बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएमआर संग टाटा-जीआईसी सौदे का विरोध
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जीएमआर संग टाटा-जीआईसी सौदे का विरोध

अरिंदम मजूमदार / नई दिल्ली 12 16, 2019

विमानन

बिजनेस स्टैंडर्ड जीएमआर संग टाटा-जीआईसी सौदे का विरोधतीन प्रमुख विमानन कंपनियों ने टाटा समूह और सिंगापुर के सॉवरिन फंड जीआईसी के कंसोर्टियम द्वारा जीएमआर एयरपोर्ट्स में 8,000 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश का विरोध किया है। हालांकि जीएमआर समूह ने विमानन कंपनियों के तर्क को खारिज किया है।

घरेलू बाजार में 80 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी रखने वाली इंडिगो, स्पाइसजेट और गोएयर ने कहा कि टाटा संस और जीआईसी का सिंगापुर एयरलाइंस में हिस्सेदारी है, जिससे वे जीएमआर समूह के स्वामित्व वाले दिल्ली हवाईअड्डे के निर्णर्यों को सिंगापुर एयरलाइंस समूह की विमानन कंपनियों के पक्ष में प्रभावित कर सकते हैं। इससे विस्तारा को हवाईअड्डे पर प्रमुख स्लॉट हासिल करने में मदद मिल सकती है। विस्तारा में टाटा संस की 51 फीसदी और सिंगापुर एयरलाइंस की 49 फीसदी हिस्सेदारी है।

विमानन कंपनियों के संगठन फेडरेशन ऑफ एयरलाइंस ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है, 'दिल्ली भारत का सबसे बड़ा हवाईअड्डा है, जिसमें टाटा-जीआईसी का प्रस्तावित स्वामित्व हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि इससे समानता का अधिकार प्रभावित होगा।'

जीएमआर समूह के प्रवक्ता ने विमानन कंपनियों के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि भारत में स्लॉट आवंटन के दिशानिर्देश किसी भी तरह की प्रतिस्पर्द्धा को बिगाड़ने से रोकने के लिए पर्याप्त हैं। टाटा और जीआईसी निष्क्रिय वित्तीय निवेशक होंगे और हवाई अड्डों के दैनिक प्रबंधन से खुद को अलग रखेंगे।

भारतीय प्रतिस्पद्र्घा आयोग ने प्रस्तावित सौदे को मंजूरी देते समय इसी तरह की आशंका जाहिर की थी लेकिन टाटा द्वारा प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं किए जाने का भरोसा दिए जाने के बाद सौदे को हरी झंडी दी गई। भारतीय हवाईअड्डों पर स्लॉटों का आवंटन हवाई अड्डा परिचालकों के स्लॉट समन्वय समिति द्वारा विश्व-स्तरीय स्लॉट दिशानिर्देश के मुताबिक किया जाता है। इस दिशानिर्देश को इंटरनैशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन द्वारा तैयार किया गया है। इन नियमों के अनुसार विमानन कंपनी पिछले सीजन में मिले स्लॉट को अपने पास तब तक बनाए रह सकती है जब तक कि वह तय समय में 80 फीसदी तक उस स्लॉट का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही 50 फीसदी स्लॉट को 'उपयोग करें या छोड़ें' नीति के तहत खाली कराया जाता है और उसे नई विमानन कंपनियों तथा बाकी पुराने विमानन कंपनियों को दिया जाता है।

सीसीआई ने अपने आदेश में उल्लेख किया है, 'आयोग ने पाया था कि टाटा संस और जीएमआर समूह के बीच इस तरह के रिश्तों से हितों का टकराव हो सकता है। लेकिन प्रस्तावित सौदे में संशोधन करने के बाद प्रतिस्पर्द्धा पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।' टाटा समूह के हलफनामे को बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी देखा है, जिसमें समूह ने कहा है कि वह प्रबंधकीय पद पर किसी व्यक्ति को नियुक्त नहीं करेगा और जीएमआर समूह के हवाईअड्डों के प्रबंधन में उसकी भागीदारी नहीं होगी।

टाटा समूह ने 1 अक्टूबर को लिखा, 'जीएमआर और टाटा समूह ने भरोसा दिया है कि स्लॉट आवंटन से संबंधित वाणिज्यिक संवेदनशील जानकारी का खुलासा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हमारे नामितों के समक्ष नहीं किया जाएगा।' भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के अधिकारियों ने कहा कि उसने एसबीआई कैप्स से इस बारे में अध्ययन करने को कहा है कि क्या प्रस्तावित निवेश से एकसामन अवसर में किसी तरह की अड़चन आएगी। एएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'एसबीआई कैप्स इसके प्रभाव का अध्ययन करेगी और उस पर अपने सुझाव देगी। उसके आधार पर ही हम निर्णय करेंगे।'

विमानन कंपनियों के विरोध से रकम जुटाने का प्रयास कर रही जीएमआर इन्फ्रा के लिए नई अड़चन खड़ी हो सकती है। निवेश प्र्रस्ताव की घोषणा अप्रैल में की गई लेकिन सॉलिसिटर जनरल द्वारा आपत्ति उठाए जाने के बाद प्रस्ताव को नए सिरे से तैयार किया गया। सॉलिसिटर जनरल ने इस पर आपत्ति जताई थी कि जीएमआर एयरपोर्ट्स में टाटा समूह की 20 फीसदी हिस्सेदारी होने से दिल्ली हवाई अड्डे में उनकी हिस्सेदारी 12.8 फीसदी हो जाएगी, जो उस प्रावधान का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि किसी भी विमानन कंपनी के पास दिल्ली इंटरनैशनल एयरपोर्ट (डायल) में 10 फीसदी से अधिक की हिस्सेदारी नहीं हो सकती। 

कंसोर्टियम के ढांचे में बदलाव के बाद जीएमआर एयरपोर्ट्स में टाटा की हिस्सेदारी 20 फीसदी से घटाकर 14.7 फीसदी करने और जीआईसी की हिस्सेदारी 19.8 फीसदी से घटाकर 14.8 फीसदी करने का प्रस्ताव किया गया। इससे दिल्ली हवाईअड्डे में टाटा की प्रभावी हिस्सेदारी 10 फीसदी के करीब होगी।हालांकि एफआईए का तर्क है कि जीआईसी और टेमासेक सिंगापुर सरकार के स्वामित्व वाली इकाई है और टेमासेक की सिंगापुर एयरलाइंस में 56 फीसदी हिस्सेदारी है। इसलिए जीआईसी को विमानन कंपनी के हिस्सेदारी के रूप में गिना जाना चाहिए क्योंकि वह सिंगापुर एयरलाइंस समूह के हितों की रक्षा का करने का प्रयास कर सकती है।

एफआईए ने कहा, 'निवेश चाहे जीआईसी या टेमासके या सिंगापुर एयरलाइंस, सिल्क एयर, स्कॉट या विस्तारा के जरिये की जाए, सभी सिंगापुर सरकार से संबंधित इकाई है। ऐसे में जीआईसी को भी अधिसूचित विमानन कंपनी के मालिक के तौर पर देखना चाहिए और डायल में उसकी हिस्सेदारी 10 फीसदी तक सीमित होनी चाहिए।'

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