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लंबे निवेश के लिए उम्दा है भारत बॉन्ड ईटीएफ

संजय कुमार सिंह /  December 15, 2019

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत का पहला कॉरपोरेट बॉन्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) लाने की मंजूरी दे दी  है। इसे भारत बॉन्ड ईटीएफ का नाम दिया गया है और इसमें सरकार के समर्थन वाली कंपनियों द्वारा जारी किए गए एएए रेटिंग वाले पेपर ही शामिल होंगे। इस ईटीएफ की पहली खेप का प्रबंधन एडलवाइस असेट मैनेजमेंट के जिम्मे दिया गया है। 

इस बॉन्ड ईटीएफ का न्यूनतम आकार 7,000 करोड़ रुपये होगा और इसे बढ़ाकर 15,000 करोड़ रुपये तक करने की मंजूरी दी गई है। इसके तहत दो ईटीएफ पेश किए गए हैं। पहले ईटीएफ में तीन वर्ष की परिपवक्ता अवधि वाले बॉन्ड में निवेश किया जाएगा और दूसरे ईटीएफ में निवेश योग्य बॉन्ड की परिपक्वता अवधि 10 वर्ष होगी। फंड-ऑफ-फंड का विकल्प भी रखा जाएगा। भारत बॉन्ड के तहत आने वाले ईटीएफ ओपन एंडेड नहीं होंगे बल्कि इनमें लक्षित परिपक्वता वाला ढांचा होगा। तीन वर्ष अवधि वाला ईटीएफ अप्रैल, 2023 में परिपक्व होगा और 10 वर्ष की अवधि वाला ईटीएफ अप्रैल, 2030 में पूरा होगा। ये ईटीएफ वास्तव में वृद्घि वाली योजनाएं होंगी यानी इनमें किसी तरह का ब्याज नहीं दिया जाएगा।


पैसिव और सस्ते ईटीएफ
भारत में इक्विटी फंड के मामले में सक्रिय यानी ऐक्टिव और निष्क्रिय यानी पैसिव फंड प्रबंधन की तुलना खूब की जाती है और इन पर जमकर बहस भी हो चुकी है। लेकिन पैसिव फंडों के बारे में बहुत कुछ नहीं कहा गया है। एडलवाइस असेट मैनेजमेंट की मुख्य कार्य अधिकारी राधिका गुप्ता कहती हैं, 'जब डेट फंड की बात आती है तो पैसिव यानी निष्क्रिय फंड प्रबंधन ही बेहतर होता है क्योंकि इस तरह के फंड अल्फा जेनरेटिंग संपत्तियों की श्रेणी में नहीं रखे जाते।' इसलिए निवेशक किसी ऐसी पैसिव योजना को भी चुन सकता है, जिसमें उसे कम खर्च का फायदा मिल सके। ऐसे फंड या योजनाओं का खर्च अनुपात बेहद कम (केवल 0.0005 फीसदी) होता है। राधिका बताती हैं, 'डेट फंड में प्रतिफल इक्विटी फंड की तुलना में कम होते हैं, इसलिए खर्च में जो भी बचत हो सकती है, वह एक तरह से निवेशक के लिए प्रतिफल ही होती है।'

पारदर्शी योजना
इसमें निवेशकों को निवेश करने से पहले ही सूचकांक के घटकों के बारे में पता चल जाएगा। चूंकि 2018 की दूसरी तिमाही से कई कंपनियां भुगतान में चूक कर चुकी हैं और कई सक्रिय डेट फंड प्रबंधकों के पास ऐसे बॉन्ड पत्र मिले हैं, जिनके भुगतान में या तो चूक हो चुकी है या जिनकी रेटिंग कम कर दी गई है। इसी वजह से आज निवेशक रकम लगाने से पहले ही यह जान लेना चाहता है कि उसका धन कहां लगाया जाएगा। सूचकांक पर बॉन्ड की प्राप्ति की जानकारी हर रात (भारतबॉन्ड डॉट इन) पर प्रकाशित की जाएगी।

चूंकि सूचकांक में एएए रेटिंग वाले केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के बॉन्ड ही होंगे, इसलिए इन ईटीएफ में क्रेडिट का जोखिम बहुत कम होगा। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार पसर्नलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, 'इनमें न के बराबर जोखिम होता है।' इन ईटीएफ के जरिये निवेशकों को पुनर्निवेश के जोखिम दूर करने का मौका भी मिलेगा। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन का कहना है, 'जब भी किसी निवेशक को प्राप्ति आकर्षक लगे, वह 10 वर्ष के लिए अपनी रकम इस ईटीएफ में लगा सकता है। इस तरह उसके पोर्टफोलियो में पुनर्निवेश का जोखिम कम हो जाता है।' 

