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भारत में अलग-अलग राह पर एचयूएल, पीऐंडजी

विवेट सुजन पिंटो / मुंबई December 15, 2019

उपभोक्ता सामान बनाने वाली विश्व की दो अग्रणी कंपनियों यूनिलीवर और और प्रॉक्टर ऐंड गैंबल (पीऐंडजी) की रणनीति भारतीय बाजार के लिए अलग-अलग है। एक ओर जहां लंदन की यूनिलीवर इस देश में खुद के दम पर व विलय-अधिग्रहण के जरिए आक्रामक है, वहीं पीऐंडजी का तरीका राजस्व व मुनाफे के लिहाज से संतुलित बढ़त हासिल करने का है।

यह परिदृश्य में पीऐंडजी अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धी के मुकाबले भारत में चोटी इकाई बनी हुई है, जो अहम बाजार है। इस कंपनी की योजना मौजूदा श्रेणियों मसलन महिलाओं के लिए जरूरी सामान यानी फेमिनिन केयर, बेबी केयर, हेल्थकेयर और मेल ग्रूमिंग में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की है, जिसके बारे में कंपनी का कहना है कि भारत में इन चीजों का प्रसार काफी कम हुआ है।

पीऐंडजी व्हिस्पर के साथ फेमिनिन केयर में, पैम्पर्स के साथ बेबी केयर में, विक्स के साथ हेल्थकेयर में और जिलेट के साथ मेल ग्रूमिंग में अग्रणी है। साथ ही भारत में कंपनी की प्रतिस्पर्धा यूनिलीवर के साथ डिटर्जेंट (एरियल, टाइड), शैंपू (पैंटीन, हेड ऐंड शोल्डर) और ओरल केयर (ओरल बी) में है।

पिछले हफ्ते एडलवाइस की रिपोर्ट में दोनों फर्मों की रणनीति सामने रखी गई थी, जिसमें कहा गया था कि हिंदुस्तान यूनिलीवर वित्त वर्ष 2027 के आखिर तक मूल कंपनी की सबसे बड़ी सहायक बन सकती है और इस तरह से वह अमेरिकी इकाई से आगे निकल जाएगी, जो अभी सबसे बड़ी वैश्विक सहायक है और राजस्व में करीब 16 फीसदी का योगदान करती है।

वैल्यू के लिहाज से भारत यूनिलीवर का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है और मूल कंपनी के 4 लाख करोड़ रुपये के कारोबार में करीब 10 फीसदी का योगदान करता है। एचयूएल के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक संजीव मेहता ने कहा है, वॉल्यूम के लिहाज से भारत पहले ही यूनिलीवर के लिए सबसे बड़ा बाजार है और देश का 98 फीसदी परिवार कंपनी का एक या एक से ज्यादा ब्रांड इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा, देश में कंपनी की फैक्टरियों में 48 अरब इकाइयां बनती है और डव व लाइफबॉय बनाने वाली कंपनी डिजिटल कार्यक्रम सामने रखकर भविष्य के लिए तैयार हो रही है।

पीऐंडजी इंडिया के दायरे में दो सूचीबद्ध इकाई व एक सूचीबद्ध कंपनी है और वह मूल कंपनी के राजस्व 5 लाख करोड़ रुपये में करीब 2.2 फीसदी का योगदान करती है। पीऐंडजी का सबसे बड़ा बाजार उत्तर अमेरिका (अमेरिका, कनाडा और प्यूरिटो रिको)  है और यह राजस्व में 45 फीसदी का योगदान करता है। यह जानकारी कंपनी के सालाना रिपोर्ट से मिली। उसका दूसरा सबसे बड़ा बाजार यूरोप है, जो कुल कारोबार में 23 फीसदी का योगदान करता है। चीन का बाजार पीऐंडजी के कारोबार में 9 फीसदी का योगदान करता है।

पीऐंडजी के एक प्रवक्ता ने कहा, भारत में कंपनी ने रणनीतिक विकल्प चुना है, श्रेष्ठता, उत्पादकता और संगठन की मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा, हम सबसे अच्छे उत्पादों, पैकेजिंग, ब्रांड, खुदरा क्षेत्र में क्रियान्वयन आदि पर हस्तक्षेप कर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हम लाभ में सुधार के लिए उत्पादकता बढ़ा रहे हैं और संतुलित बढ़त हासिल कर रहे हैं।

पीऐंडजी का संयुक्त राजस्व सालाना आधार पर 16 फीसदी बढ़कर वित्त वर्ष 2019 में 11,000 करोड़ रुपये रहा। उïधर, एचयूएल का राजस्व वित्त वर्ष 2019 में सालाना आधार पर करीब 9 फीसदी बढ़कर 38,224 करोड़ रुपये पर पहुंच गया जबकि मुनाफा 15.25 फीसदी बढ़कर 6,036 करोड़ रुपये रहा। 

30 जून 2019 को समाप्त वर्ष में जिलेट का लाभ सालाना आधार पर 10.4 फीसदी बढ़कर करीब 253 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। दूसरी ओर व्हिस्पर और विक्स की निर्माता पीऐंडजी हाइजिन ऐंड हेल्थकेयर ने इस अवधि में लाभ में 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और यह 419 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। जिलेट व पीऐंडजी हाइजिन ऐंड हेल्थकेयर जुलाई-जून के वित्त वर्ष का अनुपालन करती है, वहीं पीऐंडजी होम प्रॉडक्ट्स अप्रैल-मार्च का लेखा वर्ष मानती है। एचयूएल का लेखा वर्ष अप्रैल-मार्च होता है। 

ब्रोकरेज फर्म क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों अर्णव मित्रा व गरिमा भारती ने कहा कि भारत में पीऐंडजी की प्रतिस्पर्धी धार बढ़ रही है क्योंकि वह लाभ में बढ़त पर ध्यान केंद्रित कर रही है। 
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