बिजनेस स्टैंडर्ड - अयस्क और इस्पात क्षमता बढ़ेगी
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अयस्क और इस्पात क्षमता बढ़ेगी

ईशिता आयान दत्त और अभिषेक रक्षित / कोलकाता December 19, 2019

देश के प्रमुख इस्पात एवं लौह अयस्क उत्पादकों द्वारा अगले दो वर्षों में कम से कम 1.3 करोड़ टन क्षमता जोड़े जाने की संभावना है। उत्पादकों द्वारा बाजार में ऐसे समय में क्षमता में यह वृद्घि किए जाने का अनुमान है जब बाजार 3 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। निजी क्षेत्र में, जेएसडब्ल्यू स्टील अगले साल डोल्वी में अपना 50 लाख टन का विस्तार पूरा कर सकती है, कलिंगनगर में टाटा स्टील का दूसरे चरण का विस्तार चल रहा है और इसके कैलेंडर वर्ष 2021 तथा वित्त वर्ष 2022 के बीच पूरा हो जाने की संभावना है। सरकार के स्वामित्व वाली एनएमडीसी ने वित्त वर्ष 2021 में अपने 30 लाख टन क्षमता वाले नए संयंत्र को पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा है। वहीं 2018-19 में क्षमता वृद्घि करने वाली सेल अब इसमें सुधार लाए जाने की प्रक्रिया से गुजर रही है। 
 
एएम/एनएस इंडिया मध्यावधि में अपनी खेपें बढ़ाकर 85 लाख टन और दीर्घावधि में 1.2-1.5 करोड़ टन किए जाने के लिए प्रतिबद्घ है। हालांकि इस बारे में सही समय-सीमा अभी स्पष्ट नहीं मौजूदा समय में एएम/एनएस की अधिकतम क्षमता 96 लाख टन की है, हालांकि यह फिलहाल 75 लाख टन का उत्पादन कर रही है। जहां अगले दो वर्षों में 1.3 करोड़ टन क्षमता जुडऩे की संभावना है, वहीं 2024-2025 तक मंत्रालय मौजूदा कंपनियों के चालू नियोजित क्षमता विस्तार से 2.8-3 करोड़ टन क्षमता की उम्मीद कर रहा है। 
 
इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयंत रॉय ने कहा, 'वित्त वर्ष 2001-वित्त वर्ष 2016 के दौरान घरेलू इस्पात उत्पादन और खपत दोनों में लगभग 7.9 प्रतिशत की सालाना चक्रवृद्घि दर से वृद्घि दर्ज की गई। हालांकि वित्त वर्ष 2017-वित्त वर्ष 2020 के दौरान इस्पात उत्पादन और खपत में 3 और 7 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई। दूसरी तिमाही के लिए सालाना आधार पर वृद्घि चालू वित्त वर्ष में 3 प्रतिशत से कुछ ऊपर रही।' हालांकि रॉय ने स्पष्ट किया कि यदि घरेलू क्षमता अगले 3-4 साल में 2 करोड़ टन तक बढ़ती है तो इसके लिए खपत में 4-5 प्रतिशत वृद्घि किए जाने की जरूरत होगी जिससे कि 78-80 प्रतिशत के मौजूदा क्षमता इस्तेमाल को बरकरार रखा जा सके। जेएसडब्ल्यू के निदेशक (वाणिज्यिक एवं विपणन) जयंत आचार्य ने कहा, 'भारत वृद्घि की राह पर है। कम जीडीपी वृद्घि का एक वर्ष बुनियादी आधार नहीं बदलेगा। वृद्घि की रफ्तार फिर से मजबूत होगी।'
 
आचार्य के अनुसार, मांग परिदृश्य में पहले ही कुछ सुधार आया है और यात्री कार बिक्री में इसका असर दिखा है। कंज्यूमर अप्लायंस के परिदृश्य से भी मौसमी मांग में तेजी स्पष्ट दिखी है। कोरियाई फर्म पोस्को के भारतीय परिचालन के प्रबंध निदेशक जी एच बांग का भी कहना है कि मांग में कुछ सुधार आया है। 
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