इन ईटीएफ का काराधान भी बॉन्ड तथा सावधि जमा (एफडी) के मुकाबले अधिक अनुकूल होगा। एफडी में जो भी ब्याज मिलता है, उसे निवेशक की आय में जोड़ दिया जाता है और उसके बाद लागू आयकर दर के मुताबिक उस पर कर वसूला जाता है। इससे उन निवेशकों को ज्यादा घाटा हो जाता है, जो ऊंची आयकर दर के दायरे में आते हैं। मगर इस ईटीएफ में निवेशक से डेट म्युचुअल फंड के समान कर वसूला जाता है यानी यदि ईटीएफ में तीन साल से अधिक निवेश रखा गया है तो इंडेक्सेशन के साथ कर की दर 20 फीसदी ही रहती है। 

तरलता के जोखिम का रखें ध्यान
राधिका का कहना है कि निर्गम बड़ा है, उसमें शामिल बॉन्ड तरलता पूर्ण हैं और बाजार में उसे संभालने वाले भी नियुक्त हो चुके हैं। नई खेप समय-समय पर आती रहेंगी। वह कहती हैं कि इन सब कारणों से एक्सचेंज पर अच्छी-खासी तरलता आ जाएगी। लेकिन बाजार के माहिर खिलाड़ी इस बात पर शुबहा खड़ा करते हैं। वैलिडस वेल्थ के मुख्य निवेश अधिकारी राजेश चेरुवु कहते हैं, 'हमें कुछ ठहरकर देखना होगा कि इस योजना के जरिये तरलता किस तरह आती है। इसमें बोलियों से जुड़े (बिड-आस्क) स्प्रेड पर भी नजर रखनी होगी।'

यदि तरलता कम रहती है तो खुदरा निवेशकों के लिए यही अच्छा होगा कि वे फंड-ऑफ-फंड के विकल्प को अपनाएं क्योंकि इसमें एएमसी के जरिये बॉन्ड भुनाने की सहूलियत उनके पास होगी। मगर यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि फंड-ऑफ-फंड का खर्च अनुपात अधिक होगा। इन ईटीएफ में ब्याज दर का जोखिम भी जुड़ा रहता है। 10 वर्ष के ईटीएफ में यह जोखिम ज्यादा होता है और तीन वर्ष के ईटीएफ में कम होता है। निवेशक परिपक्वता पूरी होने तक ईटीएफ में अपना निवेश बनाकर जोखिम कम कर सकते हैं। 

ईटीएफ में क्रेडिट का जोखिम कम जरूर हो सकता है, लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जोखिम बिल्कुल ही नहीं हो। धवन कहते हैं, 'सरकार संभवत: इन कंपनियों को चूक नहीं करने दे। लेकिन इन बॉन्ड के डाउनग्रेड होने यानी उनकी क्रेडिट रेटिंग कम होने का खटका हमेशा बना रहता है। ऐसा होता है तो पोर्टफोलियो पर मार्क-टु-मार्केट प्रभाव होगा।' ईटीएफ खरीदने पर ब्रोकरेज शुल्क भी देना पड़ता है। राघव की सलाह है, 'यदि ब्रोकरेज शुल्क 50 आधार अंक होता है तो डेट ईटीएफ के मामले में उस पर विचार किया जा सकता है।'

आप क्या करें?
ऐसी योजना उन निवेशकों के लिए बढिय़ा होती हैं, जो अपने डेट पोर्टफोलियो में कम क्रेडिट जोखिम वाले उत्पाद रखना चाहते हैं। राघव की सलाह है, 'जो निवेशक डेट फंड के साथ चलने वाले जोखिमों को नहीं समझते हैं, उन्हें सही श्रेणी का चयन करने और सही फंड प्रबंधक चुनने में दिक्कत हो सकती है। वे निवेशक और मध्यम से दीर्घ अवधि तक की योजनाओं में निवेश करने के इच्छुक निवेशक इन ईटीएफ में रकम लगा सकते हैं।' 

जाहिर है कि यह ईटीएफ उन निवेशकों के लिए नहीं है, जो चाहते हैं कि उनके पास नियमित रूप से नकदी आती रहे। जिन लोगों की मंशा ब्याज दर तथा तरलता से जुड़े जोखिम को दूर करने की है, उन्हें ईटीएफ खरीदने और लंबे समय तक अपने पास रखने की रणनीति अपनानी चाहिए। धवन भी इसी तरह का मशविरा देते हैं। उनका कहना है, 'जिन लोगों के पास डीमैट खाता नहीं है या जो तरलता से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या से दूर रहना चाहते हैं, उन्हें फंड-ऑफ-फंड का विकल्प चुनना चाहिए।'

यदि आप ईटीएफ का रास्ता चुनते हैं तो किसी ऐसे ब्रोकर का दामन थामिए, जिस पर आपको ज्यादा खर्च नहीं करना पड़े। वेबसाइट पर जाकर प्राप्तियों पर नजर डालिए। इसके बाद जोड़घटाव करते हुए समान परिपक्वता अवधि वाली दूसरी डेट योजनाओं के साथ इसकी तुलना करें। तुलना के बाद देखिए कि कर चुकाने के बाद इसमें अधिक प्रतिफल मिल रहा है या नहीं। यदि अधिक प्रतिफल मिल रहा है तो झट से इसमें निवेश कर डालिए।
Keyword: Bharti Aitel, Telecom Company, FDI, Debt, Investment, Government,
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