बिजनेस स्टैंडर्ड - सीएमडी: दो कुर्सियां कितनी जरूरी
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, December 15, 2019 05:56 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम खबर

सीएमडी: दो कुर्सियां कितनी जरूरी

सुदीप्त दे /  December 01, 2019

हाल में मुंबई में कंपनी प्रशासन पर आयोजित सम्मेलन के दौरान आदित्य बिड़ला समूह के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के उस दिशानिर्देश पर राय मांगी गई थी जिसके तहत शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरमैन और प्रबंधन निदेशक (एमडी) के पद को अप्रैल 2020 से अलग-अलग करने की बात कही गई है। बिड़ला ने अपने औद्योगिक समूह का उल्लेख करते हुए कहा, 'हमारे यहां एमडी और चेयरमैन को काफी लंबे समय से दो अलग-अलग भूमिकाओं में अलग किया गया है। मैं कल्पना नहीं कर सकता कि इन दोनों पदों को कैसे एक किया जा सकता है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह काफी विडंबनापूर्ण होगा कि इन दोनों पदों की गतिविधियों का संचालन एक ही व्यक्ति द्वारा किया जाए। उन्होंने कहा, 'चेयरमैन और मुख्य कार्याधिकारी को संबंधित नहीं किया जाना चाहिए। मुझे उस तरह की स्थिति में होने से डर लगता है। काम करने के लिहाज से वह काफी जटिल स्थिति होगी।'

 
हालांकि भारतीय उद्योग जगत के अधिकतर कारोबारी समूह के प्रवर्तक परिवार बिड़ला की इस राय से इत्तफाक नहीं रखते। सेबी के इस दिशानिर्देश को लागू करने के लिए अंतिम समय-सीमा अप्रैल 2020 है और इसलिए प्रबंधन ढांचे में बदलाव करने के लिए कंपनियों के पास कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे में उद्योग जगत की ओर से इसका जबरदस्त विरोध हो रहा है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि प्रवर्तक परिवारों को सबसे अधिक परेशानी उस प्रावधान से है जिसके तहत कहा गया है कि गैर-कार्यकारी चेयरमैन और प्रबंध निदेशक संबंधित नहीं होना चाहिए। 
 
विशेषज्ञों ने कहा कि प्रवर्तक परिवारों के लिए शीर्ष प्रबंधन के पदों को युक्तिसंगत बनाने और प्रबंधन निदेशक अथवा सीईओ पदों पर पेशेवरों को नियुक्त करने से अधिकतर प्रवर्तक परिवारों को तत्काल राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर उन्हें संबंधित प्रावधानों के तहत दोनों पदों को अलग करना पड़ेगा। ऐसा नहीं है कि भारतीय उद्योग जगत में इस प्रकार के बदलाव नहीं दिख रहे हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और कई यूरोपीय देशों में ऐसे नियम बनाए गए हैं जिनके तहत चेयरमैन और एमडी/सीईओ के पदों को अलग किया गया है। और इसके कारणों को उजागर करना कठिन नहीं है। कंपनी प्रशासन की विशेषज्ञ फर्म एक्सिलेंट इनेबलर्स के चेयरपर्सन और सेबी के पूर्व चेयमैन एम दामोदरन ने कहा, 'चेयरमैन तो बोर्ड का चेयरमैन होता है। बोर्ड की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करने की होती है कि प्रबंधन अपना काम भलीभांति कर रहा है। एमडी प्रबंधन का प्रमुख होता है और वह बोर्ड में प्रबंधन की ओर से जवाब देने के लिए जिम्मेदार होता है।' उन्होंने सवाल उठाया कि यदि चेयरमैन हितधारक समुदाय के लिए जवाबदेह है जो प्रबंधन से सही सवाल पूछने की उम्मीद करता है तो एक ही व्यक्ति इन दोनों जिम्मेदारियों को कैसे निभा सकेगा? दामोदरन का मानना है कि बोर्ड की भूमिका प्रबंधन को सकारात्मक चुनौती देने की होती है। उन्होंने कहा, 'यदि बोर्ड की यह भूमिका होगी तो जाहिर तौर पर इन दोनों भूमिकाओं को अलग कर देनी चाहिए।' 
 
हालांकि टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक वेणु श्रीनिवासन का मानना है कि यह अवधारणा अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए अधिक अनुकूल है। श्रीनिवासन चेयरमैन और प्रबंध निदेशक की भूमिकाओं को अलग करने के मुद्दे पर आपत्ति जताई है।  श्रीनिवासन ने कहा, 'कानून देश की आर्थिक स्थिति और आर्थिक विकास के स्तर पर आधारित होने चाहिए। भारत की मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह अवधारणा प्रासंगिक नहीं है।' उनका मानना है कि भारत में अधिकतर प्रवर्तकों का अपने कारोबार में उल्लेखनीय हिस्सेदारी होती है और वे सबसे बड़े एकल शेयरधारक होते हैं। उन्होंने कहा, 'वे संपत्ति सृजित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत को आंख मूंदकर पश्चिम के नियमों को यहां लागू नहीं करना चाहिए।' इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर काविल रामचंद्रन का मानना है कि भारतीय उद्योग जगत के विरोध की जड़ें काफी गहरी हैं। उन्होंने कई वर्षों तक भारतीय कारोबारी परिवारों के प्रबंधन का अनुसंधान किया है और कई परिवारों को सलाह दी है। उन्होंने कहा, 'वास्तव में वे नहीं चाहते हैं कि कोई बाहरी व्यक्ति उनके लिए निर्णय ले अथवा कहे कि क्या करना चाहिए जबकि उनका मानना है कि वे चीजों को भलीभांति जानते हैं।'
 
हालांकि दामोदरन ने बीच का रास्ता सुझाया है। उन्होंने कहा, 'पहले से ही यह मान लेना कि संबंधियों की भूमिका सही नहीं है। हमने पुत्रों, भाइयों, बेटियों और बहनों को अपने बड़ों से अलग पदों पर काम करते हुए देखा है।' वह इस कानून को लागू करने के पक्ष में हैं। उन्होंने सुझाव दिया, 'जहां तक दो व्यक्तियों के बीच संबंध का सवाल है तो उसे दो-तीन वर्षों में निपटाया जा सकता है। 
इसे लेकर उथल-पुथल मचाने की जरूरत नहीं है।'
 
रामचंद्रन का मानना है कि भारतीय उद्योग जगत के लिए यह बोर्ड की प्रशासन गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक अवसर है। उन्होंने प्रवर्तक परिवारों को सलाह देते हुए कहा, 'उन्हें परिवार के बाहर से उच्च गुणवत्ता वाले सीईओ को तलाशना चाहिए और उसी आधार पर आगे इस भूमिका को दमदार बनाने की जरूरत है। उन्हें स्वतंत्र और अपने मूल्यों को साझा करने में समर्थ व्यक्ति तलाशना चाहिए।'
Keyword: company, CMD, SEBI,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बैंकों की तरह सख्त नियम से एनबीएफसी में बढ़ेगी जवाबदेही?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.