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राजमार्ग क्षेत्र में बढ़ रही कर्ज की मांग

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली December 16, 2019

राजमार्ग क्षेत्र की सुरंग के आखिर में कुछ रोशनी नजर आने लगी है। देश के प्रमुख बैंकरों का कहना है कि हाल के दिनों में इस क्षेत्र में कर्ज की मांग बढ़ी है और सड़क क्षेत्र में स्थिति में सुधार की राह अब बहुत कठिन नहीं नजर आ रही है।  भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, 'कोई भी कर्ज लेना नहीं चाहता था। अब वे (बुनियादी ढांचा कंपनियां) कर्ज के लिए आवेदन कर रही हैं। उनकी ओर से संकेत मिल रहा है कि उन्हें इस या उस परियोजना के लिए धन की जरूरत है।' 
 
उन्होंने कहा कि सड़क क्षेत्र में कर्ज की मांग बढ़ रही है। स्टेट बैंक से सौर बिजली परियोजनाओं और तेल व गैस क्षेत्र खासकर सिटी गैस परियोजनाओं में भी कर्ज की मांग बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि वित्त वर्ष 2019-20 के पहले 4 या 5 महीनों के दौरान कुल मिलाकर मंदी थी, लेकिन अब स्थिति थोड़ी बेहतर नजर आ रही है।  डेलॉयट इंडिया में पार्टनर कुशल कुमार सिंह ने कहा, 'मार्च और अप्रैल में आवंटित परियोजाएं अब फाइनैंशियल क्लोजर की ओर बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में कर्ज की मांग बढऩे में इसकी भी भूमिका हो सकती है।' इसकी अन्य वजह आरओडब्ल्यू (राइट आफ वे) भूमि का कड़ाई से अनुपालन भी हो सकता है। 
 
सिंह ने कहा, 'अब तब तक परियोजनाएं आवंटित नहीं हो सकती हैं, जब तक कि आरओडब्ल्यू के लिए भूमि का अधिग्रहण नहीं हो जाता है।'  इसके पहले प्रमुख एक्सप्रेसवे डेवलपरों व कॉन्ट्रैक्टरों ने शिकायत की थी कि बुनियादी ढांचे की राह में सबसे बड़ी बाधा आरओडब्ल्यू अधिग्रहण थी।  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा, 'हम अपने कार्यक्रम के मुताबिक काम कर रहे हैं। हम अपनी परियोजनाओं का मूल्यांकन और आवंटन समयबद्ध तरीके से कर रहे हैं।' 
बहरहाल हर कोई कर्ज की मांग में तेजी को लेकर आश्वस्त नहीं है कि परियोजनाओं में तेजी आ रही है। कुछ का मानना है कि सड़क निर्माण कंपनियों द्वारा अपने कर्ज के पुनर्वित्तपोषण की वजह से ऐसा हो सकता है। उम्मीद की जा रही है कि एनएचएआई अपना ध्यान परियोजनाएं आवंटित करने से आवंटित परियोजनाओं को लागू कराने पर केंद्रित कर सकता है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की हाल की रिपोर्ट के मुताबिक इसकी एक वजह भूमि अधिग्रहण की बढ़ी लागत और उस पर बढ़ता कर्ज है।  
 
रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 20 से वित्त वर्ष 22 के दौरान सड़क परियोजनाओं का आवंटन (हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम), बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल और इंजीनियरिंग खरीद निर्माण (ईपीसी) मॉडल पर) घटकर 12,000 से 13,000 किलोमीटर हो सकता है, जो वित्त वर्ष 17 से वित्त वर्ष 19 के बीच औसतन 14,000 किलोमीटर था।  इस साल सितंबर में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने एनएचएआई को पत्र लिखा था, जिसमें सुझाव दिया गया था कि वह अपने पोर्टफोलियो का पुनर्गठन करे और परियोजनाओं की वाणिज्यिक व्यवहार्यता व संपत्तियो के मुद्रीकरण पर ध्यान केंद्रित करे। संसद में लिखित जवाब में 28 नवंबर को सड़क मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था, 'अगले तीन महीने में  करीब 50,000 करोड़ रुपये की 4,471 किलोमीटर सड़क परियोजनाएं आवंटित करने का लक्ष्य रखा गया है।'  इस साल अप्रैल तक 3,215 किलोमीटर लंबी 168 सड़क परियोजनाओं का आवंटन किया गया है। 
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