बिजनेस स्टैंडर्ड - मौजूदा मुद्रास्फीति से नही हों भयभीत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, January 20, 2020 03:10 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

मौजूदा मुद्रास्फीति से नही हों भयभीत

अजय शाह /  December 20, 2019

मौद्रिक नीति फिलहाल सही दिशा में है और वह खुदरा मुद्रास्फीति को 4 फीसदी के तय लक्ष्य में रखने के लिए उपयुक्त कार्य कर रही है। वह इतना ही कर सकती है। विस्तार से बता रहे हैं अजय शाह 

 
मुद्रास्फीति में इजाफा हुआ है। सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल इसकी अहम वजह है। यह ऐसा समय नहीं है जब अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दबाव की ज्यादा चिंता की जाए। रिजर्व बैंक मौद्रिक नीति के मामले में एकदम सही राह पर है। दिक्कत वित्तीय तंत्र के साथ है: सरकारी बॉन्ड के यील्ड कर्व के शॉर्ट एंड पर आकर्षक ब्याज दर देश के कई उधारकर्ताओं के लिए आकर्षक ब्याज दर में परिवर्तित नहीं हो रही। खुदरा मूल्य सूचकांक में खाद्य एवं पेय पदार्थों की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है। इस क्षेत्र की मुद्रास्फीति वर्ष 2019 के आरंभ में शून्य से बढ़कर नवंबर में 8.7 फीसदी हो गई। इससे कुल खुदरा मुद्रास्फीति को बढ़ाने में मदद मिली है और यह 3 फीसदी से बढ़कर 5.5 फीसदी हो गई। कई लोग मौद्रिक नीति के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
 
यहां तक कि आदर्श स्थितियों में भी मौद्रिक नीति एक लंबे अंतराल के साथ काम करती है। ऐसे में जब हम मौद्रिक नीति समिति के निर्णयों के बारे में सोचते हैं तो हमें अतीत की सूचनाओं में देरी पर प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। हमें भविष्य पर दृष्टि डालनी चाहिए और देखना चाहिए कि सन 2020 के आखिर तक अर्थव्यवस्था की क्या स्थिति रहेगी। क्योंकि मौद्रिक नीति उसे प्रभावित करने में कारगर हो सकती है। मौजूदा महंगाई में सब्जियों की अहम भूमिका है। खुदरा मूल्य सूचकांक में सब्जियों की हिस्सेदारी 6 फीसदी है। नवंबर में इस क्षेत्र में सालाना आधार पर मुद्रास्फीति 36 फीसदी रही। परंतु सब्जियों को कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के लिए जाना जाता है। मसलन टमाटर की बुआई से उपज तक का समय 90 दिन का है। ऐसे में आपूर्ति के कारण कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव आता है।
 
सब्जियों की कीमतों में पिछली उछाल 2017 के अंत में आई थी। दिसंबर 2017 में सब्जियों में मुद्रास्फीति 29 प्रतिशत थी। परंतु इसके पश्चात तत्काल आपूर्ति संबंधी प्रतिक्रिया हुई और सब्जियों की कीमतें जुलाई तक दोबारा ऋणात्मक हो गईं।  जब टमाटर की कीमतों में तेजी आई तो लोगों ने वैयक्तिक स्तर पर टमाटर की खेती का रकबा बढ़ाया। कई अन्य प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। लोगों ने कृषि क्षेत्र में कच्चे माल का इस्तेमाल बढ़ाया और एक खास सीमा के बाद उपज का ध्यान रखा। परिणामस्वरूप जब कीमतें ज्यादा होती हैं तो वैयक्तिक स्तर पर लोग बिजली और डीजल या शीतगृहों के भुगतान पर अधिक व्यय करते हैं ताकि उपज के अवमूल्यन की दर कम की जा सके। व्यवहार में यह बदलाव उस खेत के प्रति भी होता है जहां पहले बुआई की गई थी। यदि टमाटर का कोई पौधा 60 दिन पुराना है और बाजार में टमाटर की कीमत अच्छी मिल रही है तो इस बिंदु पर फसल की बेहतरी के लिए काफी प्रयास किए जाते हैं ताकि अंतिम आपूर्ति प्रतिक्रिया में अंतर किया जा सके।
 
