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वोडा-आइडिया ने याचिका में बताए वित्तीय हालात

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली December 01, 2019

हालिया एजीआर आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल अपनी समीक्षा याचिका में वोडाफोन आइडिया ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले का असर इतना भयावह है कि हमारी जैसी दूरसंचार कंपनी वित्तीय दिवालियापन के कगार पर पहुंच गई हैं और कंपनी की हैसियत तेजी से घट रही है। अपनी याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से कंपनी ने कहा है कि उसने कोई अनुचित मुनाफा नहीं कमाया है या राजस्व साझेदारी व्यवस्था का फायदा उठाया है। कंपनी ने कहा कि उसके प्रवर्तकों (वोडाफोन, आदित्य बिड़ला समूह) और शेयरधारकों ने 1.90 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है, जिसमें से 1.65 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है। इसके बावजूद कंपनी अभी भी दबाव का सामना कर रही है। कंपनी ने अपनी याचिका में कहा है कि शेयरधारकों समेत कंपनी में कुल निवेश, बैंकों से उधारी और टली हुई भुगतान का दायित्व अभी 3.10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।
 
कंपनी ने कहा है कि पिछले 10 साल में उसका संचयी परिचालन नुकसान 55,175 करोड़ रुपये रहा है, जिसमें वोडाफोन के लाइसेंस वाली इकाइयों का परिचालन शामिल है, जिसका विलय कंपनी में वित्त वर्ष 2018-19 में हुआ। इस नुकसान में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पडऩे वाला असर शामिल नहीं है, जो उनके आकलन के मुताबिक मौजूदा विनिमय दर पर 44,150 करोड़ रुपये यानी 6.3 अरब डॉलर है। वोडाफोन आइडिया ने हाल में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा के लिए याचिका दाखिल की है, जिसके जरिए 1.47 लाख करोड़ रुपये सभी दूरसंचार कंपनियों को एजीआर व स्पेक्ट्रम यूजेज शुल्क के तौर पर संयुक्त रूप से दूरसंचार विभाग को चुकाने हैं। भारती एयरटेल, टेलिनॉर और वीजियोकॉन ने भी समीक्षा याचिका दाखिल की है। वोडाफोन आइडिया का बकाया सभी दूरसंचार कंपनियों में सबसे ज्यादा है।
 
याचिका में चेतावनी देते हुए कहा गया है कि वह वित्तीय दिवालिया होने के कगार पर हो सकती है। वोडाफोन पीएलसी के सीईओ निक रीड ने कहा था कि भारतीय संयुक्त उद्यम परिसमापन की ओर बढ़ रहा है, लेकिन एक दिन बाद उन्होंने बयान वापस ले लिया। अपनी याचिका में वोडाफोन आइडिया ने कहा कि वह अब तक सरकार को स्पेक्ट्रम शुल्क के तौर पर 59,467 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है और उसे कुल 1,39,960 करोड़ रुपये चुकाने हैं। बाकी 89,180 करोड़ रुपये का भुगतान वोडाफोन आइडिया को 2034 तक करना है, जिसमें विभिनन्न किस्तों पर लगने वाला ब्याज शामिल है।
 
याचिका में यह कहते हुए संकट को रेखांकित किया गया है कि कंपनी की हैसियत तेजी से घट रही है। राष्ट्रीयकृत बैंकों व अन्य भारतीय बैंकों के अलावा बॉन्डधारकों का कुल बकाया कर्ज 30 सितंबर 2019 को 24,500 करोड़ रुपये से ज्यादा था। अपनी दलील में कंपनी ने कहा है कि कंपनी और दूरसंचार उद्योग का राजस्व प्रतिस्पर्धा के कारण तेजी से घटा है और अभी राजस्व सिर्फ 13 पैसे प्रति मिनट है, जो 2007-08 में 2 रुपये प्रति मिनट था। यह स्पष्ट तौर पर बताता है कि अब परिचालन बनाए रखने और स्पेक्ट्रम की लागत के लिए राजस्व नहीं के बराबर मिल रहा है। वोडाफोन आइडिया ने अपने आकलन में कहा है कि फैसले का दूरसंचार कंपनियों का कुल असर 1.88 लाख करोड़ रुपये होगा, जो विश्लेषकों के आकलन से ज्यादा है। 
Keyword: vodafone, idea, telecom, equity, share market,,
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