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वसीयत में कोडिसिल के जरिये कर सकते हैं छोटे-मोटे बदलाव

सरबजीत के सेन /  December 08, 2019

क्या आपने वसीयत लिखी है, जिसमें अपने जीवनकाल के बाद अपनी संपत्तियों के बंटवारे की रूपरेखा तैयार की है, लेकिन अब बदली परिस्थितियों में इसमें कुछ बदलाव करना चाहते हैं? नई वसीयत लिखना, इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग करना, पुरानी वसीयत को खत्म करना और नई वसीयत को सुरक्षित जगह पर रखना एक लंबी प्रक्रिया है और ज्यादातर लोग इससे बचना चाहेंगे। क्या इसका कोई आसान तरीका नहीं है? यह तरीका कोडिसिल (परिशिष्ट) लिखना हो सकता है।  

कोडिसिल वसीयतकर्ता द्वारा मौजूदा वसीयत में कुछ संशोधन करने के लिए तैयार किया जाने वाला दस्तावेज है। मोतीलाल ओसवाल प्राइवेट वेल्थ मैनेजमेंट में वरिष्ठ समूह उपाध्यक्ष और प्रमुख (न्यास एवं एस्टेट योजना) नेहा पाठक कहती हैं, 'कोडिसिल वसीयत का विकल्प नहीं है। यह एक संशोधन है, इसलिए इसे हमेशा वसीयत के सहायक के रूप में देखा जाना चाहिए। इस पर वसीयतकर्ता और कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए। गवाह वसीयत या कोडिसिल के लाभार्थी नहीं हो सकते हैं।' अगर कोई अदालत किसी वसीयत को निरस्त करती है तो इससे जुड़ी कोडिसिल भी निरस्त हो जाती हैं। 

आम तौर पर कोडिसिल का इस्तेमाल छोटे-मोटे बदलावों के लिए किया जाता है। इनहेरिटेंसनीड्स डॉट कॉम के संस्थापक और इनिशिएटर रजत दत्ता ने कहा, 'अगर बदलाव 'ऑबजेक्ट मैटर (वसीयत में दी जाने वाली संपत्तियों) या 'सबजेक्ट मैटर' (प्राप्तकर्ता) में है तो वसीयतकर्ता मूल वसीयत मे कोडिसिल के जरिये संशोधन कर सकता है।' 

प्रारूप की प्रक्रिया

कोडिसिल लिखने की प्रक्रिया वसीयत लिखने के समान ही है। इस पर दो गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए। इस प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग बेहतर रहेगी। हालांकि कानून में इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है। वीडियो रिकॉर्डिंग यह साबित करने में मदद करती है कि वसीयत और कोडिसिल वसीयतकर्ता ने बिना किसी दबाव के अपनी मनमर्जी से लिखी है। इसे लिखे जाने की वजह भी बताई जानी चाहिए। कोडिसिल में सभी बदलावों का स्पष्ट उल्लेख किया जाना चाहिए। पहले पैराग्राफ में ही यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि यह किस चीज से संबंधित है। इसमें वसीयत के उस खंड, पैराग्राफ या ऑबजेक्ट का उल्लेख किया जाना चाहिए, जिसे वसीयतकर्ता संशोधित या हटाना चाहता है। इसमें साफ तौर पर यह भी उल्लेख किया जाना चाहिए कि वसीयत में कहां और क्या जोड़ा जाना है। हर कीमत पर अस्पष्टता से बचा जाना चाहिए।

दत्ता कहते हैं कि यह जरूरी है कि कोडिसिल में क्लोजर क्लॉज के रूप में निम्न होने चाहिए- 'अगर... तारीख को हस्ताक्षरित कोडिसिल का कोई बयान ... तारीख को हस्ताक्षरित मेरी पिछली वसीयत और टेस्टामेंट का विरोधाभासी है तो इस कोडिसिल की बातें लागू होंगी। अन्य विषयों में मैं मेरी पिछली वसीयत और टेस्टामेंट की फिर से पुष्टि और पुनप्र्रकाशन करता हूं।'

वसीयत की तरह कोडिसिल को भी पंजीकृत कराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर आपने अपनी वसीयत का पंजीकरण कराया है तो कोडिसिल को भी पंजीकृत कराएं। दत्ता ने कहा, 'इससे कोडिसिल को ज्यादा प्रामाणिकता मिलेगी और मुकदमेबाजी से मिलने में मदद मिलेगी। अगर वसीयत (आंशिक या पूरी तरह) की जगह कोडिसिल लेती है, जो पंजीकृत नहीं है तो वसीयत को पंजीकृत कराने का पूरा उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।' 

कब बनाए नई वसीयत का प्रारूप 

कोडिसिल का इस्तेमाल छोटे-मोटे बदलावों के लिए करना बेहतर है। अगर आप अपनी वसीयत को पूरी तरह बदलने जा रहे हैं तो नई वसीयत लिखने पर विचार करना चाहिए। उदाहरण के लिए अगर आपने अपनी मूल वसीयत में अपना पूरा पैसा अपने बेटों को देने का फैसला किया था और अब इसे धमार्थ के लिए देना चाहते हैं। यह एक बड़ा बदलाव है और इसके लिए नई वसीयत की जरूरत है। कई बार लाभार्थी वही रहते हैं, लेकिन वसीयतकर्ता उनकी हिस्सेदारी में बड़ा बदलाव करना चाहता है। ऐसी स्थिति में भी नई वसीयत लिखना तर्कसंगत है। 

अगर आपने बीते समय में बहुत सी कोडिसिल लिखी हैं या आपकी संपत्ति में अहम बदलाव आया है तो नई वसीयत लिखी जानी चाहिए। बहुत सी कोडिसिल वसीयत के आसानी से क्रियान्वयन में बाधक बनती हैं क्योंकि एक्जीक्यूटर के लिए सभी इच्छाओं को लागू करना पेचीदा होता है। पाठक ने कहा, 'बहुत सी कोडिसिल से लाभार्थियों में भ्रम पैदा होता है और अनावश्यक विवाद पैदा होते हैं। अगर बहुत सी कोडिसिल हैं तो पुरानी वसीयत और कोसिसिल को रद्द करना और ऐसी नई वसीयत लिखना ज्यादा तर्कसंगत होगा, जिसमें सभी संशोधन शामिल होंगे।' वह कहते हैं कि पहले की वसीयत और कोडिसिल को नष्ट किया जाना चाहिए। 

Keyword: Heir, वसीयत, codicial,
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