बिजनेस स्टैंडर्ड - प्याज की महंगाई किसान के काम न आई
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प्याज की महंगाई किसान के काम न आई

दिलीप कुमार झा / लासलगांव December 11, 2019

महाराष्ट्र के प्याज-उत्पादक जिले नाशिक में निफाड तालुका के किसान रघुनाथ सावंत इन दिनों काफी परेशान हैं। उनकी परेशानी का कारण यह है कि देश भर में जिस प्याज के खुदरा भाव 130-140 रुपये प्रति किलो तक जा पहुंचे हैं, उस प्याज को उपजाने के बावजूद उन्हें इस तेजी का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। वह इस परेशानी का सामना करने वाले अकेले किसान नहीं हैं। उनकी तरह सैकड़ों अन्य प्याज उत्पादकों को भी यही बात परेशान कर रही है। सावंत अपनी बेबसी बयां करते हुए कहते हैं, 'मैंने 55 साल की अपनी जिंदगी में प्याज के इतने ऊंचे भाव नहीं देखे हैं। लेकिन इस आसमान छूती कीमत का किसानों के लिए कोई मतलब नहीं रह गया है। सितंबर-अक्टूबर में हुई भारी बारिश ने गोदाम में रखे प्याज को काफी नुकसान पहुंचाया था। पिछले साल उपजाए गए प्याज को अच्छे भाव पर बेचने की मंशा से किसानों ने गोदामों में रखा था लेकिन ज्यादा बारिश से आई बाढ़ ने सब बरबाद कर दिया।' 

 
वह बताते हैं कि बाढ़ की वजह से इस खरीफ मौसम में प्याज की फसल को भी दो बार काफी नुकसान हुआ। ऐसी स्थिति में किसानों को तीसरी बार प्याज के बीज डालने पड़े थे। इससे न केवल प्याज के उत्पादक किसानों की लागत काफी बढ़ गई बल्कि फसल तैयार होने में छह हफ्ते की देरी भी हुई। इसका नतीजा यह हुआ कि नई फसल की आवक शुरू होने तक प्याज के भाव 50 फीसदी तक चढ़ चुके थे। सावंत की ही तरह लासलगांव में प्याज की खेती करने वाले अर्जुन हिंगोले की भी कुछ ऐसी ही राय है। तीन एकड़ जमीन में खेती करने वाले हिंगोले कहते हैं, 'प्याज उगाने वाले किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पहले तो उनका पिछली उपज का माल बाढ़ के पानी ने बरबाद कर दिया और फिर इस बार प्याज की उपज भी कम हो गई।'
 
देश भर में प्याज के भाव आसमान छू रहे हैं। खुदरा बाजार में प्याज 130-140 रुपये प्रति किलो के स्तर तक जा पहुंचा है। वहीं थोक बाजार में भी यह 70-80 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। ऐसे में प्याज की खेती करने वाले किसानों ने ऊंचे भाव का फायदा उठाने के लिए अपनी फसल तैयार नहीं होने पर भी प्याज को खेतों से निकालना शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र के अलावा गुजरात, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के प्याज उत्पादक किसान अधपके प्याज को भी खेतों से निकाल रहे हैं। लेकिन मिट्टïी में काफी नमी होने से प्याज पूरी तरह विकसित नहीं हुए हैं जिससे पैदावार 40 फीसदी तक गिर गई।
 
जानकारों का अनुमान है कि इस खरीफ मौसम में प्याज की 30 फीसदी फसल बरबाद होने से अकेले लासलगांव में ही इसकी उपज करीब 20 लाख टन कम हो गई है। अगर देश भर में इस नुकसान का अनुमान लगाया जाए तो इस साल करीब 70 लाख टन प्याज कम उपजेगा। इसकी भरपाई के लिए गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, बिहार एवं पश्चिम बंगाल जैसे गैर-परंपरागत प्याज उत्पादक राज्यों में प्याज का रकबा बढ़ाने की जरूरत होगी। किसानों को अब यह बात परेशान कर रही है कि जब उनके खेतों से प्याज निकलने लगे हैं तो प्याज के दामों में गिरावट का दौर शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में भी यह सिलसिला जारी रहने की संभावना है। एपीएमसी लासलगांव के चेयरमैन सुवर्ण जगताप कहते हैं, 'प्याज की कीमतों के इससे ऊपर जाने की संभावना नहीं है क्योंकि मौसमी लाल प्याज की स्थानीय आवक बढ़ गई है। किसान भी ऊंचे भाव का लाभ उठाने के लिए अपरिपक्व प्याज को खेतों से निकाल रहे हैं। इस वजह से पिछले दो दिनों में ही प्याज के भाव 42 फीसदी तक गिरकर लासलगांव की थोक मंडी में 41 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं। अगले दो हफ्तों में इस मंडी में प्याज की कीमत 20-25 रुपये प्रति किलो तक आ जाने की संभावना है।'
 
एपीएमसी लासलगांव के सचिव नरेंद्र वाधवाने कहते हैं कि किसी भी जिंस उत्पाद के बढ़े हुए भाव फौरन खुदरा स्तर पर नजर आने लगते हैं जबकि कीमत होने का असर आने में हफ्ता भर लग जाता है। वाधवाने कहते हैं, 'ऐसी स्थिति में प्याज के थोक मंडी में प्याज के भाव गिरने का असर बाजार तक आने में 7-10 दिन लग जाएंगे।' वहीं इस संस्था के पूर्व चेयरमैन जयदत्त होल्कर ने सरकार से प्याज के भंडारण पर लगी सीमा हटाने की मांग की है। एक रोचक पहलू यह है कि हर तीन साल पर प्याज के भाव बढ़ जाते हैं। इस कीमत को देखते हुए किसान अधिक रकबे में प्याज उगाते हैं जिससे अगले दो साल तक इसके भाव नीचे रहते हैं। इस बीच किसानों के लिए राहत की बात यह है कि अब ठंडी हवाएं बहने लगी हैं और मिट्टïी की कमी भी कम होने लगी है। ऐसी जलवायु प्याज की उपज बढ़ाने में मददगार होती है।
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