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घटेगी राज्यों के राजस्व वृद्धि की गारंटी!

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली December 18, 2019

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून के तहत राज्यों को मिलने वाले राजस्व में सालाना वृद्धि  अगले साल से घटकर 10 या 12 प्रतिशत रह जाएगी, जो इस समय 14 प्रतिशत देने का वादा किया गया है। एक अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि बहरहाल यह बदलाव अभी विचाराधीन है और अगर राज्य इस पर व्यापक रूप से सहमत हो जाते हैं तो अगले वित्त वर्ष से इसे लागू किया जा सकता है। ऐसा कहा जा रहा है कि राज्य इस तरह के किसी प्रस्ताव का कड़ा विरोध करेंगे। 
 
सूत्रों का कहना है कि दरअसल इस विचार पर 15वें वित्त आयोग के चेयरमैन  एनके सिंह ने इसके पहले की जीएसटी परिषद की बैठक में अपनी प्रस्तुति के दौरान चर्चा की थी। वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'ऐसे किसी बदलाव पर तत्काल कोई चर्चा नहीं होने जा रहा है, लेकिन दीर्घावधि के हिसाब से इस पर विचार किया जाएगा।'  जीएसटी परिषद की बैठक इस समय चल रही है और वह इस सुझाव को संज्ञान में लेकर इस पर चर्चा कर सकती है। कानून के तहत केंद्र सरकार राज्यों के जीएसटी राजस्व में 14 प्रतिशत बढ़ोतरी की रक्षा करने को प्रतिबद्ध है और अगर इसमें कोई कमी आती है तो जून 2022 तक केंद्र सरकार उसका मुआवजा देगी। जीएसटी परिषद ने राज्यों को मुआवजा देने के लिए जीएसटी दरों के ऊपर कुछ वस्तुओं पर मुआवजा उपकर लगाया था। 
 
अगर जीएसटी राजस्व में संरक्षित वृद्धि घटाकर 10 प्रतिशत कर दी जाती है तो केंद्र सरकार का 2020-21 में 25,000 करोड़ रुपये बचेगा, अगर कोई भी राज्य राजस्व में वृद्धि नहीं दर्ज करता। यह केंद्र के सकल राजकोषीय घाटे की 0.1 प्रतिशत राशि है। इससे आने वाले वर्षों में केंद्र को राजकोषीय चूक से बचने में आंशिक मदद मिलेगी।  वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में पेश किए गए दस्तावेजों से यह आंकड़े सामने आए हैं।  इस तरह से राज्य सरकारों को संरक्षित राजस्व न होने से कुछ राजस्व गंवाना पड़ सकता है, अगर वे 14 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य हासिल नहीं कर पाती हैं। वहीं केंद्र को भुगतान न करने से उसे लाभ होगा। 
 
अगर उपरोक्त उल्लिखित स्थिति की कल्पना करें तो संरक्षित राजस्व की व्यवस्था न होने से महाराष्ट्र को 4,000 करोड़ रुपये गंवाना पड़ेगा, जो राजस्व संग्रह में शीर्ष पर है। वहीं कर्नाटक और तमिलनाडु को क्रमश: 2,500 करोड़ रुपये और 2,000 करोड़ रुपये गंवाने पड़ेंगे।  अगर राजस्व में वृद्धि की गारंटी घटाकर 12 प्रतिशत की जाती है तो केंद्र सराकर को इस समझौते में करीब 15,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा।  विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा लगता है कि केंद्र व राज्यों की राजस्व वसूली में कमी को देखते हुए इस तरह के कदम पर विचार किया जा रहा है। 
 
नैशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनैंस ऐंंड पॉलिसी (एनआईपीएफपी) के सच्चिदानंद मुखर्जी ने कहा, 'राजस्व कम आने की वहज से संभवत: केंद्र सरकार अब से हर साल 14 प्रतिशत राजस्व वृद्धि की गारंटी नहीं दे सकेगी।'  कुल राष्ट्रीय जीएसटी राजस्व में कम हिस्सेदारी वाले पूर्वोत्तर राज्योंं को छोड़ दें तो कोई भी अन्य राज्य अपने दम पर 14 प्रतिशत जीएसटी वृद्धि दर्ज करने में सक्षम नहीं नजर आ रहा है। इस बात की संभावना है कि राज्य सरकारें मुआवजा की अवधि जून 2022 के आगे बढ़ाने की मांग करें और वे संरक्षित राजस्व में कम वृद्धि को स्वीकार कर लें। मुखर्जी ने कहा कि मुआवजा उपकर और राजस्व संरक्षण गारंटी राज्यों व केंद्र को जीएसटी परिषद से जुड़े रहने की मुख्य वजह है और अगर मुआवजा और उपकर खत्म हो जाता है तो राज्योंं के पास प्रोत्साहन के लिए कुछ नहीं रहेगा। 
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