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अब होगी कॉरपोरेट गवर्नेंस की परख

देव चटर्जी / मुंबई December 01, 2019

आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक चंदा कोछड़ ने चूंकि बैंक के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय का रुख किया है, ऐसे में संकट के दौरान बैंक के निदेशक मंडल का व्यवहार कानूनी जांच के दायरे में आएगा। निदेशक मंडल ने पिछले साल मार्च में कोछड़ को क्लीन चिट दे दी थी और इस साल जनवरी में अपना रवैया बदलते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया था। 4 अक्टूबर, 2018 को इसी निदेशक मंडल ने कोछड़ का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था जबकि जून में ही बोर्ड जांच का आदेश दे चुका था, जो अवकाशप्राप्त न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्ण की तरफ से किया जाना था।
 
स्टॉक एक्सचेंजों को 4 अक्टूबर को भेजी सूचना में आईसीआईसीआई बैंक ने कहा था कि निदेशक मंडल ने जल्द रिटायरमेंट के कोछड़ के अनुरोध को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। बैंक ने यह भी कहा था कि बोर्ड की तरफ से जांच का आदेश इससे अप्रभावित रहेगा। उच्च न्यायालय में दाखिल अपनी याचिका में कोछड़ ने कहा है कि इस साल जनवरी में उनकी बर्खास्तगी कानूनी तौर पर अवैध थी। यह बर्खास्तगी भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति बिना की गई, जो सांविधिक जिम्मेदारी का उल्लंघन है।
 
कॉरपोरेट वकीलों के मुताबिक, कोछड़ के पूरे मामले में निदेशक मंडल ने लापरवाही बरती और यह बताता है कि बोर्ड का प्रबंधन ठीक नहीं था। पहले निदेशक मंडल ने मार्च में उन्हें क्लीन चिट दे दी जब मीडिया में यह घोटाला सामने आया था। तब उसके चेयरमैन एम के शर्मा ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए चंदा का बचाव किया था। 6 जून 2018 को बैंक ने अवकाशप्राप्त न्यायाधीश श्रीकृष्ण को अनियमितता के आरोपों की जांच का काम सौंपा जब उसके बड़े शेयरधारकों ने जवाब मांगा था।
 
मुंबई के एक वकील ने कहा, कॉरपोरेट गवर्र्नेंस के ऐसे गंभीर संकट को संभालने के लिए पहला कदम स्वतंत्र जांच होना चाहिए था। अगस्त 2018 में अमेरिकी प्रॉक्सी फर्म ग्लास लेविस ने आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के शेयरधारकों को कोछड़ को चुनने के प्रस्ताव के खिलाफ मतदान की सिफारिश की थी। प्रॉक्सी फर्म ने कोछड़ की तरफ से कानूनी व नियामकीय मसले का सामना करने का हवाला देते हुए यह सुझाव दिया था। इससे कोछड़ पर जल्दी रिटायरमेंट का दबाव और बढ़ा। एक अन्य वकील ने कहा, शेयरधारक बेहतर गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेही चाहते हैं और पूरे विवाद में ये चीजें गायब थीं।
 
इस साल जनवरी में आईसीआईसीआई बोर्ड ने कोछड़ को बर्खास्त कर दिया जब श्रीकृष्ण रिपोर्ट में उन्हें दोषी ठहराया गया। हालांकि इस मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय समेत कई एजेंसियों ने की, लेकिन किसी एजेंसी ने कोछड़ पर आरोपपत्र दाखिल नहीं किया है। भारतीय कानून के मुताबिक, किसी अदालत की तरफ से दोषी ठहराए जाने तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है। वकील ने कहा, तब तक कोछड़ मजबूती से डटी हुई हैं। 
Keyword: ICICI bank, chanda kochcher, SEBI,,
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