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78 फर्मों में प्रवर्तक हिस्सेदारी है 75 फीसदी से ज्यादा

मयंक पटवर्धन और सचिन मामबटा / मुंबई December 01, 2019

इस वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में 78 कंपनियों में प्रवर्तकों की हिस्सेदारी 75 फीसदी से ज्यादा रही। बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नियम के तहत सूचीबद्ध कंपनियों में प्रवर्तक हिस्सेदारी अधिकतम 75 फीसदी हिस्सेदारी होनी चाहिए। नई सूचीबद्धता या अन्य वजहों (सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों) से सेबी ने उन्हें हालांकि अतिरिक्त समय दिया है। सरकारी फर्मों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता के नियमों का पालन करने के लिए अतिरिक्त समय मिला है। मार्च 2019 में समाप्त वित्त वर्ष में 78 फर्मों का संचयी नुकसान 52,790 करोड़ रुपये रहा। लाभ हासिल करने वाली 48 कंपनियों 20,370.2 करोड़ रुपये कमाए, वहीं 30 कंपनियों का कुल नुकसान 73,160.8 करोड़ रुपये रहा। 
 
सरकारी स्वामित्व वाली तीन इकाइयों आईडीबीआई बैंक, पंजाब नैशनल बैंक और इलाहाबाद बैंक ऐसे फर्मों की सूची में सबसे आगे रहीं और इनका नुकसान वित्त वर्ष 2019 में 8,000 करोड़ रुपये से 15,000 करोड़ रुपये के बीच रहा। कुछ मामलों में हिस्सेदारी इसलिए भी बड़ी क्योंकि प्रवर्तक नुकसान वाली फर्मों में अतिरिक्त पूंजी झोंक रहे हैं। ब्रोकरेज फर्म दौलत कैपिटल मार्केट्स के इक्विटी प्रमुख अमित खुराना ने कहा, दबाव वाली कंपनियों को छोड़ दें तो प्रवर्तकों की तरफ से हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार करने के कम उदाहरण रहे हैं। उनका मानना है कि सामान्य तौर पर प्रवर्तकों ने कंपनियों में और रकम लगाने की शायद इच्छा होगी जब अर्थव्यवस्था में सुधार की और संभावना हो।
 
उन्होंने कहा, अगली कुछ तिमाही में अगर अर्थव्यवस्था निचले स्तर से चढऩा शुरू हो तो काफी प्रवर्तक शायद बोलें कि हमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने दीजिये। शुक्रवार को जारी आंकड़ों में कहा गया है, सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की रफ्तार 4.5 फीसदी रही, जो साल 2013 के बाद का निचला स्तर है। विश्लेषकों की टिप्पणी में कहा गया है कि उच्च बढ़त का दौर शुरू होने में कुछ और वक्त लग सकता है। मांग में कमी और मौजूदा क्षमता के बेकार पड़े रहने के बीच नए निवेश के प्रति अनिच्छा उन वजहों में शामिल हैं जो तेज सुधार में अवरोध खड़ा कर रहे हैं। अपवाद को छोड़ दें तो नियमन के तहत गैर-अनुपालन वाली कंपनियों के लिए न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता पर सख्त कदम उठाया जा सकता है। नियामक ने इस मामले में जुर्माना समेत विभिन्न तरह के कदमों का प्रस्ताव रखा है।
Keyword: company, firm, share, SEBI,,
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