बिजनेस स्टैंडर्ड - राज्यों को 35,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति जारी
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राज्यों को 35,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति जारी

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली 12 16, 2019

जीएसटी मामला

बुधवार को जीएसटी परिषद की बैठक से पहले राज्यों का असंतोष दूर करने की कोशिश
कई राज्य जीएसटी मुआवजा मिलने में देरी से नाखुश

बिजनेस स्टैंडर्ड राज्यों को 35,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति जारीकेंद्र ने बुधवार को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक से पहले आज राज्यों को अपने पाले में करने की कोशिश की। राज्यों का असंतोष दूर करने के लिए केंद्र ने राज्यों को बकाया रकम के एवज में 35,000 करोड़ रुपये निर्गत किए हैं। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक ट्वीट में कहा, 'केंद्र सरकार ने जीएसटी मुआवजे के तौर पर राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को 35,198 करोड़ रुपये जारी किए हैं।'

समझा जा रहा है कि बुधवार को जीएसटी परिषद की बैठक से पहले इससे राज्यों के बीच सकारात्मक संदेश जाएगा। प्रस्तावित बैठक में राज्यों को बकाया रकम देने के लिए धन जुटाने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की जा सकती है। राज्य सभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बयान के अनुसार केंद्र राज्यों को मुआवजे के रूप में 9,783 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। सीतारमण के अनुसार यह उपकर से जुटाई गई रकम से अधिक है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष 31 दिसंबर तक 55,467 करोड़ रुपये जुटाए गए थे, लेकिन राज्यों को 65,250 करोड़ रुपये भुगतान किया गया था।

पिछले सप्ताह भाजपा शासित राज्य भी मुआवजा उपकर मुद्दे पर वित्त मंत्री के जवाब पर सकते में आ गए थे। वित्त मंत्री ने संसद के ऊपरी सदन में कहा था कि सरकार ने 2019-20 में अक्टूबर अंत तक बतौर उपकर जितनी रकम जुटाई थी, उससे अधिक वह राज्यों को जारी कर चुकी है। वित्त मंत्री के जवाब में भाजपा शासित राज्य के वित्त मंत्री ने कहा, 'आखिर यह कैसे संभव है? पिछले दो वर्षों के उपकर अधिशेष कहां हैं? क्या वित्त मंत्री यह कहना चाहती हैं कि केंद्र ने संचित निधि से इस रकम का भुगतान किया है?' 

मुआवजा अधिनियम के तहत अगर राज्यों का जीएसटी से प्राप्त राजस्व आधार वर्ष 2015-16 पर कम से कम 15 प्रतिशत रफ्तार से नहीं बढ़ता है तो केंद्र प्रत्येक दो महीने में इस अंतर का भुगतान करता है। इससे पहले राज्य खफा चल रहे थे, क्योंकि जीएसटी बैठक के लिए प्रस्तावित आधिकारिक मुद्दों में मुआवजा उपकर भुगतान हिस्सा नहीं है। इस महीने के शुरू में गैर-भाजपा शासित राज्यों के वित्त मंत्रियों ने सीतारमण से मुलाकात की थी और जीएसटी मुआवजे के भुगतान में विलंब पर चिंता जताई थी। इनमें ज्यादातर राज्यों की यह शिकातय थी कि मुआवजे में देरी से उनकी वित्तीय स्थिति प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर विकास कार्यों पर हो रहा है। जीएसटी परिषद की बैठक में कर आधार बढ़ाने, अतिरिक्त संसाधन जुटाने और कर अनुपालन बढ़ाने के लिए राजस्व संवर्द्धन समिति एक प्रस्तुति पेश करेगी। 

नरमी भांप शुरू कर दी थी दरों में कटौती : शक्तिकांत दास

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय बैंक ने समय से पहले ही आर्थिक वृद्धि की रफ्तार सुस्त पडऩे की स्थिति को भांप लिया था और यही वजह है कि उसने नरमी की आहट से पहले ही फरवरी से नीतिगत दर में कटौती शुरू कर दी थी। दास ने कहा कि देश का रिजर्व बैंक आर्थिक नरमी, मुद्रास्फीति में वृद्धि, बैंकों और एनबीएफसी की वित्तीय हालत को दुरुस्त करने के लिए जो भी जरूरी होंगे वह कदम उठाएगा। उन्होंने कहा कि फरवरी में आरबीआई के नीतिगत ब्याज दर में कटौती के फैसले से बाजार हैरान था। मुझे आश्चर्य है कि अब दरों में कटौती को रोकने के फैसले पर भी बाजार हैरान दिख रहा है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने बैंकों और नकदी संकट से जूझ रहे एनबीएफसी क्षेत्र की मदद के लिए कई नीतियां पेश की हैं। 
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