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ऋणदाता खुद कहे तो भी जरूरत से ज्यादा कर्ज न लें

संजय कुमार सिंह /  December 08, 2019

अर्थव्यवस्था की रफ्तार मंद पडऩे का असर सुरक्षित ऋण यानी आवास ऋण, संपत्ति के बदले ऋण और कार ऋण पर साफ नजर आ रहा है। क्रेडिट कार्ड पर कर्ज या पर्सनल लोन की मांग अब भी मजबूत बनी हुई है क्योंकि आपात स्थिति से निपटने के लिए या मनाचाहा मगर महंगा सामान खरीदने के लिए लोग ऐसे कर्ज का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। ट्रांसयूनियन सिबिल की एक हालिया रिपोर्ट में अनूठी बात पता चली है।

रिपोर्ट के मुताबिक कर्ज देने वाली संस्थाओं खास तौर पर गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने बिलो-प्राइम यानी सामान्य से कम साख या कम रेटिंग वाले ग्राहकों को जमकर कर्ज देना शुरू कर दिया है। 2019 की दूसरी तिमाही में क्रेडिट-कार्ड पर बकाया राशि 2018 की दूसरी तिमाही की बकाया राशि से 34.3 फीसदी ज्यादा हो गई थी। ट्रांसयूनियन सिबिल से मिले आंकड़ों के मुताबिक उसी अवधि में पर्सनल लोन में 35 फीसदी इजाफा हुआ था। मगर वाहन ऋण में 10.9 फीसदी, आवास त्रण में 14.5 फीसदी और संपत्ति गिरवी रखकर लिए गए कर्ज में केवल 16.7 फीसदी का इजाफा हुआ था। जाहिर है कि सुरक्षित ऋण में असुरक्षित ऋण के मुकाबले काफी कम इजाफा देखा गया।

बिलो-प्राइम पर जोर

क्रेडिट कार्ड और पर्सनल लोन दोनों ही मामलों में ऋणदाताओं ने अपना बाजार बदल लिया है। अब वे बिलो-प्राइम यानी कमजोर साख या कर्ज चुकाने की कमजोर क्षमता वाले ग्राहकों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। 2019 की दूसरी तिमाही में करीब 32.1 फीसदी नए क्रेडिट कार्ड ऐसे ग्राहकों को दिए गए, जिनके साथ जोखिम ज्यादा था। 2018 की दूसरी तिमाही में नए कार्ड पाने वालों में ऐसे ग्राहकों की हिस्सेदारी केवल 26.4 फीसदी थी।

पर्सनल लोन की बात करें तो एनबीएफसी ने इस कैलेंडर वर्ष की दूसरी तिमाही में हरेक ग्राहक को औसतन 41,000 रुपये बतौर कर्ज दिए, जबकि उससे साल भर पहले वे औसतन 1.1 लाख रुपये दे रही थीं। जाहिर है कि एनबीएफसी ग्राहकों को अब बतौर कर्ज कम राशि दे रही हैं। ट्रांसयूनियन सिबिल में उपाध्यक्ष (शोध एवं परामर्श) अभय केलकर कहते हैं, 'अब कम राशि के कर्ज देने पर एनबीएफसी का जोर है ताकि उपभोक्ताओं की बड़ी तादाद उनके पास हो।' ज्यादा जोखिम वाले ग्राहकों की ओर रुझान पर्सनल लोन में ज्यादा देखा गया। इस साल की दूसरी तिमाही में जो नए पर्सनल लोन दिए गए, उनमें करीब 44.8 फीसदी बिलो-प्राइम ग्राहकों को दिए गए थे, जबकि 2018 की दूसरी तिमाही में नए पर्सनल लोन में ऐसे ग्राहकों की संख्या केवल 36.4 फीसदी थी। ट्रांसयूनियन सिबिल के आंकड़े बताते हैं एनबीएफसी से जारी नए पर्सनल लोन में तकरीबन 50 फीसदी बिलो-प्राइम ग्राहकों को ही गए थे। 

इस तरह एनबीएफसी समेत सभी कर्ज देने वाली संस्थाएं कमजोर साख वाले ग्राहकों को रिझाने में लगी हुई हैं। पैसाबाजार डॉटा कॉम के मुख्य कार्याधिकारी और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा कहते हैं, 'आवास त्र्ऋण और वाहन ऋण जैसी सुरक्षित कर्ज वाली श्रेणियों में जो सुस्ती नजर आ रही है, शायद उसकी भरपाई के लिए ही ऋणदाता ऐसे ग्राहकों को ज्यादा कर्ज दे रहे हैं।' 

कर्जदारों के क्रेडिट स्कोर सुधारने में महारत रखने वाले विशेषज्ञ और 'अनलॉक द पावर ऑफ योर क्रेडिट स्कोर' किताब के लेखक अरुण राममूर्ति समझाते हैं, 'कई एनबीएफसी ने फिनटेक कंपनियों के साथ भागीदारी की है। फिनटेक कंपनियों ने वैकल्पिक स्कोरिंग मॉडल तैयार किए हैं जिनके आधार पर वे उन लोगों को ऋण देती हैं जिनके पास क्रेडिट स्कोर नहीं होता है या फिर क्रेडिट स्कोर काफी कमजोर होता है। इससे संबंधित विश्लेषण का प्रबंधन फिनटेक कंपनी द्वारा किया जाता है जबकि उधारी प्रक्रिया एनबीएफसी के बहीखाते के जरिये होती है।' 

