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फर्मों की आय के लिए रहेंगी मुश्किलें

हंसिनी कार्तिक / मुंबई December 05, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक ने गुरुवार को जब रीपो दरों में कटौती नहीं करने का रुख अपनाया तो बाजार में गिरावट आई। हालांकि बीएसई सेंसेक्स बहुत ज्यादा नहीं टूटा और 40,779 अंक के स्तर पर करीब-करीब स्थिर बंद हुआ। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के प्रमुख पंकज पांडे ने कहा, मौद्रिक नीति में महंगाई बढऩे के अनुमान को कुछ हद तक समाहित किया जा चुका था। प्रभुदास लीलाधर के मुख्य पोर्टफोलियो मैनेजर अजय बोडके ने कहा, भविष्य में अगर जरूरत हुई तो मौद्रिक नीति समिति ब्याज दरें घटाने का इच्छुक होगा, इससे कुछ उम्मीद जगी। लेकिन भारतीय कंपनी जगत के लिए इसमें समस्या छुपी हुई है। प्रमुख नकारात्मक चीज है क्षमता इस्तेमाल, जो पिछले एक साल में 74 फीसदी से घटकर 68 फीसदी रह गया है। आलोचक कहते हैं कि निर्यात मांग और स्थानीय विनिर्माण सुस्त बना हुआ है। सेवा क्षेत्र की गतिविधियां, ग्रामीण उपभोग और वाहन की सुस्त मांग इस समस्या को और बढ़ा रहा है। यह बताता है कि आरबीआई ने वैश्विक रेटिंग एजेंसियों की तरह वित्त वर्ष 2020 के लिए जीडीपी की रफ्तार का अनुमान 5.5 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया। दूसरे शब्दों में इसका मतलब यह है कि कंपनियां मानकर लचे कि मंदी लंबे समय तक रहेगी, जिसमें सुधार में एक साल या ज्यादा वक्त लग सकता है, ऐसे में आय की रफ्तार भी सुस्त बनी रहेगी।
 
इक्विटी के लिए इसका मतलब यह भी है कि अगला सकारात्मक संकेत आम बजट से मिलेगा। बोडके ने कहा, तब तक बाजार अस्थिर या सीमित दायरे में बना रह सकता है। उन्होंने कहा, बजट में उपभोग में मजबूती को लेकर घोषणा मसलन व्यक्तिगत आयकर की दर, पूंजीगत लाभ कर या लाभांश वितरण कर में नरमी से सेंटिमेंट सुधरेगा और शायद देश में उपभोक्ताओं की तरफ से खर्च मेंं सुधार करेगा। इन चीजों में बदलाव हो सकता है, अगर बैंक रीपो दरों में कटौती का फायदा मौजूदा रफ्तार के मुकाबले तेजी से देना शुरू कर दे। इस पर नजर डालिये : आरबीआई ने फरवरी से अब तक रीपो दरों में 135 आधार अंकों की कटौती की है, लेकिन बैंकों की उधारी दर इस अवधि में 49 आधार अंक घटी है। बैंक अक्सर कहते हैं कि छोटी बचत दर, जमा दरों में कटौती के लिहाज से अवरोधकारी है। छोटी बचत दर 6.9 से 8.6 फीसदी तक है, जो बैंक जमा दर से 100-120 आधार अंक ज्यादा है। बैंक हालांकि इस अवधि में जमा दरों में 47 आधार अंकों की कटौती कर चुके हैं, लेकिन इसमेंं कमी चरणबद्ध तरीके से नहीं हुई है।
 
पांडे ने कहा कि उधारी की लागत स्थिर होने के साथ बैंकों के पास बढ़त की गुंजाइश है, जो बढ़त को लेकर ठोस फैसले लेने में सहायता करेगा। उपभोक्ताओं के खर्च व होमलोन की क्षमता की जांच तब होगी जब रकम सस्ती दरों पर उपलब्ध होगी। सितंबर तिमाही के नतीजे का रुख बताता है कि बैंक अब खुदरा कर्ज को लेकर भी सतर्क हो गए हैं, जो डिस्क्रिशनरी गुड्स की मांग बढ़ाने के लिए अहम है। बैंकरों ने कहा कि त्योहारी सीजन में मांग उत्साहजनक रही है। 
Keyword: RBI, repo rate, loan, share market,,
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