बिजनेस स्टैंडर्ड - बड़े निवेशकों से येस बैंक की बात
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बड़े निवेशकों से येस बैंक की बात

सुब्रत पांडा और हंसिनी कार्तिक / मुंबई 12 12, 2019

रवनीत गिल ने खारिज की जबरन विलय की अटकलें

यूरोपीय निवेशकों से चल रही है बातचीत
1.75 अरब डॉलर जुटाने के लिए बेचेगी 20-25 फीसदी हिस्सेदारी
बाध्यकारी समझौते के बाद होगा नामों का खुलासा

बिजनेस स्टैंडर्ड बड़े निवेशकों से येस बैंक की बातयेस बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी रवनीत गिल ने बैंक पर जबरन विलय थोपने की खबरों को खारिज करते हुए आज भरोसा जताया कि 1.75 अरब डॉलर पूंजी जुट जाएगी।  गिल ने कहा, 'फाइनैंशियल कंडक्ट अथॉरिटी द्वारा नियंत्रित बड़ी वित्तीय संस्थाओं ने बैंक में दिलचस्पी दिखाई है।' उन्होंने कहा कि बातचीत अग्रिम दौर में पहुंच चुकी है और उनके साथ बाध्यकारी समझौता होने के बाद ही बैंक निवेशकों के नामों का खुलासा करेगा। सूत्रों के मुताबिक चार से पांच वित्तीय संस्थाओं ने येस बैंक में दिलचस्पी दिखाई है और उनमें से एक निवेशक 10 फीसदी तक हिस्सेदारी ले सकता है।

दूसरे निवेशकों में से हरेक के 4 से 5 फीसदी हिस्सेदारी लेने की संभावना है। गिल ने कहा कि जिन वित्तीय संस्थाओं के साथ बैंक की बातचीत चल रही है, वे प्रतिष्ठित निवेशक हैं और भारतीय रिजर्व बैंक की कसौटी पर खरे उतरेंगे। उन्होंने साथ ही कहा कि लंदन की कंपनी साइटैक्स होल्डिंग्स ऐंड साइटैक्स इनवेस्टमेंट ग्रुप ने बैंक में 50 करोड़ डॉलर निवेश करने का वादा किया है और इसे भी नियामकीय मंजूरी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, 'हमें किसी तरह की नियामकीय समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।'  

जीएमआर समूह और इरविन सिंह बराइच के बैंक में निवेश करने की चर्चा है। लेकिन गिल ने स्पष्ट किया कि पूंजी जुटाने के इस दौर में इस श्रेणी के निवेशकों के शामिल होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, 'जहां तक भारतीय निवेशकों और पारिवारिक समूहों का संबंध है, हमने उन्हें बताया है कि इस दौर में हम संस्थागत मार्ग से पूंजी जुटाएंगे।' मीडिया खबरों के मुताबिक कनाडा के बराइच ने येस बैंक में 1.2 अरब डॉलर के निवेश के साथ हिस्सेदारी खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। सिंह की पेशकश बैंक के लिए अब तक की सबसे बड़ी पेशकश है।

येस बैंक को 23 दिसंबर तक एटी-1 बॉन्ड के लिए 300 करोड़ रुपये की देनदारी का भुगतान करना है और बैंक को उम्मीद है कि वह समय पर इसका भुगतान कर देगा। पूंजी संबंधी समस्याओं के इतर बैंक को दिसंबर तिमाही के नतीजों में परिसंपत्तियों की गुणवत्ता की कसौटी पर भी खरा उतरना है। वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में बैंक का 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज एनपीए बन चुका है। सितंबर, 2019 तक बैंक ने 30 हजार करोड़ रुपये के ऋण को दबावग्रस्त करार दिया है। ये निवेश से नीचे की श्रेणी में आते हैं। यह पूछने पर कि क्या तीसरी तिमाही में एनपीए या दबावग्रस्त परिसंपत्तियां बढ़ेंगी, गिल ने कहा कि हाल फिलहाल कोई नई मुसीबत नहीं है और इन दोनों मानकों में से कोई भी ज्यादा नहीं बढऩा चाहिए। 

बैंक ने पिछली तिमाही में पात्र संस्थागत निवेशकों से 1,930 करोड़ रुपये जुटाए थे। वित्त वर्ष 2019 की मार्च तिमाही में बैंक का कॉमन इक्विटी टियर 1 अनुपात 8 फीसदी था जो इस साल दूसरी तिमाही में बढ़कर 8.7 फीसदी हो गया। इससे बैंक को अपने बकाया बहीखाते को दुरुस्त करने में मदद मिली। बैंक को उम्मीद है कि 10 हजार करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों का जल्द ही समाधान होगा जिससे उसे कुछ पूंजी मिलेगी। 
Keyword: yes bank, fund, NPA, profit,,
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