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केंद्र सरकार लाए नई प्रत्यक्ष कर संहिता

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 10, 2019

वित्त पर संसद की स्थायी समिति ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह वस्तु एवं सेवा कर के संग्रह में गिरावट के मुद्दे का समाधान खोजे। वित्त मंत्री ने राज्यों को हर्जाने के भुगतान में देरी के लिए इसी कारण को जिम्मेदार बताया था। समिति के आंकड़ों के मुताबिक केंद्र ने चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर के तहत राजस्व नुकसान के एवज में 45,745 करोड़ रुपये का हर्जाना दिया है। इन आंकड़ों के मुताबिक केंद्र ने हर दो महीनों में राज्यों को हर्जाने का भुगतान किया। इस तरह मई में पहले दो महीनों के लिए 17,789 करोड़ रुपये और जुलाई में जून और जुलाई महीनों के 27,956 करोड़ रुपये के हर्जाने का भुगतान किया गया। 
 
राज्यों की शिकायत है कि उन्हें इन चार महीनों के बाद हर्जाना नहीं मिला है। इसी मसले को लेकर राज्यों के प्रतिनिधि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिले थे। हाल में एक कार्यक्रम में सीतारमण ने कहा था कि जीएसटी पर उपकर राज्यों का हर्जाना पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, 'राज्यों के वित्त मंत्री मुझसे मिले थे। उनकी चिंताएं जायज हैं। हम अपना वादा पूरा करेंगे।' उन्होंने कहा था कि दरों में कटौती और इनपुट टैक्स क्रेडिट कम होने के कारण जीएसटी ढांचे में अवरोध पैदा हुआ है। स्थायी समिति ने जीएसटी के घटते संग्रह को लेकर चिंता जताई। समिति ने सरकार से कहा कि वह जल्द से जल्द सभी समस्याओं का समाधान करे ताकि राजस्व में बढ़ोतरी हो। 
 
समिति ने राजस्व विभाग से कहा कि वह इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे प्रावधानों का दुरुपयोग रोकने के लिए चौकस रहे और अनुपालनाओं की निगरानी बढ़ाए। इसने कहा कि करदाताओं से सिस्टेमैटिक रिपोर्ट और फीडबैक सर्वेक्षण संग्रहित किए जाएं ताकि यह आकलन किया जा सके कि जीएसटी का परिचालन आसानी से हो रहा है या नहीं। 
 
प्रत्यक्ष कर संहिता बने
 
समिति यह भी चाहती है कि सरकार कर संग्रह बढ़ाने के लिए नई प्रत्यक्ष कर संहिता बनाए। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के पूर्व सदस्य की अगुआई में गठित कार्यदल पहले ही अपनी रिपोर्ट वित्त मंत्री को सौंप चुका है। हालांकि रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। कहा जा रहा है कि कार्यदल ने सालाना 2.5 लाख रुपये की न्यूनतम सीमा में बढ़ोतरी और कर स्लैब में बदलाव की सिफारिश की है। संसदीय समिति ने कहा कि आकलन वर्ष 2018-19 में करदाताओं की संख्या 8.45 करोड़ थी, जिसमें 8.04 करोड़ व्यक्तिगत आयकरदाता थे। देश की आबादी 1.30 अरब मानते हुए देश में करदाताओं का यह प्रतिशत महज 6.2 फीसदी होता है। 
 
कर रिफंड की बढ़ी राशि 
 
समिति ने कहा कि राजस्व विभाग ने बड़ी राशि का कर रिफंड दिया है। इसके अलावा रिफंड पर ब्याज का बोझ भी उठाया है। वित्त वर्ष 2017-18 प्रत्यक्ष कर के रिफंड की राशि 1.51 लाख करोड़ रुपये और ब्याज भुगतान 17,603 करोड़ रुपये था। वहीं वित्त वर्ष 2018-19 में कर रिफंड 1.61 लाख करोड़ रुपये और ब्याज भुगतान 20,566 करोड़ रुपये रहा। 
 
कर मुकदमों पर जताई चिंता 
 
समिति ने इस बात पर भी चिंता जताई कि राजस्व विभाग न्यायाधिकरणों और अदालतों में बड़ी तादाद में मुकदमे दायर करता है, लेकिन उसकी सफलता का स्तर बहुत कम है। आधुनिक कर प्रबंधन प्रणाली में कुशलता एक अहम पहलू है। इसलिए समिति ने राय दी है कि कर प्रशासन में व्यवस्था से संबंधित बदलाव किए जाने जरूरी है। 
Keyword: GST, income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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