बिजनेस स्टैंडर्ड - डेटा विधेयक से उद्योग आशंकित
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डेटा विधेयक से उद्योग आशंकित

डेटा संरक्षण विधेयक में सरकार को विशेष अधिकार, कंपनियों की मुश्किल
नेहा अलावधी, करण चौधरी और पीरजादा अबरार / नई दिल्ली, बेंगलूरु 12 10, 2019

...डेटा संरक्षण विधेयक में खास

निवेश चक्र के भी प्रभावित होने की आशंका
विशेष परिस्थिति में इसके प्रावधानों से सरकारी एजेंसियों को दी जा सकती है छूट
डेटा संरक्षण प्राधिकरण से गोपनीयता प्रमाण पत्र लेने से बढ़ेगा अनुपालन का बोझ
डिजिटल कॉमर्स फर्मों को बदलना पड़ सकता है अपना कारोबारी मॉडल

बिजनेस स्टैंडर्ड डेटा विधेयक से उद्योग आशंकितपिछले हफ्ते केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर निजी डेटा संरक्षण विधेयक से केंद्र सरकार को किसी भी एजेंसी को विधेयक के प्रावधान से छूट देने का अधिकार होगा। दूसरी ओर इसकी कुछ शर्तों के कारण बड़ी तकनीकी कंपनियों और डिजिटल कॉमर्स फर्मों में अपने कारोबारी मॉडल को जारी रखने और निवेश चक्र को बनाए रखने पर चिंता उत्पन्न हो सकती है। विधेयक की प्रति आज लोकसभा सदस्यों के बीच वितरित की गई और इसके शीत सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी विधेयक देखा है जिसमें कहा गया है कि भारत की संप्रभुता और अखंडता, देश की सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ मैत्री संबंधों के हित में या निश्चित स्थिति में संज्ञेय अपराध के लिए कमीशन को बढ़ावा देने से रोकने के लिए केंद्र सरकार निजी डेटा संरक्षण विधेयक के कोई या सभी प्रावधानों को 'सरकार की किसी भी एजेंसी' पर लागू नहीं करने का निर्देश देने पर निर्णय कर सकता है।

सरकारी विभागों को दी गई इस छूट के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि यह विधेयक के पहले मसौदे से काफी अलग है, जिसे न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्ण समिति ने सरकार को सौंपा गया था। इसमें कहा गया था कि देश की सुरक्षा के हित में निजी डेटा की प्रोसेसिंग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जब तक कि कानूनन ऐसा करना जरूरी न हो। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक अपार गुप्ता ने कहा, 'इस विधेयक में निगरानी सुधार की कोई व्यवस्था नहीं है जिसमें सीसीटीवी निगरानी, सोशल मीडिया आदि निगरानी शामिल हो सकती है। लेकिन इस पर विचार नहीं किया गया क्योंकि निजी डेटा संग्रह के लिए सहमति पूर्व शर्त है।'

डिजिटल कॉमर्स कंपनियों को आशंका है कि अगर डेटा संरक्षण विधेयक अपने मौजूदा प्रारूप में पारित होता है तो उनके कारोबार पर इसका बुरा असर पड़ेगा। उन्हें डर है कि इससे न केवल उनके रोजाना कामकाज में मुश्किलें आएंगी बल्कि सीधे तौर पर उनका कारोबारी मॉडल भी प्रभावित होगा। कई कंपनियों को आशंका है कि इससे अगला निवेश चक्र भी प्रभावित होगा।

एक बहुराष्ट्रीय डिजिटल कॉमर्स फर्म के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ने कहा, 'इससे हमारा कामकाज प्रभावित होगा। यह डेटा संरक्षण को देखने का संकीर्ण तरीका है। इससे हमारा कारोबारी मॉडल प्रभावित होगा। जिस तरह हम काम करते हैं उसे हर साल बदलना मुश्किल है। प्रोसेसिंग और डेटा प्रबंधन पर खर्च पेचीदा मसला है। कई कंपनियों को अपनी निवेश योजनाओं पर पुनर्विचार करना पड़ेगा जिसमें हमारी कंपनी भी शामिल है।'

