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वित्त क्षेत्र के प्रमुखों से मिलीं वित्तमंत्री

निधि राय / मुंबई December 16, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पूर्व विभिन्न साझेदारों के साथ होने वाली रस्मी सलाह प्रक्रिया शुरू कर दी है और इस कड़ी में उन्होंने पहली मुलाकात बैंक अधिकारियों और म्युचुअल फंड, बीमा और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के प्रमुखों से की है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न साझेदारों के सुझावों को सुनना है। बैठक के बाद भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, 'समूह ने कराधान, सत्यापन, कर्ज वृद्घि में सुधार करने, वित्त बाजार की पर्याप्तता में इजाफा करने संबंधी सुझाव दिए हैं।'
 
बैठक में शामिल रहे सूत्रों के मुताबिक कुछ बैंक अधिकारियों ने सरकार को यह भी सुझाव दिया कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के विलय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार को सार्वजनिक क्षेत्र के शीर्ष छह बैंकों को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें बचे हुए छह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर ध्यान देना चाहिए। एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी ने कहा, 'कुछ बैंक अधिकारियों की राय है कि सरकार को क्रम से सातवें, आठवें और नवें बैंक में अपनी हिस्सेदारी को घटाकर 50 फीसदी ने नीचे लाना चाहिए। सरकार को अपनी हिस्सेदारी बाजार दर के हिसाब से कम करनी चाहिए और अंतिम के तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर चलाए।'
 
एनबीएफसी की प्रतिनिधि संस्था फाइनैंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल (एफआईडीसी) ने भी सरकार को अपने सुझाव दिए हैं। संस्था ने सरकार को पहला सुझाव यह दिया है कि वह सबसे पहले दीर्घ अवधि और लघु अवधि की वित्त मुहैया कराने वाली एनबीएफसी में उचित अंतर करे। वित्त मंत्री को लिखे अपने पत्र में एफआईडीसी ने कहा, 'पिछले एक वर्ष में एनबीएफसी की ओर से चूक के दो बड़े उदाहरण बुनियादी ढांचे को वित्त देने वाली एनबीएफसी और वित्त आवास कंपनी हैं। ये दोनों ही दीर्घ अवधि के लिए ऋण देती हैं और इसलिए शायद उन्हें संपत्ति और देयता के बीच असंतुलन का सामना करना पड़ता है। हालांकि, पूरे एनबीएफसी क्षेत्र को ही संपत्ति देयता असंतुलन के तौर देखा और प्रचारित किया जाता है जिसके कारण बैंक और म्युचुअल फंड अचानक जोखिम से घिर जाते हैं।' एफआईडीसी ने इस बात पर जोर दिया है कि एनबीएफसी क्षेत्र के पास नियमित तौर पर वित्त मंत्रालय के साथ संपर्क करने के लिए कोई मंच नहीं है। पत्र में कहा गया है, 'वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं के विभाग को नियमित बैठकें बुलानी चाहिए।' 
Keyword: nirmala sitaraman, economy, GDP, bank, NBFC,,
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