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अपने फास्टैग को प्रीपेड कार्ड से जोड़ें बचत या चालू खाते से नहीं

बिंदिशा सारंग /  December 01, 2019

अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और थाईलैंड में ऐसा क्या था, जो अभी तक भारत में नहीं था और इसी महीने जिसकी शुरुआत की जा रही है? जवाब है फास्टैग। यह नाम आपने नहीं सुना हो यह तो हो ही नहीं सकता क्योंकि पिछले कुछ हफ्तों से यह शब्द खासा चर्चा में रहा है। देर से ही सही मगर 15 दिसंबर को भारत भी उन 40 से ज्यादा देशों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा, जहां इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह प्रणाली काम कर रही है और यह प्रणाली फास्टैग पर ही काम करती है। रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिटी (आरएफआईडी)कार्ड के जरिये टोल संग्रह की इस प्रणाली में शामिल तकनीक को ही फास्टैग का नाम दिया गया है।

 
बैंक ऑफ बड़ौदा में डिजिटल बैंकिंग के प्रमुख शैलेंद्र सिंह बताते हैं, 'इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह के लिए बने इस कार्ड में बार-बार रकम डाली जा सकती है और आपको यह कार्ड अपनी कार की विंडस्क्रीन यानी आगे वाले शीशे पर चिपकाना होता है। इसके बाद आपको टोल चुकाने के लिए रुकना नहीं पड़ता, जिससे वाहनों की आवाजाही आसान हो जाती है।' सरकार फास्टैग के मुद्दे पर इतनी गंभीर है कि जो लोग फास्टैग का इस्तेमाल नहीं करेंगे, उनसे दोगुना टोल वसूला जाएगा। जाहिर है कि आपके लिए भी अपनी गाड़ी पर फास्टैग लगाना अनिवार्य हो गया है तो आपको इससे जुड़े कुछ जरूरी पहलू समझ लेने चाहिए।
 
फास्टैग खरीदना काफी हद तक प्रीपेड सिम खरीदने जैसा ही होता है। फास्टैग भेजने वाले पॉइंट ऑफ सेल पर पहुंचिए, अपने ग्राहक को जानिए यानी केवाईसी से जुड़े दस्तावेज और अपने वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र (आरसी) जमा कीजिए, आवेदन पत्र भरिए और टैग एक्टिवेट यानी चालू कर लीजिए। सिम कार्ड आपको अपने मोबाइल फोन के अंदर डालना होता है, लेकिन फास्टैग आपको कार पर चिपकाना पड़ता है। जब भी आप किसी टोल प्लाजा से गुजरेंगे, टोल शुल्क आपके फास्टैग खाते में मौजूद राशि से खुद-ब-खुद कट जाएगा।
 
जिस तरह सिम कार्ड को आप बार-बार रीचार्ज कराते हैं, उसी तरह अगर आपका फास्टैग प्रीपेड खाते से जुड़ा है तो आपको उसे भी रीचार्ज कराना पड़ेगा। अगर आप फास्टैग को बचत या चालू खाते से जोड़ लेते हैं तो टोल शुल्क आपके खाते में मौजूद रकम से कट जाएगा। आईसीआईसीआई बैंक में असुरक्षित संपत्तियों के प्रमुख सुदीप्त रॉय बताते हैं, 'ग्राहक जब भी अपने फास्टैग खाते में कोई लेनदेन करते हैं यानी रकम जोड़ते हैं या टोल कटता है तो उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर फौरन टेक्स्ट अलर्ट आता है। बैंकों के डिजिटल माध्यम जैसे यूपीआई, क्रेडिट और डेबिट कार्ड, इंटरनेट तथा मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल कर किसी भी समय फास्टैग में रकम लोड की जा सकती है।'
 
कई बैंक पहले ही फास्टैग से जुड़ चुके हैं जैसे भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, ऐक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, पेटीएम पेमेंट्स बैंक और इक्विटास स्मॉल फाइनैंस बैंक। इसके अलावा विभिन्न बैंकों तथा इंडियन हाईवेज मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड अथवा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा स्थापित किए गए 28,500 से भी ज्यादा पॉइंट ऑफ सेल पर भी ये फास्टैग मिल रहे हैं। ये पॉइंट ऑफ सेल क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) और पेट्रोल पंपों पर भी बनाए गए हैं।
 
सिंह बताते हैं, 'फास्टैग का खाते और बैंक से कोई मतलब नहीं होता।' इसका मतलब है कि आपको टैग लेने के लिए उस बैंक में नहीं जाना पड़ेगा, जहां पहले से ही आपका खाता है या जहां से आपने कर्ज लिया है। किसी भी पॉइंट ऑफ सेल पर जाएं। वहां आपसे एकबारगी जमा राशि ली जाएगी, जो 200 रुपये (कार, जीप और वैन के लिए) से शुरू होती है। इसके साथ ही आपको कम से कम 100 रुपये का रीचार्ज भी करना होगा। टैग पांच साल के लिए वैध होता है। कार, जीप और वैन मालिकों के फास्टैग में कम से कम 160 रुपये रहने चाहिए।
 
चूंकि फास्टैग अनिवार्य कर दिया गया है तो इससे जुड़े जोखिम समझना भी जरूरी हो जाता है। मुंबई में रहने वाले साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ऋतेश भाटिया बताते हैं, 'फास्टैग हासिल करने के लिए आपको अपनी निजी जानकारी उपलब्ध करानी या अपलोड करनी पड़ती है। इसमें आपके केवाईसी से जुड़े दस्तावेज, छायाचित्र और मोबाइल नंबर शामिल होते हैं। इस जानकारी की सुरक्षा का जिम्मा इस पूरी प्रणाली में शामिल हरेक पक्ष पर होता है। सुरक्षा में कहीं भी चूक हो गई तो पहचान की चोरी का खतरा खड़ा हो जाएगा। साथ ही ऐसा लगता है कि टोल बूथ पर लगे कैमरे वहां से गुजरने वाली कारों और उनमें बैठे चालकों की तस्वीर ले लेते हैं। इन तस्वीरों को भी पूरी तरह महफूज रखने की जरूरत है। यह पूरी तकनीक एक तरह से आपके वाहन का 'आधार' यानी पहचान है। इसीलिए इसमें शामिल सभी पक्षों को निजता की सुरक्षा का पूरा खयाल रखना चाहिए।' 
 
ऊपर बताई गई बातों का ध्यान उन संस्थाओं को रखना चाहिए, जो इस पूरी व्यवस्था में शामिल हैं। लेकिन आप अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं? याद रखिए कि आप अपने फास्टैग को बैंक में पहले से चल रहे अपने बचत या चालू खाते से जोड़ सकते हैं और आपके पास उसे किसी प्रीपेड खाते से जोडऩे का विकल्प भी मौजूद है। कोई भी तकनीक 100 फीसदी अभेद्य नहीं होती यानी हर जगह सेंध लग सकती है। इसीलिए बेहतर है कि बाद में पछताने के बजाय पहले ही अपनी हिफाजत का पूरा ध्यान रखा जाए। इसलिए अपने फास्टैग को बैंक के बचत या चालू खाते से जोडऩे के बजाय प्रीपेड कार्ड से जोडऩा बेहतर रहेगा। अगर आपने पूरा केवाईसी करा लिया है तो आप प्रीपेड कार्ड में 1 लाख रुपये तक की रकम लोड कर सकते हैं, जो लंबे अरसे तक आपकी टोल भुगतान की जरूरत पूरी करती रहेगी।
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