उद्योग के जानकारों के मुताबिक यह मसौदा विधेयक कारोबार को आसान बनाने की सोच में बाधक बन सकता है। लॉ फर्म टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसीटर्स के मैनेजिंग पार्टनर सलमान वारिस ने कहा, 'विधेयक के मुताबिक डेटा संरक्षण प्राधिकरण से गोपनीयता का प्रमाण पत्र लेने की जरूरत होगी। इस तरह के प्रावधानों से कंपनियों पर अनुपालन का अनावश्यक बोझ पड़ेगा और कारोबार आसान बनाने की राह मुश्किल होगी। मौजूदा आर्थिक माहौल में आईटी क्षेत्र में तेजी के लिए यह बेहद जरूरी है।'

कई स्तरों पर सहमति की जरूरत है जिससे यह पूरी प्रक्रिया बेहद जटिल हो जाएगी। वारिस के मुताबिक देश के बाहर डेटा के प्रोसेसिंग से जुड़े प्रावधानों के लिए कई स्तरों पर सहमति और मंजूरी की जरूरत है और केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इसे नहीं किया जा सकता है। अमेरिका की एक बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनी के एक अधिकारी ने कहा कि अगर सरकार कंपनियों से गैर-निजी डेटा को साझा करने को कहती है तो यह एक विवादास्पद मुद्दा होगा। विधेयक के प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार डेटा सुरक्षा प्राधिकरण से विमर्श करने के बाद किसी भी कंपनी या डेटा प्रोसेसर को कोई भी व्यक्गित या गैर-व्यक्तिगत डेटा देने के लिए कह सकती है। इसका मकसद सेवाएं मुहैया कराने के लिए उपयुक्त लक्ष्य निर्धारण और सबूत आधारित नीतियां तैयार करना है। कानूनी विशेषज्ञ अंबर सिन्हा ने कहा कि खासकर गैर-व्यक्गित डेटा के मामले में हमें यह देखना होगा कि ये कहां जाते हैं। 

सिन्हा ने कहा कि बौद्धिक संपदा कानून, कारोबार गोपनीयता और डेटाबेस अधिकार जैसी सुरक्षा डेटा संग्राहक कंपनियों के पास उपलब्ध होगी, जिससे सरकार के लिए इनसे डेटा मुहैया करने के लिए कहना थोड़ा तकनीकी मामला हो सकता है। उन्होंने कहा, 'विधेयक  के प्रावधानों को देखने से पता चलता है कि भारत सरकार डेटा को राष्ट्रीय भू-राजनीतिक लक्ष्यों के लिहाज से अहम मानती है। सरकार देश में उपलब्ध डेटा का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए करना चाहती है। कुछ बातें जोड़कर गैर-व्यक्गित डेटा आसानी से व्यक्गित डेटा में तब्दील किया जा सकता है।'

डेटा प्रोसेसिंग की जरूरतों को मिली-जुली प्रतिक्रियादेश के बाहर प्रोसेस होने वाले व्यक्तिगत डेटा को लेकर कुछ ढील जरूर दी गई है। खेतान ऐंड कंपनी में पार्टनर अतुल पांडेय कहते हैं,'डेटा के प्रकार के आधार पर विधेयक में इन बातों को लेकर प्रावधान हैं कि डेटा कहां प्रोसेस और संग्रहित किए जा सकते हैं और संवेदनशील डेटा का संग्रह भारत में ही होना है। विधेयक में यह प्रावधान भी है कि यूजर की अनुमति के बाद ही भारत से बाहर डेटा प्रोसेस किया जा सकता है। 

भारतीय आईटी सेवा क्षेत्र के एक विशेषज्ञ ने कहा कि विधेयक के प्रावधान इन्फोसिस, विप्रो और अन्य आईटी कंपनियों के लिए पर्याप्त हैं। मोजिला में लोक नीति सलाहकार उद् भव तिवारी कहते हैं, 'सोशल मीडिया यूजर का सत्यापन और गैर-व्यक्तिगत आंकड़ों का बाध्यकारी स्थानांतरण भारतीय लोगों की निजता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। भारतीयों की निजता की पुख्ता सुरक्षा के लिए सरकार को इन जोखिम भरे प्रावधानों की समीक्षा करनी होगी।'
Keyword: data bill, parliament, security,,
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