बिजनेस स्टैंडर्ड - प्याज के भाव 13 फीसदी बढ़े
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प्याज के भाव 13 फीसदी बढ़े

दिलीप कुमार झा / मुंबई December 16, 2019

किसानों की सीमित आपूर्ति के कारण अपरिपक्व प्याज की आवक की रफ्तार में कमी आने के बाद प्याज के दाम एक बार फिर उछलकर इस सत्र के शीर्ष स्तर तक पहुंच गए हैं। बेंचमार्क लासलगांव की कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) में 3 दिसंबर को प्याज के दाम प्रति किलोग्राम 75 रुपये (आदर्श मूल्य) के स्तर तक पहुंचने के बाद 9 दिसंबर को गिरकर प्रति किलोग्राम 47 रुपये हो गए थे। चालू सत्र की अधपकी फसल आपूर्ति बढऩे के कारण ऐसा हुआ था। हालांकि फिर से लगातार बढ़ते हुए प्याज के दाम शुक्रवार को 73 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए और सोमवार को दाम 13 प्रतिशत बढ़कर 86 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए। शनिवार और रविवार को मंडी अधिकारिक रूप से बंद रही। देश भर में खुदरा में प्याज 120 से 140 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर बिक रहा है।
 
रणनीति में बदलाव करते हुए किसानों ने लाल प्याज की कटाई धीमी कर दी है ताकि लंबे समय तक ज्यादा दाम प्राप्त किए जा सकें। चूंकि सरकार ने स्टॉकिस्टों और खुदरा विके्रताओं के लिए स्टॉक सीमा लागू की हुई है, इसलिए किसानों ने फसल कटाई का सत्र लंबा खींचने के लिए आपूर्ति कम कर दी है। तब तक खरीफ सत्र के आखिर वाली आवक बाजार में आनी शुरू हो जाएगी। लासलगांव एपीएमसी के सचिव नरेंद्र वाधवाने ने कहा कि लासलगांव मंडी में प्याज की आवक में तीव्र गिरावट आई है। दूसरी तरफ देश भर से मांग का दबाव बना है जिसने प्याज के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचाने में मदद की है। प्याज के दाम निकट भविष्य में कम होनेे के आसार हैं, लेकिन फिर भी कम से कम खरीफ सत्र के अंत वाली फसल आनी शुरू होने तक दाम कुछ और समय तक तेज रहेंगे। 
 
सोमवार को लासलगांव मंडी में प्याज की कुल आवक केवल 450 टन दर्ज की गई, जबकि शुक्रवार को आवक 1,215 टन थी। लासलगांव एपीएमसी में 3 दिसंबर को प्याज आवक 460 टन दर्ज की गई थी। निफाड (लासलगांव) के आशीष दाभले ने कहा कि किसानों को यह बात पता है कि देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में करीब 30 प्रतिशत फसल को नुकसान पहुंचा है। इस वजह से उन्होंने लाल प्याज की कटाई धीमी कर दी है। चूंकि अधिक नमी की वजह से काटा गया यह प्याज दो दिन में ही खराब हो जाता है, इसलिए इसे कुछेक दिन के बाद स्टोर करके नहीं रखा जा सकता है। अगर किसान इसकी तेजी से कटाई करेंगे तो इसके दामों में गिरावट आने लगेगी। सरकार द्वारा स्टॉक सीमा लागू किए जाने से किसानों और स्टॉकिस्टों पर अपनी उपज जल्दी बेचने का दबाव बना है। इस कारण किसानों ने आपूर्ति सीमित करने के लिए अपनी फसल कटाई कम कर दी है। सरकार ने इस साल नवंबर में थोक और खुदरा विक्रेताओं के लिए स्टॉक सीमा क्रमश: 50 टन और 10 टन कर दी थी जिसे बाद में घटाकर 25 और पांच टन कर दिया गया। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने 10 दिसंबर को खुदरा विक्रेताओं के लिए स्टॉक सीमा और कम करके इसे केवल दो टन कर दिया था।
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