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भारतीय मीडिया फर्मों के बढ़ते आकार से कारोबार विस्तार

मीडिया मंत्र
वनिता कोहली-खांडेकर /  December 06, 2019

सोनी वायकॉम18 का अधिग्रहण करने जा रही है और सुभाष चंद्रा ने ज़ी एंटरटेनमेंट के चेयरमैन से इस्तीफा दे दिया। आखिर भारत के 1.67 लाख करोड़ रुपये के आकार वाले मीडिया एवं मनोरंजन उद्योग में गत दिनों हुए इन घटनाक्रम के क्या मायने हैं? इसका मतलब है कि मीडिया का जिस तरह से वितरण एवं उपभोग होता रहा है उसमें बुनियादी बदलाव हो रहे हैं और वे कॉर्पोरेट ढांचे में ढलते जा रहे हैं। मीडिया, दूरसंचार एवं तकनीक का सम्मिलन पूरा हो चुका है और बाजार विकास के इस दौर में आकार ही सबसे अहम तत्त्व है। वर्ष 2017 में रुपर्ट मर्डोक ने ट्वेंटी फस्र्ट सेंचुरी फॉक्स की अधिकांश मनोरंजन परिसंपत्तियां 69 अरब डॉलर वाली वॉल्ट डिज्नी कंपनी को बेच दी थीं। इस तरह सेंचुरी फॉक्स ने उस कारोबार से अपना नियंत्रण खत्म कर लिया जिसे उसने छह दशकों में शिद्दत से खड़ा किया था।

 
पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह सौदा इस अहसास का नतीजा था कि मनोरंजन बाजार नए सिरे से गठित हो रहा है, लिहाजा 29 अरब डॉलर से भी कम राजस्व वाली सेंचुरी फॉक्स अपनी प्रासंगिकता के लिए जद्दोजहद करती रह जाएगी। नए प्रतिस्पद्र्धी बेहद बड़े थे और उनके पास कारोबार में बने रहने की अधिक क्षमता थी। इनमें ऐपल (260 अरब डॉलर), एमेजॉन (233 अरब डॉलर), एटीऐंडटी (184 अरब डॉलर) और गूगल एवं यूट्यूब की मूल कंपनी अल्फाबेट (137 अरब डॉलर) शामिल हैं। तकनीक एवं दूरसंचार क्षेत्र की ये दिग्गज कंपनियां दर्शक जुटाने के लिए अरबों खर्च कर रही हैं। इस कारोबार में अभी तक नेटफ्लिक्स (16 अरब डॉलर) का ही दबदबा रहा है। केबल केनक्शन को तिलांजलि देने (कॉर्ड-कटिंग) से भुगतान वाले टीवी कारोबार में मार्जिन बढ़ा जिससे मुनाफे का नीचे गिरना लाजिमी ही था। अधिकतर विश्लेषकों ने इस बिक्री की तारीफ करते हुए कहा था कि मर्डोक ने फॉक्स को भविष्य के झटके झेलने लायक बना दिया। 
 
हालांकि इंटरनेट एवं मांग-आधारित मनोरंजन एक वैश्विक बाजार में संचालित होता है। वैसे भारत मीडिया क्षेत्र में कॉर्पोरेट परिपक्वता या उन्नत पारिस्थितिकी के लिहाज से बाकी दुनिया से दशकों पीछे है। यहां पर इंटरनेट ने वर्ष 1995 में दस्तक दी थी। लेकिन बाजार वृद्धि के कई चरणों को धता बताते हुए यह अलग ढंग से बढ़ा और आज दुनिया भर में वीडियो उपभोग करने वाले अग्रणी देशों में शामिल है। केवल ऑनलाइन ही नहीं बल्कि टीवी पर भी ऐसा ही हो रहा है। 83.6 करोड़ से भी अधिक भारतीय प्रतिदिन परंपरागत टीवी सेट पर चार घंटे से थोड़ा ही कम वक्त बिताते हैं। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। और उनमें से 60 करोड़ से अधिक लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ड्रामा सीरीज, फिल्में एवं उपभोक्ता-सृजित सामग्री देख रहे हैं। कॉमस्कोर के आंकड़े बताते हैं कि गूगल के वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब (27.5 करोड़), टाइम्स ग्रुप के एमएक्स प्लेयर (9.5 करोड़) और डिज्नी के हॉटस्टार (9.1 करोड़ उपभोक्ता) सबसे बड़े लाभार्थी हैं।
 