इस बात की संभावना रहती है कि ऐसा दोबारा होगा। नवंबर में सब्जियों की उच्च मुद्रास्फीति के चलते आपूर्ति प्रतिक्रिया शुरू हुई और कुछ ही महीनों में सब्जियों की महंगाई दोबारा कम हो जाएगी। ऐसे में आज मौद्रिक नीति विचार में असल मुद्दा 2020 के आखिर में खुदरा मूल्य सूचकांक के पूर्वानुमानों पर विचार करना है। जाहिर है नवंबर 2019 की ऊंची कीमतों का ज्यादा असर 2020 के आखिर के पूर्वानुमानों पर नहीं पडऩा चाहिए। मौद्रिक नीति ढांचे के डिजाइन में इन पहलुओं को अच्छी तरह समझा गया था। यही कारण है कि लक्षित दायरा 2 फीसदी से 6 फीसदी के बीच रखा गया, बजाय कि 4 फीसदी के। हमें आरबीआई को 4 फीसदी खुदरा मुद्रास्फीति के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए लेकिन उम्मीद करनी चाहिए कि 2 से 6 फीसदी के दायरे में और अधिक उतार-चढ़ाव नजर आएंगे। संक्षेप में कहा जाए तो जब हम 2 फीसदी से कम या 6 फीसदी से अधिक का उतार-चढ़ाव देखते हैं तो हमें यह पता होना चाहिए कि उक्त गलतियां एक वर्ष या दो वर्ष से अधिक पहले की होंगी और हमें इन्हें बेहतर ढंग से समझने के लिए इस पर करीबी नजर डालनी होगी कि आखिर गलती कहां हो गई और प्रक्रिया में कैसे सुधार किया जा सकता है? 
 
मौद्रिक नीति के कई उपकरण हैं इसलिए शीर्ष मौद्रिक नीति यानी रीपो दर और रिवर्स रीपो दर से परे नजर डालने की भी आवश्यकता है। मौद्रिक नीति के तमाम उपकरण साथ आते हैं और 91 दिन के ट्रेजरी बिल की शर्तें निर्धारित करते हैं। मौद्रिक नीति के मामले में ब्याज दर सबसे सटीक तरीके से यह व्याख्या करती है कि वह कैसे काम करती है। सन 2018 के आरंभ में मौद्रिक नीति समिति को लगा कि सख्ती की आवश्यकता है और उसने दरों में 100 आधार अंक की बढ़ोतरी की दी। सात प्रतिशत के इस उच्चतम स्तर से उसने करीब 300 आधार अंकों की कटौती की।
 
ऐसे में वास्तविक तौर पर नीतिगत दर करीब एक फीसदी है जो सही प्रतीत होता है। अर्थव्यवस्था में एक दिक्कत है कि कर्जदार बहुत ऊंची दरों पर भुगतान कर रहे हैं। यह मौद्रिक नीति नहीं बल्कि वित्तीय नीति की समस्या है। भविष्य में दरों में कटौती की गुंजाइश है। मुझे संदेह है कि नीतिगत दरों में आगे और कटौती होगी। अल्पावधि में मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा अंतर नहीं पैदा करेगा क्योंकि पहले ही काफी ऊंची ब्याज दर चुकाई जा रही है। अर्थव्यवस्था में आज ब्याज दर के कई अनुमान ऐसे मूल्य पर हैं जो 4 फीसदी के मुद्रास्फीति लक्ष्य से दूर हों। जरूरत यह है कि प्रतिफल की प्रशासित दर 5 फीसदी के आसपास हो लेकिन वह 8 से 9 फीसदी के बीच है। नॉमिनल जीडीपी वृद्घि दर के अनुमान, जिन्हें बजट प्रक्रिया में शामिल किया जाता है उन्हें कम करने की आवश्यकता है। इन्हें तत्काल कम करना व्यवहार्य भी है और इससे काफी मदद भी मिलेगी। 
 
अर्थव्यवस्था की असल दिक्कत है कमजोर कारोबारी चक्र की परिस्थितियों का वृद्घि में गिरावट के रुझान पर परिलक्षित होना। हमने सन 1991 से 2011 के बीच उच्च वृद्घि का दौर देखा। परंतु उसके बाद इसमें धीमापन आ गया। मौद्रिक नीति कारोबारी चक्र में आ रहे उतार-चढ़ाव से निपटने का अच्छा तरीका है लेकिन वृद्घि के रुझान में गिरावट से निपटने का नहीं। व्यापक तौर पर देखें तो आज मौद्रिक नीति सही दिशा में है। वह 4 फीसदी की खुदरा मुद्रास्फीति को लेकर सही प्रदर्शन कर रही है। मौद्रिक नीति ज्यादा से ज्यादा यही कर सकती है। हमें मुद्रास्फीति में हालिया बढ़ोतरी की चिंता नहीं करनी चाहिए। न ही मौद्रिक नीति के मौजूदा आचरण की। 
Keyword: india, economy, GDP, repo rate, bank,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या संपत्तियों की बिक्री से पूरा होगा विनिवेश का लक्ष्य?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.