। संभवतया उनमें से कुछ ने जमीन पर सकारात्मक असर दिखाना शुरू कर दिया है।' उन्होंने सरकार द्वारा बजट के बाद उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि नकदी की किल्लत दूर की गई है, सरकारी बैंकों एवं एनबीएफसी में पूंजी डाली गई है और पीएसयू के बोर्ड को पेशेवर बनाया गया है। 
 
मंत्री ने कहा कि सरकार ने सितंबर में कॉरपोरेट कर की दर में कटौती की है। इससे भारत में बड़ी मात्रा में निवेश आने के आसार हैं। वित्त मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार कर संग्रह में पारदर्शिता और तकनीक का उपयोग लेकर आई है और करदाताओं का शोषण खत्म किया गया है। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत मौजूदी के बिना कर आकलन शुरू होने से कर शोषण गुजरे जमाने की बात होने जा रही है। उन्होंने कहा, 'हम हर किसी को आश्वस्त करते हैं कि अगर आपको कर अधिकारियों से नोटिस मिलता है और यदि इस पर डीआईएन नवंबर नहीं है तो इसे कोई नोटिस मत मानिए... इसके बाद भी आपको नोटिस मिलता है तो इसका जवाब दें। इसके बाद भी अगर कोई समस्या है तो यह बिना व्यक्तिगत मौजूदगी के कर आकलन होगा।'
 
घाटे के बजाय वृद्धि पर दें पूरा ध्यान 
 
बहुत से अर्थशास्त्रियों ने शुक्रवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और उनके अधिकारियों को सलाह दी कि वे कुछ समय राजकोषीय चिंताओं को भूलकर केवल आर्थिक वृद्धि पर ध्यान दें। बजट पूर्व बैठक में वित्त मंत्री को कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक की मदद से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को मौजूदा संकट से उबारा जाए। इस बैठक में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा, 'लगभग सभी मौजूद अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्र को अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए खर्च बढ़ाने की जरूरत है। वृद्धि शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिए।' बैठक में मौजूूद अर्थशास्त्रियों ने कहा कि मध्यम अवधि में तीन फीसदी राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करने की कोशिश करना बेकार है क्योंकि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम लागू होने के बाद यह लक्ष्य कभी हासिल नहीं हो पाया है। केंद्र को उम्मीद है कि वह 2020-21 में जीडीपी के 3 फीसदी राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर लेगा। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए घाटे का लक्ष्य 3.3 फीसदी है। हालांकि आर्थिक मंदी से कर राजस्व प्रभावित हो रहा है, इसलिए चालू  वर्ष में घाटा 3.8 फीसदी रह सकता है।
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