बिजनेस स्टैंडर्ड - आईसीआईसीआई बैंक की स्थिति में सुधार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, December 15, 2019 04:44 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

आईसीआईसीआई बैंक की स्थिति में सुधार

हंसिनी कार्तिक /  December 01, 2019

सितंबर तिमाही के नतीजे आने के बाद आईसीआईसीआई बैंक ने चार चुनौतीपूर्ण वर्षों के बाद अपने शेयर के लिए हालात धीरे-धीरे सामान्य होने के संकेत दिए थे। अगर पिछले तीन महीने में बैंक के शेयर में आई तेजी पर गौर करें तो ऐसा लगता है कि बाजार ने यह बात बहुत पहले समझ ली थी। दूसरी तिमाही में बैंक के प्रदर्शन से जो मुख्य बातें सामने आई हैं, उनमें शुद्ध गैर-निष्पपादित परिसंपत्ति (एनपीए) अनुपात प्रमुख है। आलोच्य अवधि में 1.7 प्रतिशत के स्तर पर यह परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा (एक्यूआर) से पहले के दिनों के स्तर के करीब रहा। बैंक की सालाना ऋण लागत या ऋण से जुड़े जोखिमों के कारण नुकसान पिछले वर्ष के 300 आधार से कम आकर 170 आधार अंक रह गया। एक्यूआर जब चरम पर था तब बैंक की ऋण लागत 627 आधार अंक तक पहुंच गई थी। समाधान के लिए तीन बड़े मामलों से रकम के अनुमानित प्रवाह के बाद ऋण लागत 2019-20 में और कम होकर 120-130 आधार अंक तक रह गई। एस्सार स्टील का मामला पहले ही बैंक के पक्ष में रहा है। 

 
इनके अलावा गैर-निष्पादित ऑस्तियां (एनपीए) बढऩे की दर (स्लिपेज) 2.6 प्रतिशत तक सिमट कर रह गई। एक्यूआर जब चरम पर था तो यह दर 11.4 प्रतिशत थी। हालांकि सितंबर तिमाही में 2,072 करोड़ रुपये के इजाफे के बाद फंसा कर्ज 16,074 करोड़ रुपये के स्तर पर रहा। फंसे ऋणों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण खराब गुणवत्ता वाला ऋण रहा। इससे यह भी संकेत मिला कि निकट भविष्य में ये ऋण बैंक के लिए मुश्किल का सबब बन सकते हैं। मैक्वारी कैपिटल के सुरेश गणपति कहते हैं,'हम सतर्कता बरतते हुए इन आंकड़ों पर नजर रखेंगे।' 
 
वैसे कंपनियों को आवंटित ऋण गुणवत्ता में सुधार से बैंक को राहत जरूर मिली है। इस कॉर्पोरेट ऋण खाते का 66 प्रतिशत हिस्सा ऐसी कंपनियों को दिया गया है, जिनकी क्रेडिट रेटिंग अच्छी है। एक वर्ष पहले यह आंकड़ा करीब 56 प्रतिशत रहा था। इसके परिणामस्वरूप खराब गुणवत्ता वाले कर्ज की हिस्सेदारी 2016-17 के 37.9 प्रतिशत से कम होकर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 31.8 प्रतिशत रह गई। हालांकि इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि  दूसरी तिमाही में ऋण खाते में खराब गुणवत्ता वाले कर्ज में इजाफा हुआ, जिसके बाद इलारा कैपिटल को यह कहना पड़ा कि यह स्थिति बैंक के  चिंता का विषय है।
 
मोटे तौर पर इतना तो कहा जा सकता है कि बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है। एक दूसरा अहम पहलू यह है कि ऋण आवंटन के ढर्रें में भी बदलाव हुआ है। 2017-18 में कुल ऋण आवंटन में खुदरा खंड की हिस्सेदारी 56 प्रतिशत थी और बैंक ने कंपनियों को अधिक कर्ज देने से बचते हुए खुदरा ऋण आवंटन बढ़ाने पर जोर दिया था। इस तरह, दूसरी तिमाही में बैंक में खुदरा ऋण आवंटन की हिस्सेदारी बढ़कर 62 प्रतिशत हो गई, जो किसी भी निजी बैंक के मुकाबले सर्वाधिक है। आईसीआईसीआई बैंक के लिए एक तसल्ली की बात यह है कि इसका खुदरा ऋण पोर्टफोलियो विविधता भरा है और यह बेहतर कारोबार के दम पर तैयार हुआ है। 
 
आवास, ग्रामीण और वाहन ऋण बैंक के खुदरा ऋण पोर्टफोलियो में खासे अहम हैं। हालांकि खुदरा ऋणों के लिए सकल एनपीए एक वर्ष पहले के 1.73 प्रतिशत से बढ़कर दूसरी तिमाही में 1.96 प्रतिशत हो गया। ध्यान देने योग्य बात है कि आईसीआईसीआई बैंक का पोर्टफोलियो असुरक्षित ऋणों के लिहाज से अधिक बेहतर स्थिति में है, बावजूद इसके खुदरा परिसंपत्तियों में जोखिम बढ़ता जा रहा है। ऋण मिश्रण में सुधार और फंसे ऋणों के मामलों से राहत मिलने से बैंक का मुनाफा सुधरा है और प्रतिफल अनुपात भी सकारात्मक हो गया है। इससे भी यह स्पष्ट होता है कि विश्लेषक पहले के मुकाबले शेयर को लेकर अधिक उत्साहित क्यों हो गए हैं। 56 विश्लेषक शेयर खरीदने की सलाह दे रहे हैं, इसलिए आईसीआईसीआई बैंक पर जबरदस्त दांव लगाए जा रहे हैं। आईसीआईसीआई बैंक में विदेशी हिस्सेदारी सितंबर 2016 के 65 प्रतिशत से कम होकर सितंबर 2019 में 54.6 प्रतिशत रह गई है। इससे भी बैंक को थोड़ी तकनीकी मदद मिल रही है। बाद में एमएससीआई इंडिया में आईसीआईसीआई बैंक का भार 3.12 प्रतिशत से बढ़कर 3.12 प्रतिशत हो गया है, जो विदेशी निवेशकों में बैंक को लेकर बढ़ती दिलचस्पी का संकेत दे रहा है। ब्रोकरेज कंपनी मॉर्गन स्टैनली ने कहा, 'हमें लगता है कि अगली दो-तीन तिमाहियों में आईसीआईसीआई बैंक एनपीए कवरेज लेना बंद कर देगा और इक्विटी पर इसका प्रतिफल बढ़ जाएगा। इस वजह से मौजूदा आर्थिक हालात के मद्देजनर शेयर एक आकर्षक विकल्प बन जाता है।' अब इतने बड़े दांव लग रहे हैं तो बैंक को रफ्तार जारी रखने के लिए आने वादों पर खरा उतरना होगा।  
Keyword: ICICI bank, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बैंकों की तरह सख्त नियम से एनबीएफसी में बढ़ेगी जवाबदेही?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.