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आपूर्ति बढऩे से चावल के दाम तीन साल के निचले स्तर पर

रॉयटर्स / बेंगलूरु December 05, 2019

शीर्ष निर्यातक देश भारत में इस सप्ताह चावल के दाम गिरकर तीन साल के निचले स्तर पर आ गए हैं क्योंकि हालिया फसल कटाई से हुई पर्याप्त आपूर्ति के कारण मांग कमजोर हो गई है, जबकि फिलीपींस ने चावल की वियतनामी किस्म के लिए मांग में इजाफा किया है। इस सप्ताह भारत के पांच प्रतिशत टूटे उसने किस्म के चावल के दाम प्रति टन 356 से 361 डॉलर के आस-पास बोले गए हैं जो जनवरी 2017 के बाद से सबसे कम स्तर है, जबकि पिछले सप्ताह दाम 358 से 362 डॉलर के बीच थे। आंध््रा प्रदेश के काकिनाडा में एक निर्यातक ने कहा कि नई फसल से आपूर्ति में तो इजाफा हो रहा है, लेकिन मांग नहीं बढ़ रही है।
 
आज सरकारी आंकड़ों से जानकारी मिली है कि अफ्रीकी देशों की ओर से गैर-बासमती किस्म वाले चावल की कमजोर मांग के कारण अक्टूबर में देश का चावल निर्यात पिछले साल के मुकाबले 42 प्रतिशत गिरकर 4,85,898 टन रह गया है। भारतीय निर्यातकों के अनुसार देश के निर्यात में कमी आने से थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को अपना निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वियतनाम में पांच प्रतिशत टूटे चावल के दाम आज प्रति टन 345 डॉलर बोले गए हैं, जबकि एक सप्ताह पहले दाम 345 से 359 डॉलर के दायरे में थे। हो ची मिन्ह शहर स्थित एक कारोबारी ने कहा कि फिलीपींस की ओर से ज्यादा ऑर्डर मिलने के कारण मांग जोर पकड़ रही है। कारोबारी ने यह भी कहा कि इस बीच निर्यातक इराक और क्यूबा के ग्राहकों के साथ पहले किए गए सौदों के ऑर्डर पूरे करने पर ध्यान दे रहे हैं।
 
वियतनाम के सबसे बड़े चावल उत्पाद क्षेत्र मेकॉन्ग डेल्टा में किसान सर्दी-बसंत की प्रमुख फसल के लिए खेत तैयार कर रहे हैं, लेकिन कारोबारियों को डर है कि शायद फसल की गुणवत्ता पहले जैसी न रहे है। बांग्लादेश सरकार द्वारा गलत ढंग से काम करने वाले कारोबारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की घोषणा और प्रमुख उत्पादों के आयात शुल्क में कटौती पर विचार करने के बाद इस सप्ताह चावल के घरेलू दामों में कुछ गिरावट आई है। भारत गैर-बासमती चावल का निर्यात मुख्य रूप से बांग्लादेश, नेपाल, बेनिन और सेनेगल को तथा बढिय़ा बासमती चावल का निर्यात ईरान, सऊदी अरब और इराक को करता है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2019-20 के पहले सात महीनों के दौरान इसका निर्यात 28 प्रतिशत गिरकर 48.5 लाख टन रह गया।
 
चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष बीवी कृष्ण राव ने कहा कि स्थानीय दामों में अधिकता की वजह से दुनिया में भारतीय चावल अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता गंवा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को विदेशी बिक्री बढ़ाने के लिए सब्सिडी उपलब्ध करानी चाहिए वरना निर्यात कमजोर बना रहेगा।
Keyword: agri, farmer, crop, rice, export,,
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