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चेन्नई के षणमुग ने खोजा इसरो के चंद्रयान-2 का विक्रम लैंडर

गिरीश बाबू /  December 03, 2019

चेन्नई के 33 वर्षीय षणमुग सुब्रमण्यन के ट्विटर खाते पर 1,824 ट्वीट हैं और उनके फॉलोअर की संख्या 5,690 है। उनकी प्रोफाइल में लिखा है कि वह मैकेनिकल इंजीनियर, ब्लॉगर, ऐप डेवलपर, क्यूए इंजीनियर और माइक्रोसॉफ्ट एजर डेवलपर हैं। इसके साथ ही उनके प्रोफाइल में एक पहचान और जुड़ी है, 'मैंने विक्रम लैंडर को खोजा!' सुब्रमण्यन ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा प्रक्षेपित किए गए चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर के अवशेषों को खोजकर अहम उपलब्धि हासिल की है। चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को 7 सितंबर को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी लेकिन अंतिम समय में उसका नियंत्रण टूट गया और वह चांद की सतह पर क्रैश हो गया। 

 
इसरो के साथ साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी विक्रम की खोज कर रही थी लेकिन षणमुग ने नासा द्वारा जारी की गई तस्वीरों के जरिये चांद की सतह पर विक्रम के अवशेषों को पहली बार खोज निकाला।  तस्वीर में विक्रम लैंडर के चांद की सतह से टकराने वाले स्थान और संबंधित अवशेष वाले क्षेत्र दिखाई दे रहे हैं। नासा ने इसकी घोषणा करते हुए कहा, 'लूनर रिकॉनसन्स ऑर्बिटर टीम (एलआरओसी) ने 17 सितंबर को ली गई तस्वीरें 26 सितंबर को जारी की थीं और बहुत से लोगों ने विक्रम को खोजने के लिए इन्हें डाउनलोड किया था। षणमुग ने सही तथ्यों के साथ एलआरओ टीम से संपर्क किया। इसके बाद एलआरओ टीम ने सभी तस्वीरों का दोबारा विश्लेषण किया और इसे सही पाया।'
 
नासा ने कहा कि षणमुग सुब्रमण्यन ने एलआरओ परियोजना टीम से संपर्क किया और मुख्य दुर्घटनास्थल से लगभग 750 मीटर उत्तर पश्चिम में पहले टुकड़े की पहचान की। मदुरै (तमिलनाडु) के रहने वाले षणमुग पहले प्रमुख आईटी कंपनी कॉग्निजेंट में काम करते थे और फिलहाल लेनॉक्स इंडिया टेक्नोलॉजी सेंटर के साथ जुड़े हैं। उन्होंने इसरो के चंद्रयान-2 अभियान को टेलीविजन पर देखा और जब उन्हें खबर मिली कि नासा भी लैंडर को नहीं खोज पाया तो उन्होंने इसे एक चुनौती के रूप में लिया। लैंडर के उतरने वाले स्थान की जानकारी, लैंडर की आखिरी स्थिति और चयनित जगह से इसकी दूरी की जानकारी लेने के बाद उन्होंने नासा द्वारा जारी तस्वीरों के संबंधित हिस्से का गहन विश्लेषण किया। 
 
षणमुग ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में बताया कि इसके लिए उन्होंने करीब चार दिन 7-8 घंटे रोजाना समय दिया। उन्होंने  3 अक्टूबर को अपने ट्विटर खाते पर दो तस्वीरों की तुलना करते हुए लैंडिंग स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर एक स्थान को चिह्नित करते हुए पूछा कि क्या यह विक्रम लैंडर है और क्या लैंडर चंद्रमा की सतह में दफन हो गया है? उन्होंने इसके सत्यापन के लिए एलआरओ टीम के वैज्ञानिकों को भी एक ई-मेल भेजा। षणमुग ने 17 नवंबर को एक अन्य साइट को चिह्नित करते हुए लिखा कि यह लैंडर का दुर्घटना स्थल हो सकता है। उन्होंने इस तस्वीर की तुलना जुलाई 2019 की उसी स्थल की एक तस्वीर से की और दिखाया कि दोनों में थोड़ा अंतर दिख रहा है। 
 
नासा ने मलबे की खोज की घोषणा करने के साथ ही षणमुग को श्रेय दिया और उन्हें एक ईमेल भेजा कि उनकी खोज ने एलआरओसी टीम को अतिरिक्त खोज करने तथा प्राथमिक टक्कर स्थल के साथ-साथ इसके आसपास बिखरे अन्य अवशेषों को भी खोजने में मदद की। नासा ने विक्रम के मलबे वाली तस्वीरों में षणमुग की खोज को भी दिखाया है। अंतरिक्ष एजेंसी ने यह सुनिश्चित किया कि अंतिम परिणामों की घोषणा करने से पहले सभी हितधारकों को अवसर मिले। षणमुग लेनॉक्स इंडिया में टेक्निकल आर्किटेक्ट हैं और उन्होंने भारतीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों द्वारा रिव्यू की गई वेबसाइट तथा ऐंड्रॉइड ऐप विकसित किए हैं। उनके नवोन्मेष में विशेष रूप से टेक्स्ट के लिए बनाया गया वेब ब्राउजर है जो डेटा की खपत कम करता है, ब्रेल आवाज को सपोर्ट करता है और फोन या ऐप की मदद से लेख पढ़ता है। उन्होंने बहुत से ट्वीट एक साथ डिलीट करने वाला ऐप और प्रशांत महासागर तथा हिंद महासागर क्षेत्र में सुनामी अलर्ट वाले ऐप विकसित किए। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा सेंट जोसफ मैट्रिक हायर सेकंडरी स्कूल, मदुरै और गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, तिरुनेलवेल्ली से मैकेनेकिल इंजीनियरिंग में बीई की शिक्षा ग्रहण की। 
Keyword: ISRO, Satellite,vikram, lander, moon,,
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