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3.5 से 3.8 फीसदी के दायरे में रह सकता है राजकोषीय घाटा

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 12 10, 2019

लक्ष्य हासिल करना लग रहा मुश्किल

दिसंबर मध्य में अग्रिम कर संग्रह के आंकड़े आने के बाद लिया जाएगा अंतिम निर्णय
चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.3 फीसदी तक सीमित रखने का है लक्ष्य
अधिकारियों ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करना लगभग नामुमकिन

बिजनेस स्टैंडर्ड 3.5 से 3.8 फीसदी के दायरे में रह सकता है राजकोषीय घाटानरेंद्र मोदी सरकार 2019-20 के लिए राजकोषीय घाटे के अपने लक्ष्य से चूक सकती है। सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से बिज़नेस स्टैंडर्ड को संकेत मिले हैं कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.5 से 3.8 फीसदी के बीच रह सकता है। हालांकि सरकार ने इसे 3.3 फीसदी पर रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजकोषीय घाटा जीडीपी के 3.5 से 3.8 फीसदी के दायरे में रहेगा या नहीं इस बारे में अंतिम निर्णय दिसंबर के मध्य में अग्रिम कर के आंकड़े उपलब्ध होने के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और बजट बनाने वाली उनकी टीम द्वारा लिया जाएगा।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'एफआरबीएम अधिनियम के तहत राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.8 फीसदी तक रखने की सहूलियत दी गई है। हमारा लक्ष्य 3.5 फीसदी के आसपास इसे सीमित रखने का है लेकिन यह अग्रिम कर संग्रह के आंकड़े आने पर निर्भर करेगा।' एक अन्य अधिकारी ने कहा कि 3.3 फीसदी का लक्ष्य हासिल करना अब करीब-करीब मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, 'कर राजस्व की स्थिति को देखते हुए घाटा कहीं ज्यादा हो सकता है। हमारा मकसद इसे एफआरएमबी अधिनियम की अनुमति सीमा के दायरे में रखने का होगा।' 

ऐसा माना जा रहा है कि संभावित व्यय को आगे बढ़ाने और बजट सेे इतर वित्तपोषण के बावजूद राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा। राजकोषीय दायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम में 2018 में संशोधन करने के बाद राजकोषीय घाटा किसी भी साल में 0.5 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता है और ऐसा होने पर उसकी वाजिब वजह बतानी होगी। इनमें युद्ध, राष्ट्रीय सुरक्षा, कृषि क्षेत्र में गंभीर संकट, व्यापक प्राकृतिक आपदा, बड़े संरचनात्मक आर्थिक सुधार या पिछली चार तिमाहियों के औसत से किसी भी तिमाही में उत्पादन वृद्धि में 3 फीसदी की गिरावट आने जैसे कारण बताए गए हैं। 

चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 7.04 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। ऐसे में इसे जीडीपी के 3.3 फीसदी तक सीमित रखने के लिए वित्त वर्ष 2020 में नॉमिनल जीडीपी में 12 फीसदी वृद्घि का अनुमान लगाया गया था। लेकिन अक्टूबर के अंत तक राजकोषीय घाटा पूरे साल के लक्ष्य का 102.4 फीसदी पर पहुंच गया। जुलाई-सितंबर तिमाही का जीडीपी आंकड़ा उपलब्ध है, जिसके आधार पर पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) की गणना के अनुसार राजकोषीय घाटा नॉमिनल जीडीपी का 6.6 फीसदी रहा।

अधिकारियों ने भी अब मान लिया है पूरे साल में नॉमिनल जीडीपी 12 फीसदी के आसपास नहीं रहेगी। अप्रैल-जून में यह 6 फीसदी और जुलाई-सितंबर में भी 6 फीसदी थी। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2019-20 के लिए 5 फीसदी जीडीपी वृद्घि का अनुमान लगाया है। ऐसे में अगर 3 फीसदी अपस्फीतिकारक को भी मान लें तो नॉमिनल जीडीपी वृद्घि करीब 8 फीसदी होगी। इसका मतलब यह हुआ कि राजकोषीय घाटा 3.5 फीसदी तक बढ़ सकता है। विनिवेश लक्ष्य हासिल होने उम्मीद है और गैर-कर राजस्व भी बढ़ सकता है लेकिन कर राजस्व तकरीबन 2 लाख करोड़ रुपये कम रहने की आशंका है।

संसद में सोमवार को प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-नवंबर के दौरान केंद्रीय जीएसटी संग्रह बजट अनुमान से करीब 40 फीसदी कम रहा है। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि अप्रैल-नवंबर में वास्तविक केंद्रीय जीएसटी संग्रह 3.3 लाख करोड़ रुपये रहा जबकि बजट में लक्ष्य 5.26 लाख करोड़ रुपये था। इस दौरान कॉर्पोरेशन कर संग्रह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1 फीसदी घट गया। 

Keyword: fiscal deficit, revenue, economy,,
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