बिजनेस स्टैंडर्ड - मैनकाइंड की नजर अधिग्रहण पर
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मैनकाइंड की नजर अधिग्रहण पर

सोहिनी दास / मुंबई December 05, 2019

भारत सेरम्स ऐंड वैक्सिन के साथ बातचीत विफल रहने के बाद मैनकाइंड फार्मा जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में खरीदारी के लिए गंभीरतापूर्वक संभावनाएं तलाश रही है। कंपनी का मानना है कि उसके जैव प्रौद्योगिकी कारोबार के लिए एक विनिर्माण केंद्र काफी महत्त्वपूर्ण होगा और वह इस क्षेत्र में विलय-अधिग्रहण की योजना बना रही है। इस बीच, मैनकाइंड एक सिंथेटिक महिला हार्मोन उत्पाद को बाजार में उतारने के लिए तैयार है। इसके साथ ही मैनकाइंड सिंथेटिक महिला हार्मोन उत्पाद बनाने वाली भारत की पहली और ऐबट के बाद विश्व की दूसरी कंपनी बन जाएगी।
 
गंभीर चिकित्सा पर ध्यान केंद्रित करने वाली इस कंपनी ने हाल में मधुमेह और हृदयरोग जैसे गंभीर उपचार क्षेत्रोंं पर ध्यान केंद्रित किया है। साथ ही कंपनी अनुसंधान एवं विकास (आरऐंडडी) पर अपने कुल कारोबार का 5 फीसदी खर्च कर रही है। अधिकांश आरऐंडडी खर्च बायोसिमिलर पर किया जाता है। हालांकि 5,600 करोड़ रुपये के कारोबार वाली मैनकाइंड जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अपनी दवाएं भी उतारना चाहती है और इसलिए वह विलय एवं अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश रही है। मैनकाइंड फार्मा के संस्थापक एवं चेयरमैन आरसी जुनेजा ने कहा, 'जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए हम विलय-अधिग्रहण के जरिये वृद्धि हासिल करना चाहते हैं। हमारी नजर किसी उपयुक्त कंपनी के अधिग्रहण पर है जिससे हमें ब्रांड के साथ-साथ विनिर्माण संयंत्र भी हासिल हो सके। हम नपुंसकता श्रेणी में अपनी जैव प्रौद्योगिकी दवा उतारने की योजना बना रहे है। हम भारत सेरम्स के साथ बातचीत कर रहे थे लेकिन बातचीत सफल नहीं रही।'
 
मैनकाइंड फार्मा का मानना है कि अजैव प्रौद्योगिकी विनिर्माण संयंत्र उसके जैव प्रौद्योगिकी कारोबार के लिए काफी महत्त्वपूर्ण है और इसलिए वह अधिग्रहण के जरिये उसे हासिल करना चाहती है। जुनेजा ने कहा कि यदि उन्हें कोई उपयुक्त सौदा नहीं मिला तो वे आंतरिक आरऐंडडी पर ध्यान केंद्रित करेंगे और खुद अपना संयंत्र स्थापित करेंगे। फिलहाल कंपनी के पास 21 विनिर्माण संयंत्र मौजूद हैं। हिमाचल प्रदेश में उसके पाउंटा साहिब संयंत्र को फरवरी में अमेरिकी औषधि नियामक यूएसएफडीए से मंजूरी मिली थी और अब वहां अमेरिकी बाजार के लिए परीक्षण बैच की तैयारी हो रही है।
 
बायोसिमिलर क्षेत्र में भी कंपनी रुमैटोलॉजी श्रेणी में दवा विकसित कर रही है। उसके पास 400 वैज्ञानिकों के साथ दमदार आरऐंडडी टीम है और वह मधुमेह उपचार श्रेणी में भी नई दवाओं पर काम कर रही है। इस बीच, मैनकाइंड फार्मा गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं के उपचार के लिए ड्रायडोजेस्टेरोन युक्त दवा विकसित करने वाली भारत की पहली और विश्व की दूसरी कंपनी बन गई है। जुनेजा ने दावा किया कि भारत में इस दवा का बाजार करीब 400 करोड़ रुपये का है जहां केवल ऐबट का एकाधिकार है।
Keyword: pharma, medicine, mankind,,
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