बिजनेस स्टैंडर्ड - असम समेत पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था पर चोट
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असम समेत पूर्वोत्तर की अर्थव्यवस्था पर चोट

शाइन जैकब / नई दिल्ली December 13, 2019

नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) पारित होने के बाद असम में शुरू हुए प्रदर्शनों से अब पूर्वोत्तर राज्यों की ऊर्जा अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौती खड़ी होती दिख रही है। तेल एवं उत्पादक क्षेत्रों में चार दिनों से उत्पादन ठप पड़ा हुआ है, चारों रिफाइनरी में काम बाधित हो गया है और रसोई गैस सिलिंडरों की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। इसके अलावा थोक बाजारों के बंद होने से पूरे इलाके में जरूरी वस्तुओं की किल्लत होने की भी आशंका पैदा हो गई है। ऑयल इंडिया लिमिटेड के तेल उत्पादक क्षेत्रों में गत चार दिनों से उत्पादन ठप पड़ा हुआ है और असम गैस कंपनी का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। नुमालीगढ़ रिफाइनरी (एनआरएल) को यूरो-6 मानकों के अनुरूप उन्नत करने का काम भी प्रभावित हुआ है। असम चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा कि थोक बिक्री बाजारों के बंद होने से प्रतिदिन हो रही क्षति समूचे पूर्वोत्तर भारत की जीवनरेखा को प्रभावित कर रही है। विभिन्न खाद्य एवं अन्य आवश्यक उत्पादों की कीमतें भी बढ़ गई हैं। 
 
ऑयल इंडिया के एक प्रवक्ता ने बताया कि गत चार दिनों से प्रदर्शनों का सिलसिला जारी होने से तेल-क्षेत्र बंद पड़े हुए हैं। इससे करीब 5,000 किलोलीटर तेल उत्पादन कम हुआ है जो करीब 8-10 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति है। ऑयल इंडिया को किराये पर लिए गए ड्रिलिंग उपकरणों के निष्क्रिय पड़े रहने से भी आर्थिक नुुकसान हो रहा है। एक अधिकारी ने कहा कि इस गतिरोध के बाद उत्पादन के दोबारा शुरू होने पर भी तेल-क्षेत्रों का अधिकतम उत्पादन हासिल कर पाना मुश्किल होगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक 7,000 से अधिक लोगों ने ऑयल इंडिया के इंडस्ट्रियल एरिया गेट के सामने प्रदर्शन किया जिससे वहां काम ठप हो गया। तेल-गैस कंपनी ओएनजीसी का भी कामकाज प्रभावित हुआ है। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में जारी प्रदर्शनों की वजह से ओएनजीसी का परिचालन रोकना पड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक ऊर्जा क्षेत्र की ये दोनों सरकारी कंपनियां पूर्वोत्तर भारत में सालाना करीब 43 लाख टन कच्चे तेल और 3.2 अरब घन मीटर गैस का संयुक्त रूप से उत्पादन करती हैं। नागरिकता प्रावधानों में बदलाव करने वाले कानून का विरोध तेज होने से पूर्वोत्तर में मौजूद रिफाइनरियों और रासायनिक एवं उर्वरक उद्योगों को होने वाली आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में चार रिफाइनरी हैं जिनमें से तीन इंडियन ऑयल और नुमालीगढ़ रिफाइनरी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन की है। गत वित्त वर्ष में  चारों रिफाइनरी ने मिलकर करीब 70 लाख टन कच्चे तेल का शोधन किया था।
 
नुमालीगढ़ रिफाइनरी के प्रबंध निदेशक एस के बरुआ ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि रिफाइनरी को यूरो-6 मानकों के अनुरूप उन्नत करने के लिए इसे 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक के लिए योजनाबद्ध ढंग से बंद किया गया था। बरुआ ने कहा, 'हमारे कर्मचारी प्रदर्शनों के चलते रिफाइनरी तक पहुंच ही नहीं पा रहे हैं।'वहीं इंडियन ऑयल की रिफाइनरी गुवाहाटी, डिगबोई और बोंगईगांव में हैं। इन रिफाइनरियों में भी उत्पादन नीचे आ गया है। दरअसल जगह-जगह रास्ते अवरुद्ध होने से टैंकर तेल लेकर जा नहीं पा रहे हैं लिहाजा कंपनी ने उत्पादन कम कर दिया है। एक अधिकारी ने कहा, 'हमारे भंडारण टैंक भरे हुए हैं। टैंकरों की आवाजाही शुरू नहीं होने तक हम तेल का भंडारण कहां करेंगे?'
 
तेल एवं गैस उत्पादन रुकने से अन्य क्षेत्रों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इस बात की भी आशंका है कि असम गैस कंपनी से होने वाली आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसा होने पर राज्य भर के 400 से भी अधिक चाय बागानों को होने वाली गैस आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा इलाके में रसोई गैस की आपूर्ति पर भी असर देखने को मिल सकता है। बरुआ कहते हैं, 'पहले से ही रसोई गैस का 10-15 दिनों का बैकलॉग है। प्रदर्शन के दौरान गैस सिलिंडरों का परिवहन मुश्किल होने से इसका असर रसोईघर पर भी देखने को मिल सकता है।' अगर पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के हल्दिया से एलपीजी का परिवहन भी प्रभावित होता है तो फिर आने वाले दिनों में बैकलॉग और बढ़ सकता है। समूचे पूर्वोत्तर भारत में आपूर्ति करने वाले थोक बाजार भी प्रदर्शनों के दौरान चार दिनों से बंद चल रहे हैं। असम चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव शिशिर देव कलिता कहते हैं, 'दैनिक आधार पर इन आठ बड़े बाजारों में से हरेक को रोजाना 8-10 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। यहां पर प्याज के भाव 180-200 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचे हैं।'गुवाहाटी, तिनसुकिया, जोरहाट और डिब्रूगढ़ जिलों में कफ्र्यू लगे होने और सेना के फ्लैग मार्च के बावजूद प्रदर्शनकारी नए नागरिकता कानून के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं। शुक्रवार को भी असम में कई जगहों पर राजमार्ग अवरुद्ध कर दिए गए।
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