बिजनेस स्टैंडर्ड - अब अर्थव्यवस्था दुरुस्त करने पर मोदी सरकार का ध्यान
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अब अर्थव्यवस्था दुरुस्त करने पर मोदी सरकार का ध्यान

अरूप रायचौधरी और संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली December 13, 2019

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होने और नागरिकता संशोधन विधेयक संसद में पारित कराने के बाद सरकार अब सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था की तरफ ध्यान केंद्रित कर रही है। इस सिलसिले में आने वाले दिनों में कई बैठकें होने वाली हैं। 19 दिसंबर को नीति आयोग सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक करेगा। इसी तरह, 20 दिसंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारणम बजट पूर्व चर्चाओं के लिए विशेषज्ञों से मुलाकात करेंगी। 21 दिसंबर को प्रधानमंत्री विभिन्न विभागों एव सलाहकारों के साथ स्थिति का जायजा लेंगे। बिजनेस स्टैंडर्ड को शीर्ष सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन बैठकों में चर्चा के बाद निकले उपाय वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में जगह पा सकते हैं। पिछले बजट में पेश कई प्रस्ताव वापस लिए जाने के बाद इस बार प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री का जोर ऐसी किसी पुनरावृत्ति से बचने पर होगा। 
 
सूत्रों ने कहा कि इन निर्धारित बैठकों के अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) मौजूदा विभिन्न योजनाओं, उनके प्रदर्शन और इन्हें और बेहतर बनाने के उपायों पर शीर्ष सचिवों और अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। सूत्रों ने कहा कि कुछ बैठकों में सब्सिडी तर्कसंगत बनाने, आयुष्मान भारत का डिजिटल प्रसार बढ़ाने, स्वच्छ भारत अभियान को अधिक प्रभावी बनाने और दूसरी कई मौजूदा सरकारी कार्यक्रमों पर चर्चा की जाएगी। इनमें कई प्रस्तुतियां अक्टूबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखी जानी थीं, लेकिन प्रधानमंत्री के पूर्व निर्धारित कार्यक्रमों के कारण इन्हें तब टाल दिया गया था। अधिकारियों ने कहा कि प्रस्तुतियों के आलवा पीएमओ ने बजट पर विभिन्न मंत्रालयायें और सचिवों से उनके सुझाव भी मांगे हैं। 
 
बजट से पहले इनके साथ विभिन्न खंडों को लेकर बैठकें आयोजित होंगी। जैसा कि पहले खबरें आई थीं, 2019-20 के बजट के कुछ प्रस्ताव वापस लिए जाने के बाद सरकार में राजनीतिक नेतृत्व ने 2020-21 के लिए बजट निर्माण प्रक्रिया का नियंत्रण मोटे तौर पर अपने हाथों में ले लिया है। आगामी बजट में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरमार में उच्च स्तर पर इस दिशा में पहल हुई है। वित्तीय प्रणाली में अधिक नकदी सुनिश्चित करने और निजी क्षेत्र को अधिक मजबूत बनाने के लिए आगामी बजट में दीर्घ अवधि का पूंजी लाभ समाप्त किया जा सकता है और लाभांश वितरण कर का बोझ कंपनियों के बजाय शेयरधारकों पर डाला जा सकता है। इसके साथ ही बजट में वेतनभोगी वर्ग को आयकर से थोड़ी और राहत और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के लिए कर रियायत की घोषणाएं की जा सकती हैं। 
 
आम तौर पर प्रधानमंत्री बजट से पहले अर्थशास्त्रियों एवं विशेषज्ञों से बैठक करते हैं, लेकिन अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत के मद्देनजर यह कार्यक्रम अधिक महत्त्पूर्ण हो जाता है। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दर महज 4.5 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसके बाद अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर चिंताए बढ़ गई हैं।
Keyword: india, economy, GDP, narendra modi,,
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