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एयरटेल डीटीएच के डिश टीवी संग विलय के मायने

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली December 13, 2019

डिश टीवी के साथ भारती एयरटेल के डायरेक्ट टु होम (डीटीएच) कारोबार के विलय की घोषणा जल्द होने वाली है। इससे इस दूरसंचार कंपनी को होम ब्रॉडबैंड एवं मनोरंजन क्षेत्र में अपनी प्रमुख प्रतिस्पर्धी रिलायंस जियो को टक्कर देने के लिए एक दमदार प्लेटफॉर्म हासिल होगा। दोनों कंपनियों के बीच यदि विलय होता है तो एकीकृत कंपनी के पास 6.89 करोड़ डीटीएच ग्राहकों में करीब 54 फीसदी हिस्सेदारी होगी। ऐसे में वह इस क्षेत्र की सबसे बड़ी कंपनी टाटा स्काई को काफी पीछे छोड़ देगी। टाटा स्काई की बाजार हिस्सेदारी 32 फीसदी है।
 
यह पहल ऐसे समय में की गई है जब जियो केबल क्षेत्र में अपनी स्थिति सुदृढ़ कर रही है। हैथवे और डेन नेटवक्र्स के अधिग्रहण के बाद जियो की पहुंच 20 करोड़ टीवी घरों में से करीब 2.3 करोड़ घरों तक हो जाएगी जो करीब 12 फीसदी है। भारती की नजर भी उसी बाजार तक पहुंच बनाने पर है। केबल कंपनियों के करीब 20 लाख ग्राहक ब्रॉडबैंड को अपना रहे हैं और ऐसे में जियो को केबल नेटवर्क को फाइबर से बदलने और उन ग्राहकों को फाइबर टु द होम (एफटीटीएच) सेवाओं की पेशकश करने में एक अवसर दिख रहा है। एफटीटीएच सेवाओं में हाईस्पीड इंटरनेट, ओटीटी (ओवर द टॉप) सेवा के साथ-साथ टीवी भी शामिल हैं। जियो खुद अपने बल पर ओटीटी और ब्रॉडबैंड के साथ एफटीटीएच सेवाएं शुरू कर रही है। उसकी नजर पहले चरण में 2 करोड़ घरों तक पहुंच बनाने पर है।
 
हालांकि एयरटेल की रणनीति अलग है। जियो (उसके पास कोई डीटीएच कंपनी नहीं है) के विपरीत एयरटेल डीटीएच पर बड़ा दांव लगा रही है। इसके लिए उसने दोहरी रणनीति बनाई है और सावधानीपूर्वक अपनी एफटीटीएच पेशकश में भी विस्तार कर रही है। डिश टीवी के साथ विलय होने पर एयरटेल की पहुंच काफी नए घरों तक सुनिश्चित होगी। विश्लेषकों का कहना है कि डिजिटल केबल की पहुंच अभी भी करीब 40 फीसदी भारतीय टीवी परिवारों तक है। जबकि डीटीएच की पहुंच तेजी से बढ़ रही है और उसकी बाजार हिस्सेदारी करीब 34 फीसदी (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के शुल्क संबंधी आदेश के बाद कुछ ग्राहक घटे हैं) है।
 
निश्चित तौर पर एयरटेल का मानना है कि उसकी स्थिति बेहतर है। एयरटेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घरों तक पहुंच बनाने के लिए डीटीएच सबसे सस्ता और प्रभावी तरीका है। जबकि फाइबर के मामले में अंतिम उपभोक्ता के लिए लागत और समय दोनों ही अधिक हैं। साथ ही यह पूरे देश में पहुंच सकती है जबकि केबल और फाइबर के मामले में ऐसा नहीं है। खासकर डिश टीवी की यह एक बड़ी ताकत है। एयरटेल का मानना है कि दो अलग तरह के बाजार हैं जिन्हें भिन्न समाधान की जरूरत है। डीटीएच उनके ग्राहकों के लिए उपयुक्त है जो 200 से 300 रुपये प्रति महीने से अधिक खर्च नहीं करना चाहते हैं। जबकि फाइबर टु होम उन ग्राहकों के लिए अधिक उपयुक्त है जो 700 रुपये प्रति महीने से अधिक खर्च कर ओटीटी, हाई स्पीड ब्रॉडबैंड आदि के जरिये मनोरंजन हासिल करना चाहते हैं। लेकिन इसका बाजार ऊपरी तबके का है।
 
अनुमानों के अनुसार, एफटीटीएच बाजार का आकार करीब 3 करोड़ परिवारों का है जिनकी वार्षिक आय करीब 10 लाख रुपये है। विश्लेषकों का कहना है कि इस आय वर्ग के लोग एफटीटीएच को वहन कर सकते हैं। यदि ग्रामीण क्षेत्रों को दूर कर दिया जाए तो इस बाजार का आकार महज करीब 2 करोड़ ग्राहकों का होगा। इससे साफ पता चलता है कि जियो ने एफटीटीएच के लिए शुरुआती लक्ष्य छोटा क्यों रखा है। भारती पिछले कई वर्षों से फिक्स्ड ब्रॉडबैंड की पेशकश कर रही है लेकिन उसकी पहुंच महज 23.6 लाख घरों तक ही हो पाई है। जबकि अगले तीन साल में वह 50 लाख नए घरों तक पहुंच बनाने की तैयारी कर रही है।
 
भारती एयरटेल उन ग्राहकों को अपनी तमाम सेवाओं की पेशकश एक साथ करने में भी संभावनाएं देख रही है जो भुगतान करना चाहते हैं। इसलिए उसने तीन एकीकृत सेवाओं के लिए योजना बना रही है जिसमें डीटीएच, ब्रॉडबैंड, ओटीटी और मोबाइल कनेक्शन एक ही पैकेज और एक ही बिल के तहत दिए जाएंगे। इसके अलावा कंपनी एक एकीकृत बॉक्स लाने के लिए भी काम कर रही है जिसके जरिये इन सभी सेवाओं की एक साथ पेशकश उपलब्ध होगी।
Keyword: airtel, DTH, dish tv,,
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