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अच्छे मूल्यांकन के लिए क्षमता वृद्घि में सुधार जरूरी

ईशिता आयान दत्त /  December 17, 2019

एस्सार स्टील के रिजोल्यूशन प्रोफेशनल सतीश कुमार गुप्ता ने आगामी चुनौतियों के बारे में ईशिता आयान दत्त के साथ विस्तार से बातचीत की। गुप्ता ने दो साल से ज्यादा समय तक दिवालिया प्रक्रिया का प्रबंधन किया। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

 
आईबीसी के संदर्भ में एस्सार स्टील की समाधान प्रक्रिया कितनी महत्त्वपूर्ण है?
 
जून 2017 में आरबीआई द्वारा आईबीसी के तहत दिवालिया समाधान प्रक्रिया के लिए सौंपे गए 12 खातों में शामिल एस्सार स्टील का समाधान लेनदारों से संबंधित पूंजी की मात्रा और प्रतिशतता के संदर्भ में सबसे बड़ा समाधान है। यह साल के लिए सबसे बड़ा अधिग्रहण सौदा और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश भी है जिसने दुनिया में सबसे बड़ी इस्पात निर्माता आर्सेलरमित्तल से निवेश आकर्षित किया है। 
 
एस्सार स्टील की कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया के दौरान आईबीसी को कई बार कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा। इस मामले में कौन से मुख्य विवादास्पद मुद्दों को सुलझाया गया?
 
समाधान प्रक्रिया के दौरान आईबीसी को दो दौर की मुकदमेबाजी के साथ जूझना पड़ा। इस मामले के संदर्भ में कई मिसालें कायम हुईं।  
 
प्रक्रियाओं का प्रबंधन करना कितना चुनौतीपूर्ण था?
 
इस संदर्भ में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिसमें वैल्यू वृद्घि के लिए विभिन्न हितधारकों का प्रबंधन, विभिन्न फोरमों में परिचालन एवं मुकदमेबाजी प्रक्रियाओं में सुधार शामिल है। शुरुआती अवधि में, बड़ी चुनौती परिचालन को मजबूत बनाने की थी, क्योंकि परिचालन लेनदारों ने दिवालिया प्रक्रिया के शुरू में क्रेडिट सीमाओं पर जोर दिया। मौजूदा नकदी सीमाएं एमएसटीसी द्वारा मुहैया कराई गईं और कुछ अन्य आपूर्तिकर्ता बेहद उपयोगी थे। एनसीएलटी के निर्णय के बाद, परिचालन से प्राप्त रकम का मजबूत इस्पात बाजार का लाभ उठाने के लिए पुन: इस्तेमाल किया गया। इसके परिणामस्वरूप, लेनदारों की समिति और कंपनी के प्रबंधन की मदद से औसत उत्पादन 460,000 टन से बढ़ाकर प्रति महीने 600,000 टन किया जा सका। यह संभावित समाधान आवेदकों के समक्ष यह दिखाने के लिए जरूरी थी कि संयंत्र ऊंचे स्तरों पर परिचालन में सक्षम था जिससे उसके मूल्यांकन को बढ़ावा मिला और ऊंची बोलियों में मदद मिली।
 
बकायेदारों द्वारा पेश किए गए कुल दावे कितनी रकम के थे?
 
वित्तीय और परिचालन लेनदारों द्वारा लगभग 82,000 करोड़ रुपये के कुल दावे पेश किए गए थे। दस्तावेजों के आधार पर, लगभग 54,000 करोड़ रुपये के दावों को स्वीकार किया गया था, शेष विवादास्पद थे या उचित कानूनी दस्तावेजों द्वारा पुष्ट नहीं थे।
 
आप दो समाधान आवेदकों के बीच पात्रता की कसौटी पर बीच में थे। ऐसे में स्थिति कितनी कठिन थी?
 
सेक्शन 29ए की पात्रता पर निर्णय बेहद चुनौतीपूर्ण था, जिसमें आरपी के तौर पर सीओसी के समक्ष खरा उतरना था। नया क्लॉज होने की वजह से सेक्शन 29ए को पहली बार स्पष्ट किया गया था, और दोनों समाधान आवेदकों को अयोग्य करार देना वाकई एक चुनौतीपूर्ण समय था। सेक्शन 29ए के तहत पात्रता के संबंध में विभिन्न चुनौतियां एक लंबी मुकदमेबाजी वाला मुद्दा बन गईं और इसे सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय के साथ सुलझाया गया था जिसमें उसने अयोग्यता के निर्णय को बरकरार रखा था। हालांकि इस प्रक्रिया में बैंकिंग तंत्र को दो गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के बकाया के तौर पर 7,500 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
 
सीआईआरपी के दौरान एस्सार स्टील का प्रदर्शन कैसा रहा?
 
सीआईआरपी अवधि के दौरान एस्सार स्टील ने अपना सर्वाधिक उत्पादन और एबिटा दर्ज किया। उसने वित्त वर्ष 2017 में 54.7 लाख टन का रोल्ड इस्पात उत्पादन दर्ज किया, जो वित्त वर्ष 2019 में बढ़कर 67.8 लाख टन हो गया और इसका कर्मचारियों समेत सभी हितधारकों को लाभ मिला। 
 
क्या सीआईआरपी के दौरान प्रवर्तकों और प्रबंधन ने सहयोग किया?
 
हालांकि प्रवर्तकों/संबंद्घ इकाइयों/न्यूमेटल ने विभिन्न कानूनी मंचों पर मुकदमेबाजी पर ध्यान दिया, लेकिन कंपनी का परिचालन आईबीसी के नियमों के अनुसार किया गया था। जैसे ही परिचालन में सुधार आया, प्रवर्तक समूह की सहायक कंपनियों (बिजली, बंदरगाह, शिपिंग आदि से जुड़ी) को भी अच्छा लाभ हुआ। 
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