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नागरिकता बिल पर विपक्ष का बड़ा हिस्सा लामबंद

अर्चिस मोहन /  December 05, 2019

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने विवादास्पद नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) के खिलाफ लामबंद होने का संकेत देते हुए यह तय किया है कि वे अगले कुछ दिनों तक इस प्रस्तावित कानून की 'विभाजनकारी' प्रकृति के बारे में जागरूकता फैलाने की मुहिम चलाएंगे। विपक्षी दल अब अपना ध्यान राज्यसभा में इस विधेयक को रोकने में लगाने के बजाय जन-जागरूकता फैलाने पर लगाना चाहते हैं। इस मकसद से विपक्षी नेताओं की आज संसद के भीतर बैठक भी हुई। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के कक्ष में हुई इस बैठक में विपक्ष की रणनीति पर चर्चा हुई। तमाम विपक्षी नेता इस बात पर सहमत दिखे कि राज्यसभा में अधिकांश क्षेत्रीय दलों के ढुलमुल रवैये के चलते उनके जीत की संभावना काफी कम है। उनका मानना था कि क्षेत्रीय दल या तो विधेयक के समर्थन में वोट करेंगे या फिर वे मतदान से अलग रहने की रणनीति अपनाएंगे। ऐसे में कुछ दलों के दम पर विधेयक को रोका नहीं जा सकता है। जहां तक लोकसभा का सवाल है तो वहां पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अकेले ही स्पष्ट बहुमत मिला हुआ है लिहाजा इस विधेयक को लटकाने के बारे में विपक्ष सोच भी नहीं सकता है। 

 
कांग्रेस ने कहा है कि वह नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करेगी। इसी तरह वामदलों, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और आम आदमी पार्टी (आप) ने भी खुले विरोध की बात कही है। तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी इसके मुखर आलोचकों में शुमार हैं। कांग्रेस के कुछ गठबंधन सहयोगी- मसलन, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। हालांकि ये सभी विपक्षी दल मिलकर भी विधेयक को पारित होने से नहीं रोक सकते हैं।
 
हालांकि भाजपा की अगुआई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के पास भी राज्यसभा में अपने दम पर बहुमत नहीं हासिल है लेकिन उसे पूरा यकीन है कि गठबंधन के बाहर के कुछ क्षेत्रीय दलों के समर्थन से वह इसे पारित करा लेगा। विपक्ष ने तय किया है कि वे चर्चा में भागीदार बनेंगे लेकिन विधेयक पर मतदान के समय वॉकआउट कर जाएंगे। भाजपा ने नागरिकता विधेयक पर क्षेत्रीय दलों का समर्थन हासिल करने की कवायद शुरू भी कर दी है। भाजपा के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), वाईएसआर कांग्रेस और तेलूगुदेशम पार्टी (तेदेपा) विधेयक का समर्थन कर सकते हैं। इसी तरह पूर्वोत्तर राज्यों की छोटी-छोटी पार्टियां भी प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। इसके लिए सिक्किम समेत तमाम पूर्वोत्तर राज्यों के नेताओं को गृह मंत्री अमित शाह ने मुलाकात के लिए बुलाया भी था। विपक्षी सूत्रों का मानना है कि हाल ही में राजग से अलग हो चुकी शिवसेना भी अपनी हिंदुत्ववादी छवि को बनाए रखने के लिए इस विधेयक के पक्ष में मतदान कर सकती है।
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