बिजनेस स्टैंडर्ड - अगले साल से लागू होंगी नई जीएसटी दरें!
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अगले साल से लागू होंगी नई जीएसटी दरें!

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली December 12, 2019

उपभोक्ताओं को एक अप्रैल से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की बढ़ी दरों के लिए कमर कस लेनी चाहिए। जीएसटी परिषद राजस्व संग्रह में बढ़ोतरी के लिए अगले सप्ताह दरों के ढांचे में बदलाव कर सकती है। केंद्र की तरफ से पेश प्रस्ताव में पांच फीसदी के स्लैब को बढ़ाकर 6 से 8 फीसदी करना और 12 फीसदी के स्लैब को खत्म करना शामिल है। कुछ राज्य ऐसे कदम का विरोध कर सकते हैं क्योंकि इसमें गरीबों द्वारा उपभोग किए जाने वाले उत्पादों पर कर बढ़ाने की बात कही गई है। इसके बजाय राज्यों ने 18 फीसदी के स्लैब को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। 
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'परिषद के समक्ष कई विकल्प रखे जाएंगे। इनमें से एक पांच फीसदी के स्लैब को बढ़ाकर 6 फीसदी करना है। ऐसा करना आसान होगा। हालांकि इस स्लैब को बढ़ाकर 8 फीसदी से अधिक नहीं किया जा सकता है। उस स्थिति में 12 फीसदी के स्लैब को खत्म कर उसके अंतर्गत आने वाले उत्पादों को 8 फीसदी और 18 फीसदी के स्लैब में शामिल किया जा सकता है।' परिषद की बैठक 18 दिसंबर को होगी, जिसमें जीएसटी संग्रह को सुधारने के उपायों पर चर्चा होगी। केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि निचले स्लैब में फेरबदल का कड़ा विरोध किया जाएगा। आइजैक ने कहा, 'यह अजीब प्रस्ताव है। मैं गरीबों पर कर का बोझ बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकार नहीं करूंगा। यह अन्याय होगा।' उन्होंने कहा कि केरल ने कर संग्रह सुधारने के लिए 18 फीसदी के स्लैब को बढ़ाकर 22 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा था। आइजैक ने कहा, 'अगर जरूरत पड़े तो ऊपरी स्लैब में बढ़ोतरी हो। 18 फीसदी के स्लैब को बढ़ाकर 22 फीसदी या 25 फीसदी किया जा सकता है।'
 
पांच फीसदी के स्लैब में मुख्य रूप से आवश्यक जिंस जैसे बुनियादी कपड़े, फुटवियर और खाद्य उत्पाद शामिल हैं। बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि पांच फीसदी के स्लैब को बढ़ाने से मकसद पूरा नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा, 'हालांकि मैं अपने पास अंतिम प्रस्ताव आने तक इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा, लेकिन पांच फीसदी के स्लैब की दर को बढ़ाने से कोई ज्यादा फायदा नहीं होगा। 18 फीसदी के स्लैब में बदलाव से मदद मिल सकती है, लेकिन यह कहना मुश्किल है कि क्या यह व्यावहारिक है।'
 
पांच फीसदी के स्लैब को बढ़ाकर छह फीसदी करने का मतलब है कि अगर जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये मानकर चलते हैं तो राजस्व में हर महीने 1,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। वहीं इसे बढ़ाकर 8 फीसदी करने से हर महीने 3,000 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। करीब 60 फीसदी राजस्व की प्राप्ति 18 फीसदी स्लैब के दायरे में आने वाले उत्पादों से होती है। इसके अलावा 13 फीसदी राजस्व 12 फीसदी के स्लैब से, 22 फीसदी राजस्व 28 फीसदी कर के दायरे में आने वाले उत्पादों से और शेष राजस्व 5, 3 और एक फीसदी के स्लैब से प्राप्त होता है। केरल ने प्रस्ताव के मुताबिक अगर 18 फीसदी के स्लैब की दर बढ़ाकर 22 फीसदी की जाती है तो हर महीने 13,000 रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। 
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