बिजनेस स्टैंडर्ड - 'जीएसटी क्रेडिट पर रोक से नकद प्रवाह पर होगा असर'
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'जीएसटी क्रेडिट पर रोक से नकद प्रवाह पर होगा असर'

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 19, 2019

उद्योग जगत को डर है कि जीएसटी परिषद द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की और रकम को रोके जाने से नकद प्रवाह पर असर होगा। ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था में व्याप्त सुस्ती के कारण नकदी के स्रोत बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं तब जीएसटी परिषद ने सही प्रारूप में अपलोड नहीं किए गए इनवॉइसों के लिए भुगतान किए जाने वाली राशि को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है।  परिषद ने आज इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसे इस प्रकार से समझ सकते हैं कि यदि आपने अपने आपूर्तिकर्ताओं को 1,000 रुपये कर के रूप में भुगतान किया है और अपने सारांश इनपुट-आउटपुट-फॉर्म जीएसटीआर 3बी पर इसका दावा आईटीसी के रूप में किया है, तब आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके सभी आपूर्तिकर्ता सभी इनवॉइसों को अपने आपूर्ति पक्ष वाले रिटर्न- जीएसटीआर 2ए में अपलोड करें।
 
अब, यदि इनवॉइसों की राशि दावा किए गए आईटीसी का 20 फीसदी है और इसे आपके आपूर्तिकर्ताओं ने अपलोड नहीं किया है तब आपका पात्र क्रेडिट केवल 800 रुपये होगा। जीएसटी परिषद के निर्णय को अधिसूचित होने के बाद आप 80 रुपये के आईटीसी (800 रुपये का 10 फीसदी) दावा कर सकते हैं। इससे पहले 800 रुपये पर 160 रुपये का दावा किया जा सकता था।  अक्टूबर से पहले जीएसटीआर 3बी में जो भी दावा किया गया अधिकारियों ने पूरी रकम जारी की थी। इस साल अक्टूबर में सरकार ने इस क्रेडिट को कम कर पात्र क्रेडिट का 20 फीसदी कर दिया था जिसे अब और अधिक घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। 
 
क्लीयर टैक्स के मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा कि इस रकम को घटाकर 10 फीसदी किया जाना कारोबार के लिए चुनौतीपूर्ण है। कारोबारियों को लगातार अपने आपूर्तिकर्ताओं से इनवॉइस अपलोड करने को लेकर संपर्क में रहना पड़ेगा। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर एमएस मणि ने कहा आईटीसी पर रोक से फंसी हुई कार्यशील पूंजी में इजाफा होगा। सीजीएसटी अधिनियम के तहत नियम 36(4) के तहत इस तरह के रोक प्रभावी होते हैं जिसे पहले ही दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है। उन्होंने कहा, 'कारोबारी इस तरह के प्रतिबंधों के हटने का स्वागत करेंगे जो जीएसटी के प्रमुख सिद्घांतों के अनुरूप नहीं है। जीएसटी में पूरी मूल्य शृंखला में बाधारहित क्रेडिट प्रवाह की बात है।'  केपीएमजी में पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा कि बहुत सी बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने महीने दर महीने मिलान की जल्दबाजी के कारण इस 20 फीसदी या 10 फीसदी क्रेडिट को पूरी तरह से छोड़ दिया है। ईवाई में कर पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि कर संग्रह में आ रही गिरावट और क्रेडिट धोखाधड़ी को बंद करने की बात को देखते हुए सरकार ने अज्ञात इनवॉइसों के अनुपात को घटा दिया है जिस पर क्रेडिट लिया जा सकता था।
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