क्रेडिट स्कोर का दायरा 300 से 900 के बीच होता है। 651-700 का क्रेडिट स्कोर वालों को नियर-प्राइम के तौर पर शामिल किया जाता है जबकि 300-650 के दायरे में स्कोर को सबप्राइम श्रेणी में रखा गया है। 

ऋण का करें प्रबंधन

इस तरह के बदलावों का मतलब है कि पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन बिलो-प्राइम श्रेणियों में ग्राहकों के लिए ज्यादा आसानी से उपलब्ध हो गए हैं। इन ग्राहकों को यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि वे सिर्फ इस वजह से बहुत ज्यादा ऋण न लें कि ऋण आसानी से उपलब्ध है। केलकर कहते हैं, 'मासिक किस्तों (ईएमआई) का कुल योग व्यक्ति की सकल मासिक आय के 30-40 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए।' वह कहते हैं कि जो लोग पहले से ही घर और कार ऋण ले चुके हैं, उन्हें सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि उन्हें पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड ऋण लेकर अपना कर्ज बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए।

समय पर पर्सनल लोन की ईएमआई नहीं चुकाने पर जुर्माने के तौर पर हर महीने 2 प्रतिशत तक की भारी ब्याज दर का भुगतान करना पड़ सकता है। कुकरेजा का कहना है, 'कर्जदारों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अपने बचत खातों में स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन सेट कर अपनी ईएमआई की स्वत: निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए।' क्रेडिट कार्ड धारकों को सिर्फ उतना ही खर्च करना चाहिए जितना कि वे अगले बिल तक चुका सकें। भुगतान चूक की स्थिति में गैर-भुगतान वाली रकम पर 47 प्रतिशत तक का भारी भरकम सालाना शुल्क चुकाना पड़ता है। यदि कर्जदार बकाया न्यूनतम रकम भी चुकाने में विफल रहता है तो उस पर 1,000 रुपये का विलंबित भुगतान शुल्क लग सकता है। 

क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं को 30 प्रतिशत से अधिक के क्रेडिट इस्तेमाल अनुपात को पार करने से बचना चाहिए। यह अनुपात कार्ड पर मौजूदा कुल क्रेडिट सीमा के लिए इस्तेमाल प्रतिशत है। कुकरेजा का कहना है, '30 प्रतिशत अनुपात को पार करना ऋण भूख का संकेत माना जाता है और इससे क्रेडिट ब्यूरो को क्रेडिट स्कोर घटाने में मदद मिलती है।' बिलो-प्राइम कर्जदार द्वारा भुगतान चूक से उसका क्रेडिट स्कोर और कमजोर पड़ जाएगा। राममूर्ति कहते हैं, 'कमजोर क्रेडिट स्कोर का मतलब है कि ग्राहक भविष्य में औपचारिक ऋण के किसी स्वरूप तक पहुंच बनाने में सक्षम नहीं रह जाएगा।' उनका कहना है कि आज किसी का क्रेडिट स्कोर ऋण से ज्यादा मायने रखता है। कंपनियां प्रमुख नौकरियों और निदेशक की जिम्मेदारी के लिए भी संभावनाओं का स्कोर देखती हैं।  

कर्ज बोझ घटाएं

जिस व्यक्ति का कर्ज बोझ निर्धारित एवं विवेकपूर्ण सीमा को पार कर गया है, उसे तुरंत इसे घटाने के कदम उठाने चाहिए। एक विकल्प है लिक्विड परिसंपत्तियों की बिक्री करना। अन्य है अतिरिक्त खर्च में कमी लाना, जैसे महंगे हॉलिडे पैकेज, बाहर खाना आदि।

ज्यादा कर्ज के बोझ से दबे लोगों को ऋण समेकन विकल्प पर भी ध्यान देना चाहिए। ऐसा करने के लिए अच्छा तरीका कम ब्याज दर वाले नए ऋण लेना और इसका इस्तेमाल ऊंची ब्याज दर वाले ऋणों को चुकाने में करना। कम ब्याज दर के साथ साथ लंबी अवधि के ऋण से मासिक अदायगी बोझ घटेगा और इससे ऊंची दरों से बचने में मदद मिलेगी। ऊंची ब्याज दरों पर पर्सनल लोन लेने वाले लोग अपना बकाया कम ब्याज दर वाले अन्य बैंक में स्थानांतरित करा सकते हैं। इसी तरह तय तारीख तक पूरा बकाया चुकाने में परेशानी महसूस कर रहे क्रेडिट कार्ड धारक भी अपनी बकाया राशि को लंबी अवधि के लिए कम ब्याज दरों पर ईएमआई में तब्दील करा सकते हैं।

कई तरह के ऋण या बड़े क्रेडिट कार्ड बकाया से जुड़े मौजूदा आवास ऋण ग्राहक टॉप-अप होम लोन ले सकते हैं। ये ऋण कम ब्याज दरों (8.55-11.95 प्रतिशत) और लंबी अवधि (7-30 वर्ष) के लिए होते हैं।
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