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संप्रग मॉडल से उबरेगी एनबीएफसी

एनबीएफसी को नकदी समर्थन, प्रतिभूतियों पर सरकारी गारंटी देने का प्रस्ताव
अर्चिस मोहन, संजीव मुखर्जी और अरूप रॉयचौधरी / नई दिल्ली 11 28, 2019

उपायों पर विचार

अगले वित्त वर्ष के आम बजट में हो सकता है इसका प्रावधान
2009 में संप्रग सरकार ने भी एनबीएफसी को उबारने के लिए की थी ऐसी ही पहल
वित्त मंत्रालय इस दिशा में कर रहा है विचार
एसपीवी के जरिये नकदी मुहैया कराने का प्रस्ताव

बिजनेस स्टैंडर्ड संप्रग मॉडल से उबरेगी एनबीएफसीनरेंद्र मोदी सरकार संकट में फंसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को उबारने के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की पिछली सरकार के मॉडल पर ही काम कर सकती है। सरकार के भीतर एनबीएफसी संकट में सीधे हस्तक्षेप के उस मॉडल की वकालत की जा रही है, जो 2009 में तत्कालीन वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने लागू किया था। सरकार ने वित्तीय मामलों की संसदीय समिति को पिछले हफ्ते भेजे एक प्रस्ताव में कहा, 'वित्तीय स्थायित्व के लिए सीधे हस्तक्षेप के उपाय से इस क्षेत्र की चुनौतियां और नकदी संकट दूर करने में मदद मिल सकती है।' वित्त मंत्रालय में इस प्रस्ताव पर उच्च स्तरीय चर्चा की गई है और अगले साल फरवरी में आम बजट में इसे शामिल किया जा सकता है।

वर्ष 2009 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुआई वाली संप्रग सरकार ने वैश्विक वित्तीय संकट के बाद एनबीएफसी क्षेत्र में नकदी बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की थी। इनमें 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति वाली एनबीएफसी को विशेष उद्देश्य वाली इकाई (एसपीवी) के जरिये नकद सहायता मुहैया कराना शामिल था। जिन एनबीएफसी की गैर-निष्पादित आस्तियां 5 फीसदी से ज्यादा नहीं थीं, उन्हें इस योजना के तहत वित्तीय सहायता का पात्र माना गया था। इस योजना से एनबीएफसी की नकदी की स्थिति तेजी से सुधर गई। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार इस योजना के तहत 25,000 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे।

प्रस्ताव में एनबीएफसी को मौजूदा संकट से उबारने के लिए संप्रग कार्यकाल की योजना को अमल में लाने का पक्ष तो लिया ही गया है, उसका खाका भी तैयार कर दिया गया है। इसमें कहा गया कि केंद्र इन एसपीवी द्वारा जारी प्रतिभूतियों पर गारंटी देने के बारे में विचार कर सकता है। गारंटी देने के पीछे जनहित में वित्तीय स्थायित्व को बरकरार रखने का तर्क दिया जा सकता है। ये प्रतिभूतियां सुरक्षित होंगी और इनके एवज में जमानत भी रखी जाएगी। एसपीवी का गठन 2009 की ही तरह सार्वजनिक-निजी साझेदारी के तहत किया जा सकता है। 

प्रस्ताव के अनुसार सरकारी गारंटी के आधार पर रिजर्व बैंक एसपीवी द्वारा जारी पीटीसी खरीदेगा। इसके लिए संबंधित एनबीएफसी के पुनर्वित्तपोषण के मकसद से आ रहे वाणिज्यिक पत्रों या कॉर्पोरेट डिबेंचरों को खरीदा जाएगा।  प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि सरकार को आरबीआई अधिनियम की धारा 17 और 18 का सूक्ष्मता से अध्ययन करना चाहिए और आरबीआई द्वारा गैर-सॉवरिन कोलेटरल के एवज में व्यावसायिक क्षेत्र को नकदी मुहैया कराए जाने के लिए ढांचा तैयार करना चाहिए। इसके अलावा एनबीएफसी के लिए एक विशेष रीपो व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है। नोट में कहा गया है, '2009 के आईडीबीआई स्ट्रेस्ड ऐसेट्स स्टैबिलाइजेशन फंड जैसी व्यवस्था कारगर हो सकती है।'

बैंक और गैर-बैंकिंग स्रोतों से व्यावसायिक क्षेत्र को मिलने वाली रकम चालू वित्त वर्ष में कम होकर 1 लाख करोड़ रुपये ही रह गई, जो पिछले वर्ष अप्रैल और सितंबर के बीच करीब 7.36 लाख करोड़ रुपये थी। प्रस्ताव में कहा गया है, 'ऋण एवं रियल एस्टेट के लिहाज से एनबीएफसी क्षेत्र के सामने आई चुनौतियों का उपभोक्ताओं के हौसले पर और कुल मांग पर असर होता है।' इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि सरकार की सक्रिय नीति से इस क्षेत्र की दिक्कतें तेजी से दूर हो सकती हैं। 
Keyword: NBFC, bank, payment, RBI,,
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