बिजनेस स्टैंडर्ड - महंगाई से थमे आरबीआई के कदम
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महंगाई से थमे आरबीआई के कदम

अनूप रॉय / मुंबई December 05, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बाजार को चकित करते हुए आज दरों में कटौती पर 'अस्थायी विराम' लगा दिया। आरबीआई अब दरों पर किसी तरह का निर्णय करने से पहले फरवरी में पेश होने वाले आम बजट में सरकार के उपायों तथा मुद्रास्फीति को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर का इंतजार करेगा। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति ने एकमत से रीपो दर को 5.15 फीसदी पर बरकरार रखने का निर्णय किया। हालांकि आरबीआई ने विकास दर और मुद्रास्फीति के अनुमानों में बदलाव किया है।
 
केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए वृद्घि दर अनुमान को 6.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। इसी तरह दूसरी छमाही में मुद्रास्फीति के 3.5-3.7 फीसदी से बढ़कर 4.7-5.1 फीसदी के दायरे में रहने का अनुमान लगाया है। विनिर्माण गतिविधियों में नरमी की वजह से क्षमता उपयोग में भी गिरावट आई है और यह पहली तिमाही के 73.6 फीसदी से घटकर दूसरी तिमाही में 68.9 फीसदी रह गई। हालांकि दास ने कहा कि आरबीआई वृद्घि दर में नरमी से ज्यादा चिंतित नहीं है। दास ने कहा, 'हम व्यापक स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। सरकार ने कई कदम उठाए हैं और आरबीआई ने भी दरों में लगातार कटौती की है तथा तरलता की स्थिति भी बेहतर बनी हुई है। दरों में कटौती का भी लाभ दिख रहा है। हमें दरों में कटौती का और लाभ देखने के लिए कुछ समय इंतजार करना होगा। इसलिए मौद्रिक नीति समिति ने फिलहाल दरों को यथावत बनाए रखने का निर्णय किया।' 
 
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, 'मुख्य मुद्रास्फीति में मौजूदा तेजी खाद्य पदार्थों के दाम बढऩे की वजह से आई है। हमारा गणित कहता है कि वित्त वर्ष 2020 की चौथी तिमाही में यह उच्च स्तर पर बना रहेगा। लेकिन फरवरी के बाद इसमें नरमी आनी शुरू हो सकती है।' अर्थशास्त्रियों और बाजार को पूरी उम्मीद थी विकास दर में तेजी के लिए दर में कटौती की जाएगी। आरबीआई के निर्णय से 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल 15 आधार अंक चढ़कर 6.61 फीसदी पर बंद हुआ।  डीबीएस समूह के मुख्य अर्थशास्त्री तैमूर बेग ने कहा, 'पिछली बार आरबीआई ने इस तरह से कब चकित किया था, यह मुझे याद नहीं है। अब तक वह विकास दर को बढ़ावा देने को लेकर ज्यादा सक्रियता दिखाता रहा है। हालांकि इस बार उसने बाजार की उम्मीद को धूमिल कर दिया।' 
 
हालांकि केंद्रीय बैंक ने भरोसा दिया कि जब तक दरों में कटौती की गुंजाइश होगी और जब कभी इसकी जरूरत होगी, हम समायोजित रुख जारी रखेंगे। ऐसी संभावना है कि नरमी को दूर करने के लिए सरकार कुछ और वित्तीय तथा अन्य उपाय कर सकती है। आरबीआई दरों में कटौती से पहले आम बजट से भी संकेत लेना चाह रहा है।आरबीआई गवर्नर ने कहा, 'इस महत्त्वपूर्ण घड़ी में बेहतर नीतजे के लिए मौद्रिक और राजकोषीय नीति को समन्वय के साथ काम करना सबसे जरूरी है।' आरबीआई ने फरवरी से अब तक पांच बार में रीपो दर में कुल 135 आधार अंक की कटौती की है। अब मौद्रिक नीति समिति इन कदमों के असर को देखना चाहती है।
 
आईडीएफसी एएमसी में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख सुयश चौधरी ने कहा, 'आरबीआई का यह कदम हमारे लिए चकित करने वाला रहा।' उन्होंने कहा कि नॉमिनल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 2016 के मध्य से 2018 के मध्य तक 11-12 फीसदी से घटकर 6 फीसदी रह गई है। पूरे साल के लिए यह 7 से 8 फीसदी रह सकता है।दास ने कहा कि जहां तक दरों में कटौती का लाभ देने की बात है तो मनी मार्केट के मामले में यह पूरी तरह से किया गया है लेकिन अैंकों ने अभी तक अपने ग्राहकों को इसका पूरा लाभ नहीं दिया है। रुपये में ताजा कर्ज में औसतन 44 आधार अंक की गिरावट आई है। इसका लाभ धीरे-धीरे बैंकों द्वारा ग्राहकों को दिया जा रहा है। 
 
भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा, 'दरों को यथावत रखने का आरबीआई का निर्णय चकित करने वाला रहा, लेकिन उचित है।' हालांकि उन्होंने दरों में कटौती का कोई भरोसा नहीं दिया। आरबीआई ने कहा कि वह वस्तुओं और सेवाओं की खरीदारी में सुविधा प्रदान करने के लिए 10,000 रुपये तक की सीमा वाला एक नया प्री-पेड कार्ड लाएगा।
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