बिजनेस स्टैंडर्ड - एनसीएलएटी के आदेश पर रोक
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एनसीएलएटी के आदेश पर रोक

गिरीश बाबू / चेन्नई December 08, 2019

सर्वोच्च न्यायालय ने कर्ज में फंसी ऑर्किड फार्मा की समाधान प्रक्रिया से संबंधित नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह फैसला भारतीय स्टेट बैंक की अपील पर हुआ। नवंबर में एनसीएलएटी ने एनसीएलटी की तरफ से ऑकिड फार्मा के लिए गुडग़ांव की धानुका लैबोरेटरीज की मंजूर समाधान योजना को निरस्त करते हुए मामला एनसीएलटी के पास भेज दिया था। एनसीएलएटी ने पाया कि धानुका ने कंपनी की परिसमापन कीमत से कम बोली लगाई और इसे कानून के मुताबिक मंजूर नहीं किया जा सकता।

लेनदारों की समिति के अहम सदस्य भारतीय स्टेट बैंक ने एनसीएलएटी के आदेश पर रोक लगाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। एसबीआई का आरोप था कि अपील ट्रिब्यूनल सीओसी की वाणिज्यिक समझ का अंदाजा लगाने में गलती की है जबकि समिति के अधिकांश सदस्यों ने लंबी बातचीत व योजना की व्यवहार्यता का आकलन करने के बाद धानुका की योजना को मंजूरी दी थी। एनसीएलएटी ने एकॉर्ड लाइफ की अपील के आधार पर फैसला सुनाया था। एकॉर्ड लाइफ, एकॉर्ड समूह का हिस्सा है, जिसकी स्थापना द्रमुक नेता व पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एस जगतरक्षकन ने की थी, जिसकी समाधान योजना एनसीएलटी ने ठुकरा दी थी और धानुका की योजना को मंजूरी दी थी।

एनसीएलएटी के आदेश पर सर्वोच्च न्यायालय के अंतरिम रोक की पुष्टि करते हुए लॉ फर्म इंडिया लॉ एलएलपी के पार्टनर विपिन वारियर (जो एनसीएलटी की प्रक्रिया में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के अधिकार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और सलाह भी दे रहे हैं) ने कहा, एक संभावना यह है कि आर्किड फार्मा के परिसमापन के कारण एनसीएलएटी का आदेश आया होगा, जिसका सभी हितधारकों पर असर होता और इनमें कंपनी के करीब 1,400 कर्मचारी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एकॉर्ड लाइफ, ऑर्किड फार्मा और धानुका लैब को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है।

यह दूसरा मौका है जब एक निवेशक ऑर्किड फार्मा को बचाने के लिए सामने आए, जिसके ऊपर विभिन्न बैंकों का 3,000 करोड़ रुपये बकाया है। इससे पहले एनसीएलटी ने अमेरिकी कंपनी इंजेन कैपिटल की समाधान योजना को अमान्य घोषित कर दिया था क्योंकि कथित तौर पर निवेशक नियम के मुताबिक रकम नहीं ला पाए।

एनसीएलएटी में एकॉर्ड ने अपनी अपील में आरोप लगाया था कि धानुका की वास्तविक समाधान कीमत 570 करोड़ रुपये प्रस्तावित थी जबकि परिसमापन कीमत 1,309 करोड़ रुपये थी। एकॉर्ड ने अपील ट्रिब्यूनल से एनसीएलटी के फैसले को दरकिनार करने का आग्रह किया था, जिसने धानुका की योजना को मंजूरी दी थी। कंपनी ने एकॉर्ड की योजना को खारिज करने के एनसीएलटी के फैसले के खिलाफ भी अपील की है। एनसीएलएटी ने दूसरी अपील खारिज कर दी। एकॉर्ड की समाधान योजना परिसमापन कीमत से कम की है।

इस साल जून में अपने आदेश में एनसीएलटी ने कहा था कि धानुका की समाधान योजना 570 करोड़ रुपये की है, जो परिसमापन कीमत 1,309 करोड़ रुपये से कम है। रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल के मुताबिक, ऑर्किड फार्मा के पास नकद व बैंक शेष 321.98 करोड़ रुपये का है जबकि धानुका की तरफ से कंपनी में 40 करोड़ रुपये की इक्विटी लाने पर सहमत होने के बाद भारतीय स्टेट बैंक ने 184.06 करोड़ रुपये दिया, जिसके बाद कुल रकम करीब 1,116.04 करोड़ रुपये बैठती है, जो कंपनी की परिसमापन कीमत के करीब-करीब बराबर है।

इससे पहले धानुका लैब की योजना को सीओसी ने मंजूर किया था, पर यह संकट में तब फंस गया जब सीओसी सदस्य पीएनबी इंटरनैशनल ने ईमेल भेजकर ई-वोटिंग पर अपने फैसले में बदलाव की मांग की थी। धानुका की योजना को 67.07 फीसदी वोट मिले थे जबकि नियामकीय जरूरत 66 फीसदी वोट की है, लेकिन पीएनबी इंटरनैशनल के मत में बदलाव के बाद यह 65.53 फीसदी बैठती है, जो जरूरी मतदान प्रतिशत से कम है।

एकॉर्ड की दलील है कि इसका मतलब यह हुआ कि धानुका की योजना को सीओसी के जरूरी मत नहीं मिले, लिहाजा एनसीएलएटी इसे स्वीकार नहीं करेगा।
Keyword: orchid pharma, NCLT, NCLAT, Insolvency, Supreme Court, IBC,
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