अमेरिका में ओवर-द-टॉप (ओटीटी) उपभोग का बड़ा हिस्सा केबल पाइपों के दम पर चलता है लेकिन भारत में यह दूरसंचार पाइपों के दम पर चलता है। भारत के कुल मीडिया एवं मनोरंजन  बाजार का 45 फीसदी हिस्सा टीवी प्रसारण का है। देश के शीर्ष दो मीडिया समूहों- ज़ी एवं स्टार मुख्य रूप से ऐसे टीवी प्रसारक हैं जिनका अन्य मीडिया कारोबार में भी दखल है। डिज्नी के हाथों फॉक्स के अधिग्रहण का मतलब यह था कि स्टार इंडिया का स्वामित्व अब एक ऐसी कंपनी के पास है जो फॉक्स के दोगुने आकार की है। भारत में 90 अरब डॉलर के आकार वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज के स्वामित्व वाली जियो के उभार, 12 अरब डॉलर वाली भारती एयरटेल और गूगल से खतरा है। मोटे तौर पर भारत में 10,000 करोड़ रुपये राजस्व के साथ यह देश की सबसे बड़ी मीडिया फर्मों में से एक है। ऐसे में प्रसारकों के लिए खुद को सशक्त करना तात्कालिक जरूरत हो गया है।
 
पिछले साल के आखिरी दिनों में जब ज़ी को अपना कर्ज कम करने की जरूरत थी तो उसने एक रणनीतिक निवेशक लाने का फैसला किया। कॉमकास्ट (84.5 अरब डॉलर) और सोनी (78 अरब डॉलर) संभावित निवेशक माने जा रहे थे लेकिन लेनदारों से दबाव बढऩे पर ज़ी एंटरटेनमेंट का 95 फीसदी से भी अधिक हिस्सा वित्तीय निवेशकों के पास चला गया। वे रणनीतिक बिक्री जल्द ही कर सकते हैं। बड़े दर्शक आधार वाला प्रसारक ज़ी किसी भी तकनीकी या दूरसंचार कंपनी के लिए अहम पूंजी साबित होगी।
 
अपने पोर्टफोलियो को सुधारने के अभियान में लगी सोनी वायकॉम18 में बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने की सोच रही है। ऐसा होने पर सोनी भारत की दूसरी बड़ी मीडिया फर्म बन जाएगी। अगर सब कुछ अनुमान के मुताबिक हुआ तो भारतीय मीडिया जगत की शीर्ष पांच कंपनियां डिज्नी स्टार, सोनी-वायकॉम18, गूगल, टाइम्स ग्रुप और ज़ी एंटरटेनमेंट ही होंगी। ऐसा होने पर दक्षिण भारत का अग्रणी मीडिया समूह कलानिधि मारन का सन टीवी खासा असुरक्षित हो जाएगा। वैश्विक एवं भारतीय कंपनियों के राजस्व आंकड़ों को देखें तो वे बहुत बड़े हैं। और ये सभी कंपनियां इस समय अपने विस्तार के दौर में हैं। फिलहाल मीडिया एवं मनोरंजन कारोबार महज आकार तक सीमित है। इससे कई विलय एवं अधिग्रहण होंगे और कुछ अरब डॉलर स्वाहा होंगे। तब जाकर असली विजेता सामने आएंगे। 
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