बिजनेस स?टैंडर?ड - महंगी पेंट कंपनियों के लिए संभावनाएं हैं मजबूत
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महंगी पेंट कंपनियों के लिए संभावनाएं हैं मजबूत

श्रीपाद ऑटे /  December 08, 2019

लगातार मजबूत प्रदर्शन की बदौलत पेंट कंपनियां पिछले कई महीनों से निवेशकों को आकर्षित करने में सफल रही हैं। कुल मिलाकर एफएमसीजी कंपनियों की तरह ये भी निवेशकों की चहेती रही हैं। पेंट कंपनियों के शेयरों के प्रति निवेशकों के लगाव के लिए कुछ हद तक दूसरे प्रमुख क्षेत्रों- वाहन एवं गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में सुस्ती भी जिम्मेदार है। कारोबार की रफ्तार धीमी पडऩे के बावजूद पेंट कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, हां कुछ एफएमसीजी कंपनियों पर असर जरूर हुआ है।

पेंट कंपनियों के शेयरों के मजबूत प्रदर्शन का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इस खंड की शीर्ष कंपनियों एशियन पेंट्स और बर्जर पेंट्स के शेयरों में पिछले छह महीने के दौरान 24 से 50 प्रतिशत तेजी आई है, वहीं कन्साई नेरोलैक 13 प्रतिशत उछला है। इसी अवधि के दौरान निफ्टी एमएमसीजी सूचकांक महज 1 प्रतिशत ऊपर चढ़ा है। हाल की तिमाहियों में अपेक्षाकृत अच्छा प्रदर्शन पेंट कंपनियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ाने का एक प्रमुख कारण रहा है। एक और अहम बात यह है कि कारोबार बढऩे से कंपनी को मिलने वाला लाभ, खासकर डेकोरेटिव पेंट कंपनियों को, आगे भी मिलना जारी रहेगा। फिलिप कैपिटल के उपाध्यक्ष विशाल गुटका कहते हैं, 'पेंट कंपनियों का मजबूत प्रदर्शन आने वाले समय में भी जारी रहेगा, साथ ही इनके लिहाज से अनुकूल कुछ वृहद आर्थिक पहलू इन्हें मजबूती प्रदान करेंगे। हालांकि निकट अवधि में ऊंचे आधार के कारण वृद्धि दर थोड़ी धीमी पड़ सकती है।'

पेंट कंपनियों के शानदार प्रदर्शन के कई कारण हैं। पहली बात तो यह कि देश में कंक्रीट के मकानों का निर्माण तेजी से हो रहा है, वहीं देश में पेंट कंपनियों की पहुंच अभी भी सीमित है, जिस वजह से उनके लिए कारोबार के लिए अथाह संभावनाएं हैं। इनके अलावा मकानों पर पेंट चढ़ाने की आवृत्ति भी अधिक है। संगठित पेंट कंपनियों के लिए कारोबारी संभावनाएं मौजूद हैं। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद इन्हें असंगठित पेंट कंपनियों (पुटी, डिस्टेम्पर आदि खंड में) के बाजार हथियाने में मदद मिल रही है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (केआईई) की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'जून 2018 में जीएसटी दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने और जीएसटी प्रणाली के तहत कर अनुपालन बढऩे से संगठित और गैर-संगठित कंपनियों के उत्पादों के बीच कीमतों का अंतर कम रह गया है।' जून 2019 और सितंबर 2019 तिमाहियों में सूचीबद्ध डेकोरेटिव पेंट कंपनियों के कारोबार में दो अंक की तेजी से भी यह बात साफ हो गई है। पेंट कंपनियों ने कीमतें कम की थीं, जिनके बाद इनकी बिक्री खासी बढ़ी थी। केआईई की रिपोर्ट के अनुसार अगले 10 वर्षों में कारोबार के लिहाज से असंगठित पेंट कंपनियां 15 से 17 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी गंवा सकती हैं।

हालांकि महंगे उत्पादों का कारोबार अपेक्षाकृत सुस्त गति से बढ़ा है और हाल की तिमाहियों में सकल मार्जिन सीमित कर दिया था, लेकिन आने वाले समय में ऐसे उत्पादों के लिए संभावनाएं अच्छी दिख रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि महंगे एवं किफायती उत्पादों के बीच कीमतों का अंतर कम हो रहा है, इसलिए महंगे खंड के उत्पादों की बिक्री तेजी से बढऩी चाहिए। शीर्ष कंपनियां कीमतें नियंत्रित करने की बेहतर स्थिति में दिख रही हैं, इसलिए कच्चे तेल में किसी तरह की उथल-पुथल होने की स्थिति में भी मध्यम से दीर्घ अवधि में मार्जिन पेंट कंपनियों के लिए उत्साहजनक दिख रहा है। ऐंटिक स्टॉक ब्रोकिंग के विश्लेषक अभिजित कुंदु कहते हैं, 'अगर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ऐसी ही होती रही तो मार्जिन पर कुछ दबाव जरूर बढ़ सकता है। हालांकि ऐसा देखा गया है कि पेंट कं पनियां कीमतें बढ़ाकर अच्छी तरह अपना मार्जिन संभाल लेती हैं।' हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के आसार तो नहीं दिख रहे हैं। 

हालांकि पेंट कंपनियों का अधिक मूल्यांकन परेशानी का सबब बन सकता है, जिससे इनके शेयरों की बढ़त सीमित रह सकती है। लिहाजा निवेश के लिए सही कीमत पाने के लिए निवेशकों को इन शेयरों में थोड़ी गिरावट का इंतजार करना चाहिए।

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