बिजनेस स्टैंडर्ड - पीएनबी ने चुना जवाब न देने का विकल्प
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पीएनबी ने चुना जवाब न देने का विकल्प

पवन लाल / नई दिल्ली December 05, 2019

भले ही बड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को सरकार ने गुरुवार को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया है और वह विजय माल्या के बाद इस तरह के दूसरे भारतीय बन गए हैं, लेकिन पिछले साल हुए करोड़ों रुपये के पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले की फोरेंसिक जांच से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले के अनुमान की तुलना में उधार ली गई कुल राशि कहीं ज्यादा है। पीएनबी के अधिकारियों ने एलओयू की सही राशि बताने से इनकार किया है, जो मोदी को जारी किए गए। लेकिन अगर बीडीओ इंडिया के साथ साझा किए गए और कब्जे में लिए गए सभी संबंधित दस्तावेजों को देखें तो मोदी द्वारा एक दशक में लिया गया कुल कर्ज बहुत ज्यादा है।
 
फोरेंसिक जांच से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, 'पीएनबी द्वारा जरूरी सूचनाओं में से सिर्फ 40 प्रतिशत ही मुहैया कराई गई है। इस हिसाब से कोई सीमा नहीं तय की जा सकती है कि कुल कितने मूल्य का एलओयू जारी किया गया है। संभावित मूल्य किसी निजी या सार्वजनिक अनुमान से ज्यादा हो सकता है, जिसे अब तक साझा किया गया है।'  दरअसल यह धोखाधड़ी लोगों के एक समूह द्वारा की गई, जो लंबे समय से बहुत निकटता से काम कर रहे थे। एलओयू सिर्फ पीएनबी के ब्राडी रोड शाखा से ही जारी नहीं हुए बल्कि अन्य शाखाओं और नजदीकी से जुड़े एक गिरोह, जो एक साथ मिलकर काम कर रहे थे, ने मिलकर काम किया। उन्होंने कहा, 'यह सोची समझी और जटिल कवायद थी और किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था।'
 
पिछले एक दशक के दौरान मोदी और उनके सहयोगियों ने कितने पैसे निकाले हैं, यह तय करने के लिए कोई रास्ता नहीं है। इसकी वजह यह है कि फोरेंसिक ऑडिट कंपनी बीडीओ इंडिया को पंजाब नैशनल बैंक ने जो डेटा और एलओयू की प्रतियां मुहैया कराई हैं, धोखाधड़ी की पूरी अवधि की नहीं हैं, जो 2011 में शुरू हुआ था। बीडीओ इंडिया ने इस सिलसिले में मांगी गई जानकारी का कोई जवाब नहीं दिया।  मोदी को आर्थिक भगोड़़ा घोषित किए जाने से भारत स्थित उनकी लग्जरी कारों, कलाकृतियों, आभूषण व रियल एस्टेट सहित सभी संपत्तियां केंद्र सरकार द्वारा जब्त कर ली जाएंगी। पिछले साल मोदी अपने लग्जरी आभूषण कारोबार का आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक पेशकश) आने की उम्मीद कर रहे थे, जिन्होंने करीब एक दशक पहले लेटर आफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के माध्यम से ट्रायल ऐंड एरर के आधार पर लेना शुरू किया। छोटी राशियों से इसकी शुरुआत हुई और उसका भुगतान हो गया। बहरहाल समय बीतने के साथ यह राशि बड़ी होती गई और मोदी ने आखिरी बार एलओयू से 6800 करोड़ रुपये यानी करीब 1 अरब डॉलर लिए। 
 
मुंबई के कर्ज वसूली न्यायाधिकरण में पीएनबी द्वारा दायर कानूनी दस्तावेजों से पता चलता है कि मोदी ने अवैध तरीके से कम से कम 150 एलओयू का इस्तेमाल किया है। यह राशि उनकी फर्मों स्टेलर डॉयमंड, सोलर एक्सपोर्ट और डॉयमंड आर अस द्वारा बराबर के अनुपात में ली गई। ये तीनों कंपनियां समूह की अन्य कंपनियों से जुड़ी थीं, जिनमें फायरस्टार डॉयमंड्स और फायरस्टार डॉयमंड्स इंटरनैशनल प्राइवेट शामिल हैं, जो नीरव मोदी द्वारा चलाए जा रहे जो पारिवारिक ट्रस्टों से जुड़ी हैं।  पीएनबी-नीरव मोदी धोखाधड़ी पर अंतिम फोरेंसिक बीडीओ रिपोर्ट पिछले साल मार्च में आई। बहरहाल इस मामले पर नजर रखने वालों ने कहा कि अगर बैंक आगे और जांच का विकल्प चुनता है तो ज्यादा सही आंकड़े हासिल करने के लिए ऐसा किया जा सकता है। 
Keyword: PNB, nirav modi, fraud,,
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