बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी अनुपालन में सख्ती का इरादा
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जीएसटी अनुपालन में सख्ती का इरादा

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 12 17, 2019

इन पर होगा विचार

सरकार एवं निजी तौर पर संचालित लॉटरी पर समान दर पर विचार संभव
राजस्व वृद्धि पर अधिकारियों की समिति देगी प्रस्तुति
रियल एस्टेट पर मंत्री समूह की रिपोर्ट

बिजनेस स्टैंडर्ड जीएसटी अनुपालन में सख्ती का इरादासरकार ने फ र्जी बिल लगाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) रिफंड में फर्जीवाड़े से निपटने के लिए मुहिम तेज कर दी है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बुधवार को होने वाली बैठक में कर अनुपालन नहीं करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटने के उपायों पर विचार किया जाएगा। परिषद की प्रस्तावित बैठक में कर अनुपालन नहीं करने वालों के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट का भुगतान रोकने, जुर्माना लगाने और नकली बिल देने पर गिरफ्तारी जैसे कड़े प्रावधान किए जा सकते हैं। 

विधि समिति ने सरकार के राजस्व के हितों की रक्षा के लिए कर प्रवंचना में संलिप्त सभी कारोबारों का आईटीसी भुगतान रोकने का प्रस्ताव रखा है। समिति ने कानून में एक प्रावधान लाकर आयुक्त या अधिकारी को आउटपुट टैक्स या आईटीसी के भुगतान के लिए इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट लेजर में रखी पूरी रकम या इसका एक हिस्सा रोकने की सिफारिश की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित जीएसटी परिषद की बैठक में राजस्व  में इजाफा करने के उपायों पर चर्चा के अलावा कानूनी मामले कम करने के लिए एक लोक शिकायत इकाई की स्थापना का भी प्रस्ताव दिया जाएगा।

एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'उद्योग जगत ने सोशल मीडिया के माध्यम से और पत्र लिखकर राजस्व संग्रह में कमी दूर करने पर ध्यान देने की मांग की है। इस दिशा में आगे बढऩे के लिए कुछ प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता होगी। परिषद की बैठक में इन विषयों पर विचार होगा।' अधिकारी ने कहा कि कारोबारियों द्वारा फर्जी बिल लगाने से कर नुकसान होता है, लिहाजा जो लेनदेन वास्तव में हुए ही नहीं हैं, उनके लिए संग्रहित कोष से भुगतान करना होता है।

अधिकारी ने कहा कि  इससे सीधे तौर पर सरकार को राजस्व का नुकसान होता है। परिषद राजस्व बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार करेगा। कर आधार बढ़ाने, अतिरिक्त संसाधन जुटाने और कर अनुपालन बढ़ाने के लिए अधिकारी समिति और मंत्रियों का समूह परिषद में ये उपाय विचार के लिए रखेंगे। परिषद के एजेंडा पत्र में कहा गया है, 'जीएसटी प्रभावी होने के बाद कर ढांचे को तर्कसंगत बनाने के लिए कई बार संशोधन हो चुके हैं। कर छूट की सीमा बढ़ाने और कंपोजिशन स्कीम आदि में बदलाव से जीएसटी राजस्व संग्रह पर नकारात्मक असर हुआ है। अनुमानिज राजस्व संगह और वास्तविक रकम की जरूरत के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। इससे निपटने के लिए तत्काल उपाय किए जाने की दरकार है।'

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