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आरबीआई के विराम के बाद गिल्ट फंड पर चोट

सचिन मामबटा और जश कृपलानी / मुंबई December 09, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से नीतिगत ब्याज दरें न घटाने के फैसले से गिल्ट फंडों में नजर आई मजबूत बढ़ोतरी पर दबाव पड़ सकता है। गुरुवार को गिल्ट व सरकारी प्रतिभूति वाले अन्य फंडों के नेट ऐसेट वैल्यू (एनएवी) में 0.6 फीसदी से लेकर 1.1 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई जब भारतीय रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें अपरिवर्तित रखी, लिहाजा सरकारी प्रतिभूतियों का प्रतिफल बढ़ गया। 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल 11 आधार अंक चढ़ा, जो 20 सितंबर के बाद की सबसे तेज बढ़ोतरी थी।
 
बाजार विशेषज्ञों ने कहा, निवेशकों को इस श्रेणी में रिटर्न की उम्मीद में कमी लानी होगी। मिरे ऐसेट मैनेजमेंट के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र जाजू ने कहा, अगर आप इससे एक साल पहले की अवधि पर नजर डालें तो कोई भी इस तरह के रिटर्न की उम्मीद नहीं कर रहा था। मुझे नहीं लगता कि उस तरह के रिटर्न का दोहराव मौजूदा वर्ष में हो पाएगा। उन्होंने कहा कि आरबीआई के हालिया कदम के बाद परिदृश्य अनिश्चित हो गया है जबकि आरबीआई ने संकेत दिया है कि स्थिति में सुधार होता है और महंगाई घटती है तो वह ब्याज दरें घटाएगा।
 
एक साल में गिल्ट फंड ने डेट श्रेणी में ज्यादातर फंडों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है और इनमें 10 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। विशेषज्ञों ने कहा कि कई कारण हैं, जिनका भविष्य में इस श्रेणी के प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। आईडीएफसी एएमसी के फंड मैनेजर और सहायक निदेशक ने अनुराग मित्तल ने कहा, 2020 की पहली छमाही के लिए महंगाई का अनुमान अनुकूल है और फरवरी तक खाद्य महंगाई नरम हो सकती है। बढ़त का परिदृश्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। आरबीआई ने पर्याप्त नकदी की सुनिश्चितता को लेकर प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा, कर संग्रह में कमी और जीडीपी में नरमी के कारण राजकोषीय प्रभाव को बाजार ने समाहित कर लिया है और किसी तरह का राजकोषीय प्रोत्साहन टर्म स्प्रेड में इजाफा करेगा।
 
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर के आखिर में गिल्ट फंड की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां 8,500 करोड़ रुपये से ज्यादा थी। सलाहकारों ने कहा कि खुदरा निवेशकों के लिए गिल्ट फंड शायद उपयुक्त नहीं हो सकता क्योंकि इसके प्रदर्शन पर असर डालने वाली कई चीजें मौजूद हैं। प्लान रुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी ने कहा, ये फंड उन निवेशकों के लिए जो सुनियोजित फैसला ले सकते हैं, फंड में प्रवेश व निकासी का समय तय कर सकते हैं और ब्याज दर के चक्र की निगरानी कर सकते हैं।
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