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महाराष्ट्र: कपड़ा इकाइयों को सस्ती बिजली

दिलीप कुमार झा / मुंबई December 20, 2019

महाराष्ट्र में कपड़ा इकाइयों को बड़ी राहत देते हुए सरकार उन्हें बिजली सब्सिडी देने जा रही है। सरकार राज्य में पावरलूम, कताई मिलों और कपड़ा इकाइयों को प्रति यूनिट 3.77 रुपये की दर से बिजली सब्सिडी देने जा रही है। कपड़ा इकाइयां अपनी कमजोर बैलेंस शीट के कारण कार्यशील पूंजी जुटाने को लेकर संघर्ष कर रही हैं। इनमें छोटे और मध्य आकार वाली इकाइयों की संख्या अधिक है। इनमें से बहुत-सी इकाइयों ने घरेलू बाजार की कमजोर मांग और निर्यात में तीव्र गिरावट के कारण अपनी परिचालन क्षमता का कुछ हिस्सा बंद कर दिया था।
 
कपड़ा मूल्य शृंखला की उत्पादन लागत में करीब आधा हिस्सा बिजली का होता है। एक ओर जहां पूरे भारत में कताई मिलें कपास की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने को लेकर संघर्ष कर रही हैं, वहीं वस्त्र निर्माताओं के सामने गिरते निर्यात की चुनौती है। देश में जारी आर्थिक सुस्ती से कपड़े और सिले-सिलाए वस्त्रों की घरेलू मांग कम हो गई है जिससे लाभ मार्जिन में लगातार गिरावट आ रही है। महाराष्ट्र सरकार की कपड़ा आयुक्त माधवी खोडे चवड़े ने वस्त्र और कपड़ा विनिर्माताओं के मेले से इतर बातचीत में कहा, 'हमने पावरलूम और वस्त्र मूल्य शृंखला में दूसरी इकाइयों को प्रति यूनिट 3.77 रुपये की सब्सिडी देनी शुरू कर दी है। इस सब्सिडी की घोषणा सरकार ने की थी। पैसा जारी होने से निश्चित तौर पर राज्य में कपड़ा और वस्त्र इकाइयों को फायदा होगा।'
 
भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय में अतिरिक्त आयुक्त अजीत चव्हाण ने कहा, 'महाराष्ट्र में सोलापुर दुनिया के एकमात्र यूनिफॉर्म (वर्दी) केंद्र के तौर पर उभरा है। लेकिन इस केंद्र की निर्माण इकाइयों को निर्यात पर ध्यान देने की जरूरत है।'   सोलापुर गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एसजीएमए) के निदेशक अमित कुमार जैन ने कहा, 'वर्दी निर्माण उद्योग अपेक्षाकृत तीव्र गति से बढ़ रहा है और यह मौजूदा 18,000 करोड़ रुपये की जगह 2024 तक 25,000 करोड़ रुपये का क्षेत्र बन सकता है।' राज्य सरकार ने राज्य में सहकारी कताई मिलों के लिए तीन रुपये प्रति यूनिट तथा बुनाई, वस्त्र और होजरी की बड़ी इकाइयों के लिए दो रुपये प्रति यूनिट की बिजली सब्सिडी देने की घोषणा की है जिसके लिए 150 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इस बीच इक्रा के एक अध्ययन में कहा गया कि कताई मिलों के राजस्व में छह फीसदी की गिरावट आ सकती है। इस अध्ययन में कहा गया है कि अन्य उत्पादक देशों से मिल रही प्रतिस्पर्धा में वृद्घि और घरेलू खपत में सुस्ती के बीच कमजोर निर्यात मांग के कारण वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में उत्पादन और प्राप्ति दोनों पर दबाव देखा जा रहा है।    
 
घरेलू कच्चे माल की अधिक लागत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय कपास के मुकाबले घरेलू कपास के अधिक दामों के कारण भी निर्यात की प्रतिस्पर्धी क्षमता को चोट पहुंची है। अक्टूबर 2019 के दौरान निर्यात में दिखे सुधार से आगामी तिमाहियों में उद्योग को सूती धागा निर्यात के संबंध में उम्मीद दिख रही है। उनकी इस उम्मीद को घरेलू स्तर पर कपास की कीमतों में आई कमी से भी बल मिला है।   घरेलू कताई मिलों को आशंका है कि वित्त वर्ष की पहली छमाही में कम बिक्री और कमजोर कमाई से वित्त वर्ष 2020 में प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। घरेलू कपास कताई उद्योग पर इक्रा के हालिया सर्वेक्षण के नतीजों के मुताबिक यह परिदृश्य अनुमान के मुताबिक ही है। उद्योग सुस्ती से उबर रहा है।     
 
इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (कॉर्पोरेट सेक्टर रेटिंग्स) जयंत राय ने कहा, 'मई से सितंबर 2019 के दौरान निर्यात में तीव्र गिरावट के बाद हाल के महीनों में निर्यात में कुछ उछाल जरूर दिखाई दी है, लेकिन वह पिछले वित्त वर्ष के स्तर से नीचे ही रही। सर्वेक्षण में शामिल लोगों ने राजस्व में पांच फीसदी से अधिक की गिरावट और वित्त वर्ष 2020 में परिचालन लाभ में तीन फीसदी तक की कमी की आशंका जताई है।' उन्होंने कहा कि निर्यात में उछाल और नया सत्र शुरू होने पर कपास की कीमतें नीचे आने से आगामी तिमाहियों में कताई मिलों के प्रदर्शन में सुधार आने के आसार हैं।
Keyword: textiles, cloths, power, subsidy,,
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