बिजनेस स्टैंडर्ड - डेट फंडों की परिसंपत्ति घटे तो फौरन पड़ताल करें
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Sunday, December 15, 2019 05:03 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

डेट फंडों की परिसंपत्ति घटे तो फौरन पड़ताल करें

संजय कुमार सिंह /  December 01, 2019

डेट म्युचुअल फंडों के लिए परेशानियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। सितंबर में दो कंपनियों अल्टिको कैपिटल और रिलायंस बिजनेस ब्रॉडकास्ट न्यूज होल्डिंग्स (आरबीबीएनएच) अपने बॉन्ड पर ग्राहकों को भुगतान नहीं कर पाईं, जिससे फंड कंपनियों पर संकट और भी गहराता दिखा। इसकी वजह यह है कि फंड कंपनियों ने इन दोनों इकाइयों में मोटा निवेश किया था। अल्टिको कैपिटल के बॉन्ड में कंपनियों के 537.67 करोड़ रुपये और आरबीबीएनएच एवं इससे संबद्ध कंपनियों के बॉन्ड में 947.37 करोड़ रुपये लगे थे। डिफॉल्ट और रेटिंग में गिरावट के कारण इन बॉन्ड में रकम लगाने वाले फंडों के शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) में ठीकठाक कमी आई है। अल्टिको कैपिटल गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) है, जो रियल एस्टेट में जमकर निवेश करने का खमियाजा भुगत रही है। आरबीबीएनएच मोटे कर्ज बोझ से जूझ रही है। 

 
विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को डेट फंडों के मामले में समय अवधि पर आधारित सरल निवेश ढांचे पर चलना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार डेट फंडों की प्रत्येक श्रेणी में निवेश के लिए एक अवधि तय करनी चाहिए। अगर निवेश अवधि छोटी है तो लिक्विड, अल्ट्रा-शॉर्ट या कम अवधि के फंडों में निवेश करें। रेडवुड रिसर्च की सह-संस्थापक विद्या बाला का सुझाव है, 'एक साल की समय अवधि वाले निवेशकों को क्रेडिट रिस्क या मध्यम अवधि के फंडों में निवेश नहीं करना चाहिए। ऐसी योजनाओं के साथ साख से जुड़े जोखिम होते हैं और इनमें कम तरलता वाले बॉन्ड रखे जाते हैं।' ऐसे फंडों के लिए तीन साल या इससे अधिक समय लगाने की जरूरत पड़ती है। अगर इन फंडों पर क्रेडिट डिफॉल्ट का जोखिम आता है तब भी निवेशक इनमें निवेश बनाए रख सकते हैं और आने वाले समय में अपना प्रतिफल सुधरने तक इंतजार कर सकते हैं या बकाया रकम की वसूली से लाभ (डीएचएफएल और एस्सेल म्युचुअल फंडों को रकम लौटा चुकी हैं) ले सकते हैं। भुगतान में चूक की हालिया घटनाओं का असर निश्चित परिपक्वता अवधि वाली कई योजनाओं (एफएमपी) पर भी पड़ा है। क्लोज्ड एंड फंड अगर लंबी अवधि के हैं तो उन्हें दूर से ही नमस्ते कर देना चाहिए। बाला कहती हैं, 'निवेशकों के पास उन योजनाओं से बाहर निकलने का विकल्प होना चाहिए, जिनमें थोड़ा सा भी जोखिम होता है।' 
 
एफएमपी सावधि जमा (एफडी) की तरह सुरक्षित नहीं होते हैं। जो लोग एक या दो साल के एफएमपी में निवेश करते हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी योजना केवल एएए-रेटिंग प्राप्त या सरकारी बॉन्ड में निवेश करती हो। कई फंड कंपनियों ने हाल में भुगतान में चूक के बाद कमजोर योजनाओं को अलग करना (साइडपॉकेटिंग) शुरू कर दिया है। साइडपॉकेटिंग के जरिये खराब प्रदर्शन करने वाली योजनाओं को एक अलग पोर्टफोलियो में रखने से मुख्य पोर्टफोलियो से निकासी का जोखिम कम हो जाता है। 
 
ऐसे फंडों में बने रहने का निर्णय दो बातों पर निर्भर करता है। अगर आपको रकम की जरूरत है तो नुकसान कम करें और बाहर निकल जाएं। अगर निवेश बनाए रखने का निर्णय लेते हैं तो मुख्य पोर्टफोलियो में खराब गुणवत्ता वाली योजनाएं नहीं रहने दें। कुछ सलाहकार अपने क्लाइंट को बड़े आकार के फंड में निवेश करने ही सलाह देते हैं। पर्सनलफाइनैंस प्लान के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं,'बड़े आकार के फंड ऐसी चीजों से कम प्रभावित होते हैं।' विभिन्न जगह निवेश करने वाला एक कुशल फंड भुगतान में एकाध चूक से प्रभावित नहीं होता है। इतना ही नहीं, जब एक छोटे फंड में भुगतान में चूक होती है और फंड प्रबंधक पर निकासी का दबाव बढ़ता है तो उच्च गुणवत्ता वाली योजनाएं बेचनी पड़ती हैं। इससे पोर्टफोलियो में खराब गुणवत्ता वाली योजनाओं की संख्या बढ़ जाती है। डेट फंडों की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में तेजी से गिरावट के मद्देनजर निवेश रोक दें और आगे की पड़ताल शुरू कर दें। 
 
पोर्टफोलियो की गुणवत्ता जांचने और इसमें तब्दीली करने के लिए किसी सलाहकार की मदद ले सकते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाला पोर्टफोलियो वह होता है, जिसका एए+ और एएए+ बॉन्ड में निवेश होता है। इसके अलावा केवल पिछले प्रदर्शन के आधार पर आंख मूंद कर निवेश नहीं करें क्योंकि हो सकता है कि पूर्व में अधिक साख या ब्याज दर जोखिम वाली योजनाओं में निवेश करने से बेहतर प्रतिफल मिला होगा। सेवानिवृत्त लोग, जो फिक्स्ड इनकम पोर्टफोलियो पर निर्भर हैं, उन्हें डेट फंडों में अधिक जोखिम वाली योजनाओं से पूरी तरह बचना चाहिए। निचले कर दायरे में आने वाले लोगों के लिए एफडी के साथ बने रहना अच्छा होगा। 
Keyword: mutual fund, sebi, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बैंकों की तरह सख्त नियम से एनबीएफसी में बढ़ेगी जवाबदेही?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.