बिजनेस स्टैंडर्ड - धनी प्रवर्तकों की संख्या घटी मगर शीर्ष 10 की हैसियत बढ़ी
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धनी प्रवर्तकों की संख्या घटी मगर शीर्ष 10 की हैसियत बढ़ी

कृष्ण कांत / मुंबई 12 11, 2019

अरबपति प्रवर्तकों की रैंकिंग बदली

बिजनेस स्टैंडर्ड धनी प्रवर्तकों की संख्या घटी मगर शीर्ष 10 की हैसियत बढ़ीअर्थव्यवस्था में व्यापक उथल-पुथल ने भारतीय अरबपति प्रवर्तकों की रैंकिंग भी बदल दी है। कई दिग्गज और पुराने अरबपति पीछे छूट गए, वहीं कुछ कम चर्चित अरबपति शीर्ष प्रवर्तकों की सूची में जगह बनाने में सफल रहे। निजी क्षेत्र की शीर्ष कंपनियों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी के बाजार मूल्य में बदलाव से पता चलता है कि मार्च 2018 में उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद से अरबपति प्रवर्तकों की संख्या घटी है, वहीं धनाढ्य और अपेक्षाकृत कम धनाढ्य प्रवर्तकों के बीच का अंतर 2019 में बढ़ा है। 

देश के दस धनी प्रवर्तकों (नेटवर्थ के आधार पर) की संपत्ति अब करीब 180 अरब डॉलर हो गई है जो एक साल पहले 140 अरब डॉलर था। इसके उलट हमारी सूची में शामिल 10 अपेक्षाकृत कम धनी अरबपतियों की संपत्ति में औसतन 20 फीसदी की कमी आई है। इन दस प्रवर्तकों की कुल नेटवर्थ करीब 10.5 अरब डॉलर है, जो एक साल पहले 13 अरब डॉलर थी। शेयर भाव में गिरावट की वजह से पिछले 12 महीने में इन प्रवर्तकों की नेटवर्थ में करीब 22 फीसदी की कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप शीर्ष दस धनी प्रवर्तकों के पास देश में कुल प्रवर्तक संपत्ति का करीब 41.2 फीसदी है, जो दिसंबर 2018 के अंत में 32.5 फीसदी और मार्च 2018 में 28 फीसदी थी। इसके साथ ही एक अरब डॉलर या उससे अधिक हैसियत वाले प्रवर्तकों की संख्या अब 80 रह गई है जो दिसंबर 2018 में 82 थी। 

यह विश्लेषण नमूने में शामिल 822 कंपनियों में प्रवर्तक हिस्सेदारी और बाजार पूंजीकरण के आधार पर किया गया है। नमूने में सरकारी कंपनियों, वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों की सूचीबद्घ इकाइयों, संस्थान के स्वामित्व वाली कंपनियों और उनकी सहायक इकाइयों जैसे कि एलऐंडटी, एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक आदि शामिल नहीं हैं। नमूने में होल्डिंग कंपनियों की अलग से सूचीबद्घ सहायक इकाइयों जैसे कि रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, बॉम्बे बर्मा, रिलायंस कैपिटल, बजाज फिनसर्व, गोदरेज इंडस्ट्रीज और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा आदि को भी समायोजित किया गया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 574 प्रवर्तकों में से केवल 142 की बाजार हैसियत 6 दिसंबर 2019 को बंद भाव के आधार पर 100 करोड़ रुपये या उससे अधिक थी। इसके साथ ही 432 प्रवर्तकों के नेटवर्थ में कमी आई है। दिसंबर 2018 के बाद से कुल प्रवर्तकों की शुद्ध हैसियत 3.2 फीसदी बढ़ी है, लेकिन इसका लाभ बड़ी कंपनियों को अधिक मिला है। भारत की शीर्ष कंपनियों के मालिकों की हैसियत अब करीब 31 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जो एक साल पहले 30.2 लाख करोड़ रुपये थी।

भारती एयरटेल के प्रवर्तक सुनील मित्तल और उनके परिवार की शुद्ध हैसियत पिछले साल दिसंबर के मुकाबले 83 फीसदी बढ़ी है। यह इजाफा तब हुआ है जब दूरसंचार क्षेत्र बेहद दबाव में दिख रहा है। फिलहाल करीब 62,000 करोड़ रुपये के साथ मित्तल परिवार देश का 10वां सबसे धनी परिवार है। मित्तल परिवार ने सन फार्मा के दिलीप सांघवी, डाबर के बर्मन, गोदरेज परिवार और कुमार मंगलम बिड़ला सहित कई दूसरे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया है।

रुपये में दर्ज बढ़त के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुकेश अंबानी सूची में सबसे ऊपर हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज में अंबानी के परिवार की हिस्सेदारी चालू कैलेंडर वर्ष में 21.2 अरब डॉलर या 47 फीसदी बढ़कर 68 अरब डॉलर हो गई, जो एक साल पहले 46.4 अरब डॉलर थी। इसके बाद अदाणी समूह के गौतम अदाणी का नाम आता है, जिनके परिवार की शुद्ध परिसंपत्ति 24 फीसदी या 3.5 अरब डॉलर हो गई। समूह की प्रमुख कंपनियों जैसे अदाणी पोट्र्स ऐंड सेज, अदाणी पावर, अदाणी गैस और अदाणी ट्रांसमिशन में भी पिछले 12 महीनों में मजबूत तेजी दिखी है।

दिलचस्प है कि कुछ एकल लेकिन सफल कारोबार विभिन्न कारोबार में लगी कंपनियों के मुकाबले अधिक धनी हो गए हैं। उदाहरण के लिए बंधन बैंक के सी एस घोष, डी-मार्ट के आर के दमानी और श्री सीमेंट के बांगुर अब परंपरागत उद्योगपतियों जैसे कुमार मंगलम बिड़ला, आदि गोदरेज और वेदांत के अनिल अग्रवाल से आगे निकल गए हैं।

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