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बैंकों में फिर पूंजी डालेगी सरकार!

हंसिनी कार्तिक / मुंबई 12 16, 2019

मजबूत बैंकिंग पर जोर

विलय के बाद सार्वजनिक बैंकों में पुनर्पूंजीकरण पर हो सकता है निर्णय
बजट में वित्त मंत्री कर सकती हैं इसके लिए प्रावधान
विलय से संबंधित प्रक्रिया अभी चल रही है
कितनी पूंजी की होगी जरूरत, उसका किया जा रहा है आकलन
विलय के कारण अतिरिक्त प्रावधान से बढ़ सकता है एंकर बैंकों पर बोझ
अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मिल सकती है पूंजी

बिजनेस स्टैंडर्ड बैंकों में फिर पूंजी डालेगी सरकार!वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा इस साल सितंबर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण की घोषणा के करीब तीन माह बाद इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए इसमें शामिल 10 बैंक आकलन  के अग्रिम चरण में हैं। पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी), यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और इंडियन बैंक को एंकर बैंक माना गया है, जो अपेक्षाकृत 6 छोटे बैंकों का अपने में विलय करेंगे। विलय से बैंकों पर अतिरिक्त प्रावधान का बोझ आएगा, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आगामी आम बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी डालने के एक और चरण की शुरुआत हो सकती है।

बैंकों को कितनी मात्रा में पूंजी की जरूरत होगी और सरकार इसमें कितनी पूंजी का योगदान कर सकती है, इस बारे में जांच-परख की प्रक्रिया जोर-शोर से की जा रही है। केनरा बैंक ने ऑडिट और कंसल्टेंसी फर्म पीडब्ल्यूसी को नियुक्त किया है, वहीं इंडियन बैंक ने केपीएमजी को नियुक्त किया है। डेलॉयट को पीएनबी और यूनियन बैंक से इस काम का जिम्मा मिला है।

इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी पद्मजा चुंदरू ने कहा, 'हमें उम्मीद है कि जांच-परख की प्रक्रिया दिसंबर तक पूरी हो जाएगी।' सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के शीर्ष कार्याधिकारी के अनुसार विलय की प्रक्रिया चल रही है, वहीं एकीकरण में शामिल सभी बैंकों से जांख-परख का काम 31 दिसंबर तक पूरा करने को कहा गया है। उन्होंने कहा, 'जनवरी 2020 की पहले या दूसरे हफ्ते में इस जांच-परख के नतीजे सामने आने की उम्मीद है और यह भी पता चल जाएगा कि एंकर बैंकों को कितना अतिरिक्त प्रावधान करना पड़ेगा और विलय की वजह से बैंकों को अपने खाते में उसे शामिल करना होगा।'

बैंकर वित्त वर्ष 2020 की दिसंबर और मार्च तिमाही के वित्तीय नतीजों में विलय से संबंधित प्रावधान की लागत को दिखा सकते हैं। एक अन्य बैंकर ने कहा, 'अगली दो तिमाहियों में बैंक एक बार फिर घाटे में जा सकते हैं। हमारा मानना है कि पूंजी पर्याप्तता की समस्या नहीं होगी क्योंकि बैंक में पूंजी डालने की प्रक्रिया हाल ही में पूरी हुई है।' हालांकि एकीकरण पूरा होने के बाद पूंजी डालने की प्रक्रिया एक बार फिर शुरू होने की उम्मीद है। एकीकरण प्रक्रिया में शामिल एक अन्य सार्वजनिक बैंक के प्रमुख ने कहा, 'एकीकृत इकाई 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी होगी और हमारा मानना है कि एकीकृत बैंकों मेें पूंजी निवेश अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में हो सकती है।'

आम बजट में कितनी राशि के पुनर्पूंजीकरण की घोषणा की जा सकती है, उसका अनुमान लगाना अभी जल्दबाजी होगा। लेकिन बैंकरों का कहना है कि शायद यह पिछले चरण जितना बड़ा नहीं होगा। खातों को दुरुस्त करने और नियामकीय पूंजी सीमा को बरकरार रखने के लिए वित्त वर्ष 2018 से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में करीब 2.66 लाख करोड़ रुपये की पूंजी डाली जा चुकी है। इस बार केनरा बैंक, पीएनबी और यूनियन बैंक में एस्सार स्टील के समाधान से करीब 8,857 करोड़ रुपये मिल रहे हैं। ऐसे में पुनर्पूंजीकरण की राशि 50,000 करोड़ रुपये या इससे कम हो सकती है। 

एक बैंकर ने कहा, 'बैंकों के विलय पर काम करने में हमारे लिए कठिनाई अतिरिक्त प्रावधान का आकलन करने में हो रही है क्योंकि ऋण खाते पर अंतर-ऋणदाता समझौता पर हस्ताक्षर किए गए हैं। हमें उम्मीद है कि इनमें से 50 मामलों का समाधान  हो सकता है लेकिन इस बारे में निश्चित तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता।'

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