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गिग वर्कर्स को मिल सकता है बीमा कवर

सोमेश झा / नई दिल्ली December 04, 2019

देश में पहली बार गिग इकोनॉमी में काम कर रहे कामगारों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) द्वारा दिए जाने वाले बीमा लाभ मिल सकते हैं। यह कदम सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2019 का हिस्सा है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज मंजूरी दे दी। इस संहिता में बागान  मजदूरों को भी पहली बार ईएसआईसी के तहत लाने का प्रस्ताव किया गया है। 

गिग वर्कर सामान्यतया शेयरिंग इकोनॉमी में काम करने वाले जैसे उबर, ओला के चालक, जोमैटो, स्विगी आदि के डिलिवरी पर्सन के रूप में काम करने वालों को कहा जाता है। इस तरह की नौकरियां टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म से जुड़ी हुई हैं, जहां कर्मचारी कंपनी से बंधे नहीं होते और वे उतने समय के लिए अपना काम चुन सकते हैं, जितने समय तक काम करना चाहते हैं। 

ईएसआई कानून उन सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा, जहां कम से कम 10 कर्मचारी हैं। बहरहाल खतरनाक काम वाले प्रतिष्ठानों में एक कामगार पर भी यह लागू होगा। इसमें यह विकल्प भी दिया गया है कि 10 से कम कर्मचारी वाली कंपनियां भी ईएसआई योजना का लाभ अपने कर्मचारियों को दे सकती हैं। 

नियत अवधि के कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारियों को नियत अवधि कर्मचारी के रूप में भी जाना जाता है, जिनके लिए 5 साल सेवा पूरी करने पर ग्रेचुटी का प्रावधान है। इस प्रस्ताव से सुनिश्चित होगा कि नियत अवधि के कर्मचारियों को वही लाभ मिल सकेगा, जो स्थाई कर्मचारियों को मिलते हैं। ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972 के मुताबिक इस समय 5 साल सेवा पूरी करने के पहले कर्मचारी ग्रेच्युटी के हकदार नहीं होते हैं। कानून में कैजुअल, कॉट्रैक्चुअल, अस्थायी या स्थायी कर्मचारियों में कोई भेदभाव नहीं किया जाता है, जिन्होंने लगातार 5 साल सेवाएं दी हैं। 

सरकार ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को कर्मचारी बीमा योजना (ईपीएस) और ईएसआई योजना को छोड़कर अन्य उत्पाद चुनने के प्रस्ताव को हटा दिया है। कंपनियों को ईएसआई योजना में कर्मचारियों के वेतन का 4 प्रतिशत अंशदान करना होगा। मसौदा प्रस्ताव में सरकार ने ईपीएस और एनपीएस में अदला बदली का विकल्प देने का प्रस्ताव किया था। इसमें कर्मचारियों को ईएसआई और अन्य बीमा फर्मों को चुनने का विकल्प भी दिया गया था। इन प्रस्तावों को वापस ले लिया गया है। उद्योग संगठनों व मजदूर संगठनों दोनों के विरोध के कारण सरकार ने ईपीएस व एनपीएस की अदला बदली का प्रस्ताव वापस लिया है। 
Keyword: gig economy, labour, ESIC, Social protection, OLA, Uber, Jomato, Swiggy,
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