बिजनेस स्टैंडर्ड - भुगतान चूक से बचने के लिए एयर इंडिया ने मांगी सरकार से मदद
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, March 28, 2020 01:58 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

भुगतान चूक से बचने के लिए एयर इंडिया ने मांगी सरकार से मदद

अनीश फडणीस और अरिंदम मजूमदार / मुंबई/नई दिल्ली December 15, 2019

सरकार से नए सिरे से धन देने की अपील करते हुए एयर इंडिया के चेयरमैन अश्विनी लोहानी ने शनिवार को फेसबुक पर लिखा कि एयरलाइंस को बेचे जाने तक बचाए रखने की जरूरत है। लोहानी ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को एयरलाइंस की खराब वित्तीय स्थिति का उल्लेख करते हुए पत्र लिखा था, जिसके एक दिन बाद उनकी यह प्रतिक्रिया सार्वजनिक हुई। पिछले कुछ महीनों से एयर इंडिया 2,000 करोड़ रुपये कर्ज लेने के लिए सरकार से गारंटी की मांग कर रही है। अब तक सरकार ने इस अनुरोध पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। लोहानी ने पत्र में लिखा है कि अगर पूंजी नहीं जुटाई गई तो एयलाइंस अपने देनदारी में चूक करेगी। 

एयर इंडिया का सालाना राजस्व 10 प्रतिशत बढ़ रहा है, इसके बावजूद उसे हर महीने 150 से 200 करोड़ रुपये घाटा हो रहा है। नकदी की स्थिति बहुत खराब है और नवंबर का वेतन 11 दिसंबर को दिया गया है। नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में अपनी प्रतिक्रिया में कहा था कि अगर खरीदार नहीं मिलता है तो सरकार एयरलाइंस को बंद कर देगी। इसकी वजह से ट्रैवल एजेंट और वेंडर परेशान हैं। 

लोहानी ने एक पोस्ट में लिखा है, 'बिक्री के पहले तक एयर इंडिया को बचाए रखने की जरूरत है। मुझे आश्चर्य हो रहा है कि ऐसा करने में इतनी कठिनाई क्यों आ रही है। साथ ही इस समय विनिवेश का माहौल है, ऐसे में क्रांतिकारी सुधार की उम्मीद है। इनपुट के बगैर आउटपुट दिया जा सकता है, यह घोर अव्यावहारिक विचार है।'  लोहानी की इस प्रतिक्रिया को एयरलाइंस के अधिकारियों की ओर से हुई आलोचना की प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जा सकता है। सेवानिवृत्त अधिकारियों ने इस मसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लोहानी की अक्षमता की आलोचना की थी। 

लोहानी ने इसे लेकर आगे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने भी इस मसले पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रणनीतिक विनिवेश के नियमों के मुताबिक सरकार उन संगठनों में नकदी नहीं डालती, जिन्हें बिक्री के लिए चिह्नित कर लिया गया है। अधिकारी ने कहा, 'पुनरुद्धार योजना के हिस्से के रूप में हमें कई लक्ष्य हासिल करने हैं। एयर इंडिया बमुश्किल उन मानदंडों को पूरा करती है। कर्मचारियों व वेतन के पुनर्गठन का काम नहीं हुआ। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के दिशानिर्देशों के बावजूद भी रूट रेशनलाइजेशन का काम नहीं हुआ। सरकार के संसाधन सीमित हैं।' 

पिछले 9 साल से ज्यादा समय के दौरान सरकार ने 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा धन इक्विटी के रूप में एयरलाइंस में लगाया है। लेकिन नए सिरे से धन डालने की संभावना को खारिज कर दिया गया है क्योंकि सरकार अब एयरलाइंस में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना चाहती है। इस सिलसिले में रुचिपत्र अगले महीने जारी होने की संभावना है। पिछले महीने सितंबर में सरकार ने 3,975 करोड़ रुपये नकदी समर्थन और 7,600 करोड़ रुपये कर्ज गारंटी देने के वित्तीय पैकेज की घोषणा की थी, जिससे एयर इंडिया को मजबूत, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाया जा सके। एयर इंडिया ने पिछले साल सितंबर महीने में सरकार की ओर से की गई पुनरुद्धार योजना के तहत 2,000 करोड़ रुपये कर्ज की गारंटी दिए जाने की मांग की है। 

बहरहाल एयरलाइंस के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक रवि बोडाडे ने रविवार को कहा कि उन्होंने पिछले साल की तुलना में ज्यादातर मानकों पर बेहतर प्रदर्शन किया है। उन्होंंने कहा कि हमारे राजस्व, मुनाफे और यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद एयरलाइंस को नकदी का संकट बना हुआ है। एयर इंडिया की अग्रिम बुकिंग पर असर पड़ा है और वेंडर बकाये के भुगतान के लिए दबाव डाल रहे हैं क्योंकि वे एयरलाइंस के भविष्य की अनिश्चितता को देखते हुए चिंतित हैं। ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन आफ इंडिया की अध्यक्ष ज्योति मायल ने कहा, 'जेट एयरवेज के बंद होने से ट्रैवल एजेंट अपना हाथ जला चुके हैं। अब वे ज्यादा कड़ी नजर रख रहे हैं। एयरलाइंस के बंद होने की स्थिति में होने वाले कैंसिलेशन और रिफंड को लेकर चिंता बढ़ी है। बहरहाल हम उम्मीद करते हैं कि सरकार एयर इंडिया को विफल हो जाने के लिए नहीं छोड़ेगी।' 
Keyword: Air India, Airlines, Loss, ground handling, Government, Stock Option, Holding Company,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के बाद बैंक तेजी से घटाएंगे कर्ज की दर ?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.