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दुनियाभर का बदलता श्रम बाजार आईटी क्षेत्र में कम होते रोजगार

इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  December 03, 2019

इन्फोसिस के पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी मोहनदास पई ने हाल ही में यह कहकर हलचल मचा दी कि देश के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग में 30,000 से 40,000 मझोले कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। हकीकत तो यह है कि इस उद्योग में आ रही परिपक्वता के बाद ऐसा आम हो जाएगा। पई फिलहाल मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज के चेयरमैन हैं। उनका यह कहना एकदम सही है क्योंकि जो लोग अपने वेतन के हिसाब से काम में उन्नयन नहीं कर रहे हैं उन्हें विकल्प तलाशने होंगे क्योंकि कंपनियों के पास लोगों की छंटनी करने और अपने आप को नए ढंग से समायोजित करने के अलावा विकल्प नहीं हैं। 

 
हमें तकनीकी क्षेत्र की बेरोजगारी के लिए तैयार रहना होगा क्योंकि तकनीकी प्रगति कौशल, वेतन और रोजगार को गहराई से प्रभावित करेगी। उदाहरण के लिए कोडिंग संबंधी रोजगार आने वाले समय में तमाम आईटी कंपनियों में अप्रासंगिक होते जाएंगे। दुर्भाग्य तो यह है कि न तो मानव और न ही संगठन, तकनीक की दुनिया की गति से तालमेल बिठा पा रहे हैं। उदाहरण के लिए हर 18 महीने में कंप्यूटर प्रोसेसर की शक्ति दोगुनी हो जाती है जबकि हर पांच साल में ये 10 गुना तेज हो रहे हैं। तेज और सस्ते कंप्यूटर तथा कहीं अधिक 'समझदार' सॉफ्टवेयर मशीनों को वे क्षमताएं प्रदान कर रहे हैं जो एक वक्त इंसानों के पास होती थी। आवाज को समझना, एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करना और तय रुझानों को पहचानना इसका उदाहरण है।
 
अब जबकि यह उद्योग उच्च मूल्य सेवाएं देने पर केंद्रित हो रहा है तो आईटी कंपनियों का ध्यान भी अब बड़े आकार के बजाय छोटे लेकिन विशेषज्ञता वाले लोगों के समूह पर है। ऐसे लोग जिनके पास अपने-अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता हो। आश्चर्य नहीं कि अब तक काम में आ रहे कॉल सेंटरों का स्थान अब सवाल जवाब वाली स्वचालित व्यवस्था ले रही है। इन्फोसिस के पूर्व प्रबंध निदेशक विशाल सिक्का ने बहुत पहले इस खतरे के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था कि सबसे बड़ा खतरा स्वचालन और कृत्रिम मेधा  से है जो आसानी से तकनीकी क्षेत्र के रोजगारों का स्थान ले सकती हैं। ऐसे में आगे बने रहने के लिए उन्हें मौजूदा तयशुदा काम के अलावा ग्राहकों के लिए मूल्यवर्धित काम करना होगा। सिक्का ने कहा था कि देश की सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियां अगर समस्या दूर करने वाली और कम लागत पर काम करने वाली कंपनियों के रूप में सीमित रहीं तो उनका बचे रहना मुश्किल होगा। 
 
कई अध्ययनों से पता चला है कि कृत्रिम मेधा की तकनीक अमेरिका में महज कुछ दशक के भीतर मौजूदा रोजगारों में से आधे पर कब्जा कर लेगी। यानी उत्पादन सबंधी पेशों में बहुत बड़ी तादाद में रोजगार समाप्त होंगे। बॉस्टन कंसल्टिंग समूह का अनुमान है कि अमेरिका में प्रति घंटे एक इंसानी वेल्डर की सेवा लेना रोबोटिक वेल्डर की तुलना में तीन गुना तक महंगा पड़ सकता है। यानी कंपनियां रोजगार तो देंगी लेकिन केवल उनको जिनमें उच्चस्तरीय काम करने का कौशल हो। विश्व आर्थिक मंच ने 2018 में 'रोजगार का भविष्य' शीर्षक से अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रिपोर्ट में शामिल 12 उद्योगों के कुल कार्य घंटों में से औसतन 71 फीसदी मनुष्यों द्वारा किए गए जबकि 29 फीसदी मशीन द्वारा। कहा गया कि सन 2022 तक यह औसत 58 फीसदी मनुष्य और 42 फीसदी मशीन में तब्दील हो जाएगा। उदाहरण के लिए सन 2022 तक किसी संस्थान में सूचना और डेटा प्रसंस्करण तथा सूचनाओं के खोज तथा पारेषण का 62 फीसदी काम मशीनों द्वारा किया जाएगा जबकि सन 2018 में यह प्रतिशत महज 46 था। 
 
बहरहाल कई विशेषज्ञ कहते हैं कि ये आशंकाएं गलत हैं क्योंकि तकनीक के उन्नयन के साथ लोग काम के दोहराव से बचेंगे। जब भी तकनीक में अचानक कोई बड़ा परिवर्तन आता है तो ऐसी स्थिति बनती ही है। परंतु यह भी देखा गया है कि तथाकथित नुकसान उठाने वाले नए उद्योग में कहीं न कहीं अपनी जगह बना ही लेते हैं। यह बहस चलती रहेगी लेकिन सीधा तथ्य यह है कि रोजगार चाहने वालों को अपने कौशल उन्नयन पर जम कर काम करना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सन 2022 तक वैश्विक श्रम शक्ति के आधे से अधिक को कौशल में भारी सुधार की आावश्यकता होगी। कौशल संपन्न नए स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति की संभावनाएं नया कौशल अपनाने में पीछे रह गए कर्मचारियों से तकरीबन दोगुनी हैं। जरा सोचिए भारत जैसे देशों पर इसका क्या असर होगा जहां एक करोड़ से अधिक लोग हर वर्ष रोजगार बाजार में शामिल होते हैं। विडंबना यह है कि एक ओर जहां देश की कंपनियों का आधा से अधिक शीर्ष प्रबंधन यह मानता है कि पारंपरिक रोजगार समाप्त हो जाएंगे, वहीं उनमें से एक चौथाई से भी कम ऐसे हैं जिन्होंने अपने संस्थानों में रोजगार उन्नयन या उनके स्वरूप में बदलाव के लिए कोई प्रयास किया है। जबकि यह लगभग अनिवार्य हो चुका है। 
Keyword: infosys, IT, jobs, employment